होम›अपराध›सुप्रीम कोर्ट की सजा‑परिवर्तन नीति से अपराध में बढ़ोतरी: जस्टिस दत्ता की चेतावनी
अपराध

सुप्रीम कोर्ट की सजा‑परिवर्तन नीति से अपराध में बढ़ोतरी: जस्टिस दत्ता की चेतावनी

जस्टिस दीपांकर दत्ता ने बताया कि मौत की सजा को उम्रकैद में बदलने और समयपूर्व रिहाई में निरंतर नरमी अपराध में वृद्धि का कारण बन रही है। उन्होंने एक ऐसे मामले का उल्लेख किया जहाँ पैरोल पर आए अपराधी ने फिर हत्या की, जिससे सजा‑छूट की सीमा तय करने की जरूरत पर बल दिया गया।

8 अक्टूबर 2026 को 12:05 pm बजे
सुप्रीम कोर्ट की सजा‑परिवर्तन नीति से अपराध में बढ़ोतरी: जस्टिस दत्ता की चेतावनी

सौजन्य से:- Hindustan

सुप्रीम कोर्ट की नरमी से अपराध बढ़ रहे हैं : जस्टिस दत्ता

सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने मौत की सजा को उम्रकैद में बदलने और दोषियों की समयपूर्व रिहाई के मामलों में नरमी पर चिंता जताई। सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता ने मौखिक टिप्पणी की कि बार-बार माफी देने की भी सीमा होनी चाहिए। उन्होंने एक मामले का उदाहरण दिया, जिसमें हत्या के दोषी की सजा कम होने के बाद उसने पैरोल पर बाहर आकर फिर हत्या की।

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि मौत की सजा को कम करने के मामलों में अदालत की ज्यादा नरमी के कारण देश में अपराध बढ़ रहे हैं। अदालत ने कहा कि इस तरह की नरमी की भी कहीं न कहीं सीमा तय करनी होगी। न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति शील नागू की पीठ एक ऐसे कैदी की समय से पहले रिहाई की अर्जी पर सुनवाई कर रही थी, जिसे हत्या के मामले में मौत की सजा सुनाई गई थी, लेकिन बाद में उसे उम्रकैद में बदल दिया गया था। जस्टिस दत्ता ने मौखिक रूप से कहा कि पहले हत्या के मामलों में सजा ‘सबसे दुर्लभ मामलों’ के सिद्धांत पर आधारित होती थी, लेकिन अब समय बदल गया है।

उन्होंने कहा कि हमारे माफ करने वाले रवैये की वजह से ही भारत को इन समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। ‘माफ करना, माफ करना, माफ करना’ आपको कहीं न कहीं एक सीमा तय करनी होगी।जस्टिस दत्ता ने उस मामले का जिक्र किया जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐसे व्यक्ति की मौत की सजा को उम्रकैद में बदल दिया था, जिसने अपनी बड़ी बेटी का दुष्कर्म और हत्या की थी। पिता को मां की गवाही के आधार पर उम्रकैद की सजा होती है। कुछ सालों बाद, पिता पैरोल पर बाहर आता है और अपनी छोटी बेटी के सामने मां की हत्या कर देता है। छोटी बेटी की गवाही पर उसे मौत की सजा सुनाई जाती है। और फिर सुप्रीम कोर्ट मौत की सजा को उम्रकैद में बदल देता है, इस आधार पर कि उसने छोटी बच्ची की हत्या नहीं की थी। उन्होंने कहा कि इसीलिए हम कहते हैं कि हमारे माफ करने वाले रवैये पर कहीं न कहीं रोक लगनी चाहिए।

Powered by Nyaya 247 News

संबंधित ख़बरें

इसी विषय की और ख़बरें →
सुप्रीम कोर्ट ने मौत की सजा में रियायत की लहर को रोकने का संकेत दिया
अपराध

सुप्रीम कोर्ट ने मौत की सजा में रियायत की लहर को रोकने का संकेत दिया

सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब सरकार की CBI जांच चुनौती की सुनवाई टाली, अगली तारीख तय
अपराध

सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब सरकार की CBI जांच चुनौती की सुनवाई टाली, अगली तारीख तय

सुप्रीम कोर्ट ने दवा कंपनियों की ‘फ्रीबी’ पर रोक हेतु समिति गठन का आदेश दिया
अपराध

सुप्रीम कोर्ट ने दवा कंपनियों की ‘फ्रीबी’ पर रोक हेतु समिति गठन का आदेश दिया

दिल्ली हाई कोर्ट ने प्रवेश वर्मा को भेजा नोटिस: थप्पड़ कांड में कानूनी जाँच की राह
अपराध

दिल्ली हाई कोर्ट ने प्रवेश वर्मा को भेजा नोटिस: थप्पड़ कांड में कानूनी जाँच की राह

कोलकाता हाई कोर्ट ने बांग्लादेशी संदेहियों की लंबी हिरासत पर प्रक्रिया का सवाल किया
अपराध

कोलकाता हाई कोर्ट ने बांग्लादेशी संदेहियों की लंबी हिरासत पर प्रक्रिया का सवाल किया

कोलकाता हाई कोर्ट ने शेख केस में बांग्लादेशी निर्वासन के आधार पर सरकार से जवाब माँगा
अपराध

कोलकाता हाई कोर्ट ने शेख केस में बांग्लादेशी निर्वासन के आधार पर सरकार से जवाब माँगा

कर्नाटक हाई कोर्ट ने तय किया: झूठे विवाह वादे से यौन संबंध पर दंडात्मक अपराध में महिलाएँ शामिल नहीं
अपराध

कर्नाटक हाई कोर्ट ने तय किया: झूठे विवाह वादे से यौन संबंध पर दंडात्मक अपराध में महिलाएँ शामिल नहीं

डेल्ही हाई कोर्ट ने तय किया: युवा कांग्रेस की जंतर मंतर में विरोध हेतु याचिका पर कल सुनवाई
अपराध

डेल्ही हाई कोर्ट ने तय किया: युवा कांग्रेस की जंतर मंतर में विरोध हेतु याचिका पर कल सुनवाई

ताज़ा ख़बरें