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चीन के राष्ट्रीय रक्षा कानून में संशोधन: भारत-चीन सीमा पर संभावित प्रभाव

चीन ने राष्ट्रीय रक्षा लामबंदी कानून में बदलाव करके सरकार को आम नागरिकों, उद्योगों और तकनीकी संसाधनों पर व्यापक अधिकार दिए हैं। यह परिवर्तन 1 अक्टूबर से लागू होगा और डेटा, एआई एवं साइबर सिस्टम सहित कई क्षेत्रों को रक्षा हेतु जुटा सकेगा। इससे भारत-चीन सीमा पर तनाव के दौरान चीन की तेज़ तैनाती क्षमता बढ़ सकती है, जबकि भारत को अपनी रक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करना पड़ेगा।

2 सितंबर 2026 को 06:32 pm बजे
चीन के राष्ट्रीय रक्षा कानून में संशोधन: भारत-चीन सीमा पर संभावित प्रभाव

सौजन्य से:- Navbharat Times

चीन ने भारत से तनाव के बीच नेशनल डिफेंस मोबिलाइजेशन लॉ (राष्ट्रीय रक्षा लामबंदी कानून) को पारित किया है। इस कानून के तहत चीन की सरकार को आम नागरिकों के संसाधनों, उद्योगों, टेक्नोलॉजी, डेटा और समाज पर व्यापक कानूनी अधिकार मिल गए हैं। हालांकि, इस कानून के दुरुपयोग की आशंका भी जताई जा रही है।

बीजिंग: चीन ने अपने नेशनल डिफेंस मोबिलाइजेशन लॉ (राष्ट्रीय रक्षा लामबंदी कानून) में बड़े बदलाव किए हैं। 2010 में लागू होने के बाद से इस कानून में यह पहला बड़ा बदलाव है। यह बदलाव तब किया गया है, जब चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग अगले हफ्ते ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए भारत का दौरा कर सकते हैं। इस बदलाव के तहत चीन को राष्ट्रीय रक्षा के लिए आम नागरिकों के संसाधनों, उद्योगों, टेक्नोलॉजी, डेटा और समाज को शामिल करने का ज्यादा कानूनी अधिकार मिल गया है।

चीन की संसद नेशनल पीपल्स कांग्रेस की स्टैंडिंग कमेटी ने 28 अगस्त को इस बदले हुए कानून को मंजूरी दी थी। इसमें 14 चैप्टर तो वही हैं, लेकिन आर्टिकल की संख्या 72 से बढ़कर 82 हो गई है। यह कानून 1 अक्टूबर से लागू होगा। इन बदलावों से मोबिलाइजेशन का दायरा बढ़ गया है। अब संप्रभुता, राष्ट्रीय एकता, क्षेत्रीय अखंडता और सुरक्षा के साथ-साथ विकास से जुड़े हितों को भी इसमें शामिल किया गया है। इस व्यापक शब्दावली की वजह से चीन के मोबिलाइजेशन को न सिर्फ पारंपरिक सैन्य खतरों से, बल्कि आर्थिक सुरक्षा, टेक्नोलॉजी से जुड़े हितों, विदेशों में मौजूद संपत्तियों और दूसरी रणनीतिक प्राथमिकताओं से भी जोड़ सकता है।

व्यापक रणनीतिक हित में कर सकता है इस्तेमाल

मोबिलाइजेशन को अब सिर्फ सशस्त्र हमले के जवाब के तौर पर नहीं देखा जाता। यह सरकार को राष्ट्रीय संसाधनों को तैयार करने और तैनात करने की इजाजत देता है जब व्यापक रणनीतिक हितों पर खतरा महसूस हो। इस कानून की अहम बातों में टेलीकम्युनिकेशन, मीडिया, साइबर सुरक्षा और सूचना प्रणालियों को डिफेंस मोबिलाइजेशन की जिम्मेदारियों के तहत मजबूती से शामिल किया गया है। कानून में डेटा सिस्टम की मोबिलाइजेशन का प्रावधान है और इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), साइबर ऑपरेशन और ऑटोनॉमस सिस्टम जैसी नई क्षमताएं भी शामिल हैं।

नए कानून का चीनी कंपनियों पर असर

नए कानून में कर्मचारियों की जिम्मेदारियों को भी साफ किया गया है। 18 से 60 साल के पुरुषों और 18 से 55 साल की महिलाओं को सैन्य अभियानों, आपदा राहत कार्यों और सामाजिक व्यवस्था बनाए रखने में मदद करने के लिए कहा जा सकता है। सरकार सुविधाओं, वाहनों और उपकरणों का अधिग्रहण कर सकती है, जिसके लिए मुआवजे और कुछ मामलों में छूट का प्रावधान भी है। सबसे अहम बात यह है कि मोबिलाइजेशन की जिम्मेदारियां शांति के समय से ही शुरू हो जाती हैं। चीन ने नए कानून में लिखा है कि कंपनियों से उम्मीद की जाती है कि वे पहले से तैयारी रखें ताकि जरूरत पड़ने पर कार्रवाई कर सकें।

चीन के मोबिलाइजेशन कानून का भारत पर असर

चीन के नए मोबिलाइजेशन कानून का भारत पर बड़ा असर पड़ सकता है। भारत-चीन सीमा पर लंबे समय से तनाव है। 2020 के गतिरोध के बाद लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (LAC) पर भारत और चीन दोनों ने इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ाया है और बड़ी संख्या में सैनिकों को तैनात किया है। इस कानून के तहत चीन को भारत के साथ संघर्ष के समय तेजी से सैनिकों की तैनाती, ट्रांसपोर्ट, सप्लाई और औद्योगिक उत्पादन को जुटाने में मदद मिल सकती है। चीन की तेजी उसे भारत पर बढ़त दिला सकती है। वहीं, भारत को अभी सशस्त्र बलों और नागरिक प्रतिष्ठानों के बीच बेहतर तालमेल, मजबूत रणनीतिक भंडार और मजबूत सप्लाई चेन, तेजी से रक्षा उत्पादन बढ़ाने और बेहतर संचार व इंफ्रास्ट्रक्चर को विकसित करने की जरूरत है।

लेखक के बारे मेंप्रियेश मिश्रप्रियेश मिश्र नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में प्रिंसिपल डिजिटल कंटेट प्रोड्यूसर (Principal Digital Content Producer) के पद पर कार्यरत हैं। वे नवभारत टाइम्स की दुनिया (World) सेक्शन से जुड़े हैं। डिजिटल पत्रकारिता में उनका 10 साल का अनुभव है, जिसमें उन्होंने रिपोर्टिंग और डेस्क पर विभिन्न भूमिकाओं में काम किया है। प्रियेश मिश्र ने पत्रकारिता के करियर की शुरुआत दैनिक भास्कर से की। इसके बाद उन्होंने दैनिक जागरण और अमर उजाला जैसे मीडिया संस्थानों में काम किया है। प्रियेश मिश्र ने मार्च 2020 में नवभारत टाइम्स ऑनलाइन जॉइन किया था।

प्रियेश मिश्र के पास वैश्विक घटनाक्रम, युद्ध, सैन्य संघर्ष, राजनयिक तनाव, कूटनीति जैसे विषयों पर न्यूज कवरेज का व्यापक अनुभव है। उन्होंने पिछले 5 वर्षों में आर्मेनिया-अजरबैजान के युद्ध, रूस-यूक्रेन युद्ध, अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव 2020-2024, इजरायल-हमास गाजा युद्ध, ईरान-इजरायल संघर्ष, भारत-पाकिस्तान संघर्ष ऑपरेशन सिंदूर, तालिबान-पाकिस्तान संघर्ष, चीन-ताइवान विवाद, वेनेजुएला संकट जैसे वैश्विक घटनाक्रम का कवरेज किया है।

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