सुप्रीम कोर्ट की सोनम रघुवंशी केस में बड़ी टिप्पणी
सुप्रीम कोर्ट ने सोनम रघुवंशी केस की सुनवाई के दौरान कहा कि बदलते समाज में इस तरह की घटनाएं होना तय है। जस्टिस एम. एम. सुंदरेश और जस्टिस पी. बी. वराले की बेंच ने कहा, 'आज की पीढ़ी बेचैन है।'

सौजन्य से:- Navbharat Times
सोनम रघुवंशी केस की सुनवाई करते समय जस्टिस सुंदरेश ने कहा, 'आज की पीढ़ी शायद हमसे ज्यादा जानकार है, लेकिन दबाव और तनाव का सामना करने के मामले में वह ज्यादा कमजोर है।'
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को सोनम रघुवंशी केस की सुनवाई के दौरान कहा कि बदलते समाज में इस तरह की घटनाएं होना तय है। जस्टिस एम. एम. सुंदरेश और जस्टिस पी. बी. वराले की बेंच ने कहा, 'आज की पीढ़ी बेचैन है। वे हर समस्या का तुरंत हल चाहते हैं। निजी संबंधों से जुड़े ऐसे मामलों की संख्या आगे और बढ़ सकती है।' कोर्ट ने यह टिप्पणी सोनम रघुवंशी को मिली जमानत गुरुवार को रद्द करते हुए की। अदालत ने उन्हें 3 हफ्ते के भीतर पुलिस के सामने सरेंडर करने का निर्देश दिया।
सुनवाई के दौरान जस्टिस सुंदरेश ने कहा, 'आज की पीढ़ी शायद हमसे ज्यादा जानकार है, लेकिन दबाव और तनाव का सामना करने के मामले में वह ज्यादा कमजोर है।'
वाट्सऐप पर शेयर हो रही सूचनाओं को ज्ञान मान रहे लगे
मेघालय सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि आज की पीढी के पास सोशल मीडिया की वजह से बहुत सारी सूचनाएं हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि उनके पास ज्ञान भी है। इस पर जस्टिस पी. बी. वराले ने ने कहा कि आजकल वट्सऐप पर जो कुछ भी शेयर हो रहा है, उसे ही लोग ज्ञान मानने लगे हैं। सही तथ्य क्या है, उसके बारे में जानने की कोशिश ही नहीं कर रहे।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा, "आज के समय में लोगों का मन बेहद उत्तेजित रहता है। वे छोटी-छोटी बातों पर भी विचलित हो जाते हैं।"
3 सहयोगियो की मदद से पति की हत्या
अभियोजन के अनुसार, शादी के बाद सोनम रघुवंशी अपने पति राजा रघुवंशी के साथ हनीमून मनाने मेघालय गई थी। आरोप है कि उसने 3 सहयोगियो की मदद से पति की हत्या कर शव को खाई में फेंक दिया। घटना के बाद सोनम कुछ समय तक लापता रही और 9 जून 2025 को उसे गिरफ्तार किया गया।
हनीमून पर बॉडीगार्ड ले जा रहे पति
तुषार मेहता ने अदालत से कहा, 'आज सोशल मीडिया पर ऐसे कॉमिक रील भी है, जिनमे पति हनीमून पर बॉडीगार्ड के साथ जाता हुआ दिखाया जाता है। पति-पत्नी के बीच जो भरोसा और रिश्ता होता था, वह कमजोर पड़ता जा रहा है।' इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा, 'अगर आप सयुक्त परिवार में रहते हैं तो निराशा झेलना और परिस्थितियों के साथ तालमेल बिठाना सीखते है।'
रोते बच्चे को मोबाइल फोन दे रहे माता-पिता
तुषार मेहता ने कहा कि एकल परिवार व्यवस्था बढ़ने के साथ अवसाद के मामले भी बढ़ रहे है। जस्टिस सुंदरेश ने कहा कि बच्चे चाचा-चाची और दादा-दादी से बहुत कुछ सीखते है। मैने एक होटल में देखा कि एक बच्चा रो रहा था। उसके पिता ने तुरत मोबाइल फोन दे दिया और वह चुप हो गया। यही बड़ी समस्या है। भावनाओ को संभालना सिखाने की बजाय बच्चों को गैजेट दे दिया जाता है।
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