अब कोई पेपर लीक नहीं, NTA को UPSC की तर्ज पर बनाने के लिए सुप्रीम कोर्ट चाहता है फूल प्रूफ प्लान
सुप्रीम कोर्ट ने साफ संकेत दिया है कि परीक्षा सुरक्षा के लिए हर साल नए अस्थायी इंतजाम पर्याप्त नहीं होंगे। दरअसल, अदालत चाहती है कि NTA के पास स्थायी बुनियादी ढांचा, प्रशिक्षित मानव संसाधन, तकनीकी क्षमता, सुरक्षित प्रश्न…

सौजन्य से:- Navbharat Times
सुप्रीम कोर्ट ने साफ संकेत दिया है कि परीक्षा सुरक्षा के लिए हर साल नए अस्थायी इंतजाम पर्याप्त नहीं होंगे। दरअसल, अदालत चाहती है कि NTA के पास स्थायी बुनियादी ढांचा, प्रशिक्षित मानव संसाधन, तकनीकी क्षमता, सुरक्षित प्रश्नपत्र व्यवस्था और ऐसी ठोस व्यवस्था हो जो किसी व्यक्ति के बदलने या हटने के साथ खत्म न हो जाए।
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सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से तीन सप्ताह में मांगा विस्तृत हलफनामा
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट काफी गंभीर है। अदालत ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया है कि वह तीन सप्ताह के भीतर हलफनामा दाखिल कर बताए कि राधाकृष्णन समिति की सिफारिशों को लागू करने के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं और नंदन नीलेकणि समिति ने इन सिफारिशों में क्या बदलाव या परिष्कार किया है। कोर्ट ने कार्यान्वयन के लिए संभावित समय सीमा भी मांगी हैं। दरअसल यह निर्देश इसलिए भी खास है क्योंकि अदालत अब केवल यह जानने तक सीमित नहीं रहना चाहती कि सरकार ने कौन-कौन से कदम घोषित किए हैं, बल्कि यह देखना चाहती है कि वे धरातल पर किस स्तर तक लागू हुए भी हैं या नहीं ?Facial Recognition और निजता का अधिकार: CJP Protest मामले में सुप्रीम कोर्ट के सामने बड़ा संवैधानिक सवाल
NTA को ‘स्थायी संस्थान’ के रूप में विकसित करने पर जोर
गौर तलब है कि अदालत की चिंता यह है कि राष्ट्रीय स्तर की महत्वपूर्ण परीक्षाएं किसी अस्थायी या व्यक्ति-निर्भर व्यवस्था पर निर्भर नहीं रह सकतीं। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट ने NTA को पर्याप्त संस्थानगत रूप मजबूती से स्थापित करने के लिए बुनियादी ढांचे, मानव संसाधन और तकनीकी क्षमताओं की आवश्यकता बताई है। और यही वजह है कि इसी संदर्भ में कोर्ट ने NTA को UPSC जैसी मजबूत और विश्वसनीय संस्था के रूप में विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया है।राधाकृष्णन समिति की 101 सिफारिशें बनीं सुधार का आधार
इस मामले में एक अच्छी पहल यह हुई थी कि NEET-UG 2024 विवाद के बाद केंद्र ने पूर्व ISRO चेयरमैन डॉ. के. राधाकृष्णन की अध्यक्षता में सात सदस्यीय विशेषज्ञ समिति गठित की थी। फिर सुप्रीम कोर्ट के 2024 के आदेश में भी इस समिति के गठन और NEET सहित NTA की परीक्षाओं को मजबूत करने के उसके दायित्व का उल्लेख किया गया था। बाद में इसी राधाकृष्णन समिति ने चुनिंदा 101 सिफारिशें दीं, जिनका उद्देश्य NTA को अधिक चुस्त, त्रुटि-रोधी, अनुकूलनीय और एकीकृत परीक्षा प्रणाली में बदलना था। समिति ने परीक्षाओं की प्रक्रिया, डाटा सुरक्षा और NTA की संरचना व कार्यप्रणाली में सुधार पर भी जोर दिया था।नौकरी के लिए OBC कोटे से भरा फॉर्म, लेकिन जाति प्रमाणपत्र नहीं दे पाई महिला, फिर हाई कोर्ट ने क्या फैसला दिया, जानना जरूरी
सुप्रीम कोर्ट की असली चिंता: सुधार 2026-27 तक सीमित न रहें
- शीर्ष अदालत इस बात पर भी गंभीर है कि वह परीक्षा सुधारों को केवल किसी एक NEET परीक्षा के संदर्भ में नहीं देख रही है। कोर्ट ने ठोस संस्थागत ढांचा और स्थायी प्रणाली पर जोर दिया है, ताकि परीक्षा प्रक्रिया में सुरक्षा किसी खास अधिकारी या मौजूदा टीम के अनुभव पर निर्भर न रहे।
- NTA पहले ही JEE Main, NEET-UG, CUET और UGC-NET जैसी महत्वपूर्ण राष्ट्रीय परीक्षाएं आयोजित करता है। और जैसा कि NTA ने मई 2026 में बताया था कि उसकी परीक्षाओं में सालाना एक करोड़ से अधिक उम्मीदवारों की भागीदारी होती है। इसलिए परीक्षा सुरक्षा में बदलाव का अच्छा असर करोड़ों अभ्यर्थियों और पूरे राष्ट्रीय परीक्षा तंत्र पर पड़ने की उम्मीद है।
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