होमअपराधहाईकोर्ट ने नोएडा डीएम की हिरासत प्रक्रिया की कड़ी निंदा, सुप्रीम कोर्ट में पाँच लाख की मुआवजा याचिका
अपराध

हाईकोर्ट ने नोएडा डीएम की हिरासत प्रक्रिया की कड़ी निंदा, सुप्रीम कोर्ट में पाँच लाख की मुआवजा याचिका

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नोएडा जिलाधिकारी मेधा रूपम द्वारा एक छात्रा की हिरासत आदेश देने के तरीके की गंभीर आलोचना की और कहा कि ऐसी बेलगाम नौकरशाही उत्तर प्रदेश को 'ऑर्वेलियन डिस्टोपिया' बना सकती है। हाईकोर्ट के फैसले के बाद, डीएम ने सुप्रीम कोर्ट में पाँच लाख रुपये की वेतन कटौती को हटाने की याचिका दायर की है, जो राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) के तहत अवैध हिरासत का परिणाम था।

13 सितंबर 2026 को 11:04 am बजे
हाईकोर्ट ने नोएडा डीएम की हिरासत प्रक्रिया की कड़ी निंदा, सुप्रीम कोर्ट में पाँच लाख की मुआवजा याचिका

सौजन्य से:- Amar Ujala

नोएडा डीएम को हाईकोर्ट की फटकार: पांच लाख जुर्माने के खिलाफ पहुंचीं सुप्रीम कोर्ट, छात्रा पर लगाया था एनएसए

हाई कोर्ट ने डीएम द्वारा हिरासत का आदेश पारित करने के तरीके की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि यदि बेलगाम नौकरशाही का ऐसा तानाशाही आचरण जारी रहा, तो उत्तर प्रदेश एक 'ऑर्वेलियन डिस्टोपिया' में बदल सकता है।

विस्तार

गौतम बुद्ध नगर (नोएडा) की जिलाधिकारी मेधा रूपम ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के उस आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है, जिसमें एक छात्रा को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) के तहत अवैध रूप से हिरासत में रखने पर उनके वेतन से पांच लाख रुपये का मुआवजा काटने का निर्देश दिया गया था।

मामला क्या है?

अप्रैल 2026 में नोएडा में मजदूरों के वेतन वृद्धि की मांग को लेकर हुए शांतिपूर्ण प्रदर्शन के मामले में दिल्ली यूनिवर्सिटी की 25 वर्षीय छात्रा (इतिहास स्नातक) आकृति चौधरी को गिरफ्तार किया गया था। 13 मई को उत्तर प्रदेश पुलिस ने आकृति चौधरी और सामाजिक कार्यकर्ता-पत्रकार सत्य वर्मा पर सख्त राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) लगा दिया था।

इलाहाबाद हाई कोर्ट का सख्त फैसला

2 सितंबर को इलाहाबाद हाई कोर्ट ने आकृति चौधरी की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका को स्वीकार करते हुए उनकी हिरासत को रद्द कर दिया था। कोर्ट ने अपने आदेश में कई कड़ी टिप्पणियां कीं। अदालत ने पाया कि हिरासत की पूरी कार्रवाई राज्य द्वारा "गढ़ी गई" एक कहानी पर आधारित थी।

वेतन से पांच लाख की कटौती

कोर्ट ने छात्रा को पांच लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया और निर्देश दिया कि यह राशि डीएम मेधा रूपम और एसएचओ (एसएचओ) सहित इस आदेश के लिए जिम्मेदार अन्य अधिकारियों के वेतन से काटी जाए। अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि डीएम और मामले की फाइल तैयार करने में शामिल पुलिस अधिकारियों के सर्विस रिकॉर्ड में हाई कोर्ट की यह नाराजगी दर्ज की जाए।

नौकरशाही को अदालत की कड़ी फटकार

हाई कोर्ट ने डीएम द्वारा हिरासत का आदेश पारित करने के तरीके की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि यदि बेलगाम नौकरशाही का ऐसा तानाशाही आचरण जारी रहा, तो उत्तर प्रदेश एक 'ऑर्वेलियन डिस्टोपिया' (एक ऐसा राज्य जहां सरकार नागरिकों के जीवन पर पूर्ण नियंत्रण रखती है) में बदल सकता है। कोर्ट ने जोर देकर कहा कि अधिकारियों को यह याद रखना चाहिए कि उनकी निष्ठा राजनीतिक कार्यपालिका (नेताओं) के प्रति नहीं, बल्कि संविधान के प्रति है। लोकतंत्र में जनता ही मालिक है और अधिकारी उनके सेवक हैं।

सुप्रीम कोर्ट में अपील

इस मामले में 9 सितंबर को सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया था कि हाई कोर्ट के इस फैसले (हिरासत आदेश रद्द करने) के खिलाफ राज्य की ओर से अपील दायर की जाएगी। इसी क्रम में अब नोएडा की डीएम मेधा रूपम ने अपने खिलाफ हुए जुर्माने और सर्विस रिकॉर्ड के आदेश को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर दी है।

Powered by Nyaya 247 News

संबंधित ख़बरें

इसी विषय की और ख़बरें →
अंबेडकरनगर में राष्ट्रीय लोक अदालत ने सुलह‑समझौते से 1.4 लाख से अधिक विवादों का समाधान किया
अपराध

अंबेडकरनगर में राष्ट्रीय लोक अदालत ने सुलह‑समझौते से 1.4 लाख से अधिक विवादों का समाधान किया

सुप्रीम कोर्ट ने AI‑जनित डीपफ़ेक के नियमन की पीआईएल पर गुजरात हाई कोर्ट की सुनवाई को रोका
अपराध

सुप्रीम कोर्ट ने AI‑जनित डीपफ़ेक के नियमन की पीआईएल पर गुजरात हाई कोर्ट की सुनवाई को रोका

डिजिटल कोर्टरूम: ऑनलाइन सुनवाई और वर्चुअल असिस्टेंट से तेज़ न्याय
अपराध

डिजिटल कोर्टरूम: ऑनलाइन सुनवाई और वर्चुअल असिस्टेंट से तेज़ न्याय

Baptismal certificate alone cannot prove victim’s age under POCSO: Supreme Court
अपराध

Baptismal certificate alone cannot prove victim’s age under POCSO: Supreme Court

नोएडा की जिलाधिकारी मेधा रूपम ने हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की
अपराध

नोएडा की जिलाधिकारी मेधा रूपम ने हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की

सुप्रीम कोर्ट ने शाब्दिक नियम को प्राथमिकता दी, रचनात्मक रिज‑जुदिकाटा के सिद्धांतों को स्पष्ट किया
अपराध

सुप्रीम कोर्ट ने शाब्दिक नियम को प्राथमिकता दी, रचनात्मक रिज‑जुदिकाटा के सिद्धांतों को स्पष्ट किया

सुप्रीम कोर्ट ने जमानत के बाद विजय जुलूस निकाले अपराधी को कोर्ट में लाने का आदेश दिया
अपराध

सुप्रीम कोर्ट ने जमानत के बाद विजय जुलूस निकाले अपराधी को कोर्ट में लाने का आदेश दिया

ऑस्ट्रेलिया के 150 मिलियन डॉलर्स के आदिवासी भूमि निर्णय: भारत के जनजातीय अधिकारों के लिए सीख
अपराध

ऑस्ट्रेलिया के 150 मिलियन डॉलर्स के आदिवासी भूमि निर्णय: भारत के जनजातीय अधिकारों के लिए सीख

ताज़ा ख़बरें