न्यायपालिका में AI: सुप्रीम कोर्ट का नया नियामक ढांचा
सुप्रीम कोर्ट ने न्यायिक प्रणाली में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग को लेकर एक मसौदा नियामक ढांचा जारी किया है।

सुप्रीम कोर्ट ने न्यायिक प्रणाली में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के जिम्मेदार उपयोग को लेकर एक मसौदा नियामक ढांचा जारी किया है। इस पहल का उद्देश्य न्यायालयों में तकनीकी दक्षता बढ़ाना है, जबकि न्यायिक स्वतंत्रता और मानवीय विवेक को सुरक्षित रखना भी सुनिश्चित किया गया है।
मसौदा नियमों के अनुसार AI का उपयोग कानूनी शोध, दस्तावेज़ों के मसौदे तैयार करने, अनुवाद, ट्रांसक्रिप्शन, केस मैनेजमेंट और संदर्भों के सत्यापन जैसे कार्यों में किया जा सकेगा। हालांकि, न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि AI किसी भी स्थिति में न्यायिक निर्णय, जमानत निर्धारण, सजा तय करने या मामले के परिणाम को प्रभावित करने के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा। अली हम्माद, लीगल डेस्क के अनुसार यह कदम भारतीय न्याय प्रणाली में तकनीक के सुरक्षित और संतुलित समावेशन की दिशा में महत्वपूर्ण पहल साबित हो सकता है।
संबंधित ख़बरें

सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि समय बदल गया है, विवाह पूर्व यौन संबंध नैतिक अधमता नहीं है

जिंदल पॉली फिल्म्स विवाद, भारत का प्रथम श्रेणी एक्शन सूट, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने मध्यस्थता के लिए भेजा

बिना शादी सहमति से संबंध खराब चरित्र का आधार नहीं: सुप्रीम कोर्ट बोला- रिश्ता टूटने को धोखा नहीं मान सकते, कांस्टेबल की नियुक्ति को मंजूरी दी


