राजस्थान हाईकोर्ट का बड़ा फैसला
राजस्थान हाईकोर्ट ने एसिड अटैक पीड़ितों को समयबद्ध और प्रभावी मुआवजा देने की आवश्यकता पर जोर दिया

राजस्थान हाईकोर्ट ने एसिड अटैक पीड़ितों के मुआवजा अधिकारों पर जोर देते हुए कहा है कि पीड़ितों को समयबद्ध और प्रभावी मुआवजा मिलना चाहिए। सूत्र: लाइव लॉ के अनुसार, अदालत ने राजस्थान विक्टिम कम्पेनसेशन स्कीम के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर दिया है।
इस स्कीम के तहत एसिड अटैक पीड़ितों के लिए न्यूनतम ₹3 लाख मुआवजे का प्रावधान किया गया है, जो उपचार और पुनर्वास की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर निर्धारित किया गया है। अदालत ने यह भी कहा कि एसिड अटैक पीड़ितों को लंबे समय तक चिकित्सा, प्लास्टिक सर्जरी, मनोवैज्ञानिक परामर्श और सामाजिक सहायता की आवश्यकता होती है।
सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया ने भी अपने महत्वपूर्ण निर्णयों में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को एसिड अटैक पीड़ितों के लिए कम से कम ₹3 लाख मुआवजा सुनिश्चित करने तथा मुफ्त चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि मुआवजा योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन और पुनर्वास तंत्र की मजबूती एसिड अटैक पीड़ितों को न्याय दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
इसका मतलब क्या है
राजस्थान हाईकोर्ट का यह फैसला एसिड अटैक पीड़ितों के मामले में एक प्रकार का जादूजाद है। यह न केवल पीड़ितों के लिए समयबद्ध और प्रभावी मुआवजा देने की आवश्यकता पर जोर देता है, बल्कि, यह एक नैतिक आह्वान भी है राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से एसिड अटैक पीड़ितों के लिए कम से कम 3 लाख रुपये का मुआवजा सुनिश्चित करने और उन्हें मुफ्त चिकित्सा सुविधा प्रदान करने की। यह फैसला एसिड अटैक के मामलों पर सुप्रीम कोर्ट के महत्वपूर्ण निर्णय का अनुसरण करता है।
संबंधित ख़बरें
इसी विषय की और ख़बरें →
देश की अदालतों में पांच करोड़ से ज्यादा मामले लंबित, सुप्रीम कोर्ट में अटके 96 हजार से अधिक केस

करोड़ों मामले लंबित, न्यायपालिका परेशान

भारत में 20 वर्षों से अधिक समय से 11.73 लाख अदालती मामले लंबित हैं, यूपी शीर्ष पर

सोनम वांगचुक को मेदांता अस्पताल में भर्ती होने की अनुमति

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: सेवानिवृत्त जजों को मिलेगी समान सुविधा

सुप्रीम कोर्ट ने तेजी से निर्णय दिलाने के लिए अधिक विशेष अदालतों की मांग की

सोनम वांगचुक की पत्नी ने दिल्ली HC प्रमुख को पत्र लिखकर पति को अस्पताल से रिहा करने की अपील की

लाइव लॉ मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय: गहन जांच और न्यायिक निर्णय
ताज़ा ख़बरें
- सही नहीं है सर्विस चार्ज लेना! जानिए रेस्टोरेंट्स के दावे और क्या कहता है कानून
- आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय की महत्वपूर्ण निर्णय: 13 जुलाई - 19 जुलाई, 2026 की रिपोर्ट
- राजस्थान उच्च न्यायालय की महत्वपूर्ण आदेश: 13 से 19 जुलाई तक की प्रमुख घटनाएँ
- सुप्रीम कोर्ट का केंद्र सरकार को निर्देश: उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों के लिए सेवानिवृत्ति के बाद की सुविधाओं पर समान नीति तैयार करें
- सुप्रीम कोर्ट का उच्च न्यायालय पर निर्देश: नहीं कर सकते साक्ष्यों को दोबारा तोलना!
- उच्च न्यायालयों को सर्टिफिकेट के निष्कर्षों में हस्तक्षेप करने से इनकार, न्यायपालिका की सीमाओं पर स्पष्टीकरण
- दिल्ली उच्च न्यायालय के फैसले से योग फेडरेशन को मान्यता मिलने का मार्ग प्रशस्त
- सुप्रीम कोर्ट के फैसले में कहा गया है कि नागरिक के जीवन की रक्षा करना सरकार का कर्तव्य है!

