Legal news: झुग्गी-बस्तियों में रहने वाले भी सम्मान के हकदार, 717 परिवारों के पुनर्वास पर दिल्ली हाईकोर्ट की बड़ी टिप्पणी
दिल्ली हाई कोर्ट ने भाई राम कैंप, मस्जिद कैंप और DD कॉलोनी के 717 परिवारों को सावदा घेवरा में बसाने की मंजूरी दे दी है। कोर्ट ने सरकार को पूरा खर्च उठाने और बिजली, पानी, मेडिकल क्लीनिक व बच्चों के स्कूल में फौरन दाखिले क…

सौजन्य से:- Navbharat Times
दिल्ली हाई कोर्ट ने भाई राम कैंप, मस्जिद कैंप और DD कॉलोनी के 717 परिवारों को सावदा घेवरा में बसाने की मंजूरी दे दी है। कोर्ट ने सरकार को पूरा खर्च उठाने और बिजली, पानी, मेडिकल क्लीनिक व बच्चों के स्कूल में फौरन दाखिले की सुविधा देने का निर्देश दिया गया है।
नई दिल्ली: दिल्ली हाई कोर्ट ने झुग्गी-बस्तियों में रहने वालों के पुनर्वास को लेकर अहम आदेश देते हुए कहा कि उन्हें दूसरी जगह बसाते समय उनके सम्मान और बुनियादी जरूरतों से समझौता नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि झुग्गी में रहने वाले लोगों को 'दूसरे दर्जे का नागरिक' या 'अवैध कब्जेदार' मानकर उनके साथ व्यवहार नहीं किया जा सकता।
चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की बेंच ने भाई राम (BR) कैंप, मस्जिद कैंप और DD कॉलोनी में रहने वाले करीब 717 परिवारों के पुनर्वास से जुड़े मामले में मंगलवार को ये निर्देश दिए।
ये परिवार दिल्ली रेस कोर्स क्लब के पास रहते हैं।
केंद्र सरकार को रणनीतिक सैन्य ढांचे के लिए इस जमीन की जरूरत है।
इसी वजह से इन परिवारों को नॉर्थ-वेस्ट दिल्ली के सावदा घेवरा में बसाने की योजना बनाई गई है।
परिवारों ने इस जगह पर आपत्ति जताई थी। उनका कहना था कि सावदा घेवरा मौजूदा जगह से करीब 40-45 किलोमीटर दूर है।
इतनी दूर जाने से उनके काम और बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होगी।
सावदा घेवरा में होगा पुनर्वास, सरकार उठाएगी पूरा खर्च
हालांकि, कोर्ट ने कहा कि 5 किलोमीटर के दायरे में पुनर्वास के लिए उपयुक्त जगह उपलब्ध नहीं है। ऐसे में सावदा घेवरा में बसाने की योजना को मंजूरी दी गई लेकिन सरकार को यह सुनिश्चित करने को कहा गया कि विस्थापन के दौरान लोगों के अधिकार प्रभावित न हों। बेंच ने सरकार को पुनर्वास का पूरा खर्च उठाने का निर्देश दिया। तकनीकी पात्रता के आधार पर परिवारों से किसी तरह का वित्तीय योगदान लेने की शर्त भी हटा दी गई है। नई जगह पर हर परिवार को बिजली का कनेक्शन, दिन में दो बार पानी, मेडिकल क्लीनिक और बच्चों के स्कूल में तुरंत दाखिले की सुविधा देनी होगी।
लेखक के बारे मेंप्राची यादवलगभग 19 साल से पत्रकारिता में हैं। सात साल तक एक दिल्ली-एनसीआर न्यूज चैनल में विभिन्न क्षेत्रों में काम किया। प्रोग्रामिंग और एंकरिंग भी की। टीवी से ही लीगल रिपोर्टिंग की शुरुआत हुई। उस दौरान, जिला अदालतों और दिल्ली हाई कोर्ट के साथ सुप्रीम कोर्ट तक की रिपोर्टिंग की। 2013 में नवभारत टाइम्स से जुड़ीं। यहां पर शुरुआत जिला अदालतों, नैशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल और उपभोक्ता अदालतों की रिपोर्टिंग से हुई। वर्तमान में अन्य सभी अदालतों के साथ दिल्ली हाई कोर्ट भी कवर कर रही हैं।... और पढ़ें
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