रेवाड़ी में जुए के धंधे के आरोपी को चेतावनी के साथ रिहा किया गया
रेवाड़ी के धीरूहेड़ा में जुए का अड्डा चलाने के लिए आरोपी उदय भान को न्यायिक मजिस्ट्रेट ने दोषी ठहराया, उसने अपना अपराध स्वीकार कर लिया और कोई पूर्व आपराधिक रिकॉर्ड नहीं था। प्रोबेशन ऑफ़ ऑफेंडर्स एक्ट के तहत उसे चेतावनी देकर रिहा कर दिया गया। पुलिस ने तलाशी में 1470 रुपये, एक डायरी और कैलकुलेटर बरामद किए थे।

सौजन्य से:- Amar Ujala
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Rewari News: जुए का अड्डा चलाने के दोषी को अदालत ने चेतावनी देकर रिहा किया
Mon, 21 Sep 2026 12:23 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Mon, 21 Sep 2026 12:23 AM IST
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रेवाड़ी। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी आशीष कुमार मंडल की अदालत ने धारूहेड़ा के महेश्वरी सेक्टर-6 में जुए का अड्डा चलाने के मामले में धारूहेड़ा निवासी उदय भान को दोषी करार दिया। दोषी ने अदालत में अपना अपराध स्वीकार कर लिया था। अदालत ने उसे चेतावनी देकर रिहा कर दिया।
अदालत ने पाया कि उदयभान का इससे पहले किसी अपराध में दोष सिद्ध का रिकॉर्ड नहीं है। इसी आधार पर अदालत ने प्रोबेशन ऑफ ऑफेंडर्स एक्ट के तहत उसे सुधार का एक मौका दिया।
मामला 9 जुलाई का है। सेक्टर-6 धारूहेड़ा थाना पुलिस को कार्रवाई के दौरान महेश्वरी में उदयभान के जुआ गतिविधि में शामिल होने की जानकारी मिली थी। पुलिस ने मौके पर कार्रवाई करते हुए उसे पकड़ लिया। तलाशी में उसके पास से 1470 रुपये, एक डायरी और कैलकुलेटर बरामद किया गया। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ सार्वजनिक जुआ अधिनियम, 1867 की धारा 3 के तहत एफआईआर दर्ज की थी।
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पुलिस ने 17 अगस्त को अदालत में चार्जशीट पेश की। 19 सितंबर को न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी आशीष कुमार मंडल की अदालत में आरोप तय किए गए। आरोप सुनाए जाने पर उदय भान ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया। आरोपी ने अपराध स्वीकार लिया।
19 सितंबर को अदालत ने सार्वजनिक जुआ अधिनियम की धारा 3 के तहत उसे दोषी माना। इस धारा में तीन महीने तक की सजा या 200 रुपये तक जुर्माने का प्रावधान है। सजा के समय अदालत ने दोषी के पूर्व रिकॉर्ड और मामले की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए नरम रुख अपनाया। प्रोबेशन ऑफ ऑफेंडर्स एक्ट की धारा 3 के तहत उसे उचित चेतावनी देकर रिहा करने का आदेश दिया गया।
क्या है प्रोबेशन ऑफ ऑफेंडर्स एक्ट:
एडवोकेट कैलाश चंद ने बताया कि प्रोबेशन ऑफ ऑफेंडर्स एक्ट 1958 की धारा 3 के तहत अदालत कुछ मामलों में दोषी व्यक्ति को सजा देने के बजाय उचित चेतावनी देकर रिहा कर सकती है। यह प्रावधान सामान्यतः ऐसे अपराधों में लागू होता है, जिनमें अधिकतम दो वर्ष तक की कैद, जुर्माना या दोनों का प्रावधान हो। अदालत अपराध की प्रकृति, परिस्थितियों और आरोपी के पूर्व रिकॉर्ड को ध्यान में रखती है। यदि आरोपी पहले किसी अपराध में दोषी नहीं रहा है और अदालत को लगता है कि उसे चेतावनी देकर सुधार का अवसर देना उचित है, तो उसे जेल भेजने के बजाय रिहा किया जा सकता है। उदय भान के मामले में भी अदालत ने उसे सार्वजनिक जुआ अधिनियम की धारा 3 में दोषी माना, लेकिन पूर्व दोष सिद्धि नहीं होने के कारण प्रोबेशन ऑफ ऑफेंडर्स एक्ट की धारा 3 के तहत उचित चेतावनी देकर रिहा कर दिया।
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अदालत ने पाया कि उदयभान का इससे पहले किसी अपराध में दोष सिद्ध का रिकॉर्ड नहीं है। इसी आधार पर अदालत ने प्रोबेशन ऑफ ऑफेंडर्स एक्ट के तहत उसे सुधार का एक मौका दिया।
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मामला 9 जुलाई का है। सेक्टर-6 धारूहेड़ा थाना पुलिस को कार्रवाई के दौरान महेश्वरी में उदयभान के जुआ गतिविधि में शामिल होने की जानकारी मिली थी। पुलिस ने मौके पर कार्रवाई करते हुए उसे पकड़ लिया। तलाशी में उसके पास से 1470 रुपये, एक डायरी और कैलकुलेटर बरामद किया गया। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ सार्वजनिक जुआ अधिनियम, 1867 की धारा 3 के तहत एफआईआर दर्ज की थी।
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पुलिस ने 17 अगस्त को अदालत में चार्जशीट पेश की। 19 सितंबर को न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी आशीष कुमार मंडल की अदालत में आरोप तय किए गए। आरोप सुनाए जाने पर उदय भान ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया। आरोपी ने अपराध स्वीकार लिया।
19 सितंबर को अदालत ने सार्वजनिक जुआ अधिनियम की धारा 3 के तहत उसे दोषी माना। इस धारा में तीन महीने तक की सजा या 200 रुपये तक जुर्माने का प्रावधान है। सजा के समय अदालत ने दोषी के पूर्व रिकॉर्ड और मामले की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए नरम रुख अपनाया। प्रोबेशन ऑफ ऑफेंडर्स एक्ट की धारा 3 के तहत उसे उचित चेतावनी देकर रिहा करने का आदेश दिया गया।
क्या है प्रोबेशन ऑफ ऑफेंडर्स एक्ट:
एडवोकेट कैलाश चंद ने बताया कि प्रोबेशन ऑफ ऑफेंडर्स एक्ट 1958 की धारा 3 के तहत अदालत कुछ मामलों में दोषी व्यक्ति को सजा देने के बजाय उचित चेतावनी देकर रिहा कर सकती है। यह प्रावधान सामान्यतः ऐसे अपराधों में लागू होता है, जिनमें अधिकतम दो वर्ष तक की कैद, जुर्माना या दोनों का प्रावधान हो। अदालत अपराध की प्रकृति, परिस्थितियों और आरोपी के पूर्व रिकॉर्ड को ध्यान में रखती है। यदि आरोपी पहले किसी अपराध में दोषी नहीं रहा है और अदालत को लगता है कि उसे चेतावनी देकर सुधार का अवसर देना उचित है, तो उसे जेल भेजने के बजाय रिहा किया जा सकता है। उदय भान के मामले में भी अदालत ने उसे सार्वजनिक जुआ अधिनियम की धारा 3 में दोषी माना, लेकिन पूर्व दोष सिद्धि नहीं होने के कारण प्रोबेशन ऑफ ऑफेंडर्स एक्ट की धारा 3 के तहत उचित चेतावनी देकर रिहा कर दिया।
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