सुप्रीम कोर्ट ने डॉक्टरों पर हमले करने वाले जनप्रतिनिधियों को कड़ी चेतावनी, कहा- कानून सब पर बराबर है
जज विक्रम नाथ और संदीप मेहता की पीठ ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में किसी को भी कानून से ऊपर नहीं माना जा सकता और elected representatives को कानून के शासन की रक्षा की विशेष जिम्मेदारी है। उन्होंने ठाणे के म्युनिसिपल अस्पताल में डॉक्टरों से हिंसा के आरोप में शिवसेना पार्षद रमेश म्हात्रे व अन्य की जमानत रद्द कर दी। न्यायालय ने सभी आरोपियों को आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया और डॉक्टरों की सुरक्षा व स्वास्थ्य सेवाओं के सम्मान की वकालत की।

सौजन्य से:- Jagran
डॉक्टरों पर बढ़ते हमलों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, कहा- कानून से ऊपर कोई नहीं
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया कि जनप्रतिनिधियों पर कानून ...और पढ़ें
HighLights
- कोर्ट ने कड़े शब्दों में चेताया कि कानून से ऊपर कोई नहीं है
- संवैधानिक लोकतंत्र में कानून की सीमा लांघने की अनुमति किसी को नहीं दी जा सकती
पीटीआई, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने देश में लगातार बढ़ रही हिंसा की घटनाओं, विशेषकर जनप्रतिनिधियों द्वारा डॉक्टरों पर किए जा रहे हमलों पर बेहद सख्त रुख अपनाया है।
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया कि जनप्रतिनिधियों पर कानून के शासन को बनाए रखने और समाज में जनता का विश्वास मजबूत करने की विशेष जिम्मेदारी होती है।
कोर्ट ने कड़े शब्दों में चेताया कि कानून से ऊपर कोई नहीं है। संवैधानिक लोकतंत्र में कानून की सीमा लांघने की अनुमति किसी को नहीं दी जा सकती।
कोर्ट ने ठाणे के एक म्युनिसिपल अस्पताल में डॉक्टरों के साथ मारपीट और दुर्व्यवहार के आरोपित शिवसेना पार्षद रमेश म्हात्रे और अन्य की जमानत रद करते हुए यह टिप्पणी की।
कोर्ट ने कहा कि यदि जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधि ही कानून को अपने हाथ में लेने लगें और डराने-धमकाने का रास्ता अपनाएं, तो यह लोक व्यवस्था और सामाजिक शांति के लिए गंभीर खतरा है।
सुप्रीम कोर्ट ने जोर देकर कहा कि कोई भी व्यक्ति, चाहे वह कितना भी ऊंचे पद पर क्यों न हो, कानून के अनुशासन से ऊपर नहीं हो सकता। चुनावी जनादेश का मतलब व्यक्तिगत अधिकार या असीमित शक्ति नहीं है।
उन्होंने कहा कि चिकित्सा पेशेवर अत्यंत संवेदनशील परिस्थितियों और आपात स्थितियों में लोगों की जान बचाने का कठिन कार्य करते हैं। ऐसे में अस्पतालों में डर और असुरक्षा का माहौल बनाना न केवल डॉक्टरों की गरिमा और सुरक्षा को खतरे में डालता है, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं को भी बुरी तरह प्रभावित करता है।
सुप्रीम कोर्ट ने सभी आरोपितों को आत्मसमर्पण करने का निर्देश देते हुए कड़े शब्दों में चेताया कि संवैधानिक लोकतंत्र में कानून की सीमा लांघने की अनुमति किसी को नहीं दी जा सकती।
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