यूपी गैंगस्टर्स एक्ट को सुप्रीम कोर्ट की अजन्मा टिप्पणी पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मांगा राज्य सरकार से जवाब, कार्यवाही पर लगाई रोक
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश गैंगस्टर्स एंड एंटी-सोशल एक्टिविटीज (प्रिवेंशन) एक्ट 1986 को लेकर सुप्रीम कोर्ट की अगस्त 2026 की उस टिप्पणी पर राज्य सरकार से जवाब मांगा, जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने कानून को 'स्टिलबॉर्न' यानी ऐसा कानून बताया था, जो अपराध का सृजन ही नहीं करता। हाईकोर्ट ने इस कानून के तहत आरोपी के खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही पर भी रोक लगाई। जस्टिस राजीव सिंह की पीठ ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया था कि गैंगस्टर्स एक्ट किसी नए अपराध या जुर्म को परिभाषित नहीं करता, बल्कि किसी व्यक्ति की स्थिति को 'गैंगस्टर'

सौजन्य से:- लाइव लॉ हिंदी
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश गैंगस्टर्स एंड एंटी-सोशल एक्टिविटीज (प्रिवेंशन) एक्ट 1986 को लेकर सुप्रीम कोर्ट की अगस्त 2026 की उस टिप्पणी पर राज्य सरकार से जवाब मांगा, जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने कानून को 'स्टिलबॉर्न' यानी ऐसा कानून बताया था, जो अपराध का सृजन ही नहीं करता। हाईकोर्ट ने इस कानून के तहत आरोपी के खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही पर भी रोक लगाई। जस्टिस राजीव सिंह की पीठ ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया था कि गैंगस्टर्स एक्ट किसी नए अपराध या जुर्म को परिभाषित नहीं करता, बल्कि किसी व्यक्ति की स्थिति को 'गैंगस्टर'
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