सुप्रीम कोर्ट: जमानत पर निर्णय में निष्पक्षता और संतुलन आवश्यक
सुप्रीम कोर्ट ने आपराधिक मामलों में जमानत पर निर्णय लेते समय अदालतों को स्थापित कानूनी सिद्धांतों का पालन करने की आवश्यकता पर जोर दिया है

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए स्पष्ट किया कि आपराधिक मामलों में जमानत पर निर्णय लेते समय अदालतों को स्थापित कानूनी सिद्धांतों का पालन करना चाहिए। न्यायालय ने कहा कि व्यक्तिगत स्वतंत्रता भारतीय संविधान के मूल अधिकारों में से एक है और जमानत संबंधी मामलों में न्यायालयों को निष्पक्ष एवं संतुलित दृष्टिकोण अपनाना चाहिए।
न्यायालय ने दोहराया कि भारतीय आपराधिक न्याय प्रणाली का मूल सिद्धांत है कि “जमानत नियम है और जेल अपवाद।” सूत्र: लीगल डेस्क | अली हम्माद के अनुसार, न्यायालय ने कहा कि किसी व्यक्ति को दोष सिद्ध होने से पहले लंबे समय तक जेल में रखना न्याय के सिद्धांतों के विपरीत हो सकता है।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी देशभर की निचली अदालतों और उच्च न्यायालयों के लिए एक महत्वपूर्ण मार्गदर्शक सिद्ध होगी। यह निर्णय संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत प्रदत्त व्यक्तिगत स्वतंत्रता की रक्षा करते हुए न्यायिक प्रक्रिया की निष्पक्षता और पारदर्शिता को भी मजबूत करता है।
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