किशनगंज की अदालत ने बांग्लादेशी प्रवासी को दो साल छह महीने जेल और जुर्माने की सजा दी
किशनगंज में बांग्लादेश के बारिसाल जिले के निवासी मोहम्मद अशरफ अली को अवैध प्रवेश के आरोप में दोषी ठहराते हुए दो वर्ष छह माह साधारण कारावास और दस हजार रुपये जुर्माना सुनाया गया। यदि जुर्माना न दिया गया तो एक माह अतिरिक्त कारावास होगा, तथा जाँच व मुकदमे के दौरान जेल में बिताया समय सजा में जोड़ा जाएगा।

सौजन्य से:- Hindustan
अवैध रूप से भारत में प्रवेश करने के मामले में अदालत ने एक बांग्लादेशी नागरिक को सुनाई सजा
अवैध रूप से भारत में प्रवेश करने के मामले में अदालत ने एक बांग्लादेशी नागरिक को सुनाई सजा अवैध रूप से भारत में प्रवेश करने के मामले में अदालत ने एक बा
किशनगंज, संवाददाता। एडीजे प्रथम सुरेश कुमार सिंह की अदालत ने अवैध रूप से भारत में प्रवेश करने के मामले में एक बांग्लादेशी नागरिक को दोषी करार देते हुए दो वर्ष छह माह के साधारण कारावास और 10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। यह फैसला मंगलवार को सुनाया गया है। लोक अभियोजक सुरेन साह ने बताया कि दोषी की पहचान मोहम्मद अशरफ अली उर्फ अशरफ अली (38) के रूप में हुई है। वह बांग्लादेश के बारिसाल जिले के भोला क्षेत्र का निवासी है। मामला वर्ष 2024 के गलगालिया थाना कांड संख्या-45/2024 तथा सत्र परीक्षण संख्या-223/2024 से संबंधित है।
अदालत की सुनवाई की प्रक्रिया
अदालत में सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने आरोपित के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य प्रस्तुत किए। साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर न्यायालय ने मोहम्मद अशरफ अली को विदेशी अधिनियम, के तहत दोषी पाया। इसके बाद अदालत ने उसे दो वर्ष छह माह के साधारण कारावास की सजा सुनाई तथा 10 हजार रुपये जुर्माना लगाने का आदेश दिया। न्यायालय ने अपने आदेश में कहा है कि यदि दोषी जुर्माने की राशि जमा नहीं करता है तो उसे एक माह की अतिरिक्त साधारण कारावास की सजा भुगतनी होगी।
गिरफ्तारी और कानूनी कार्रवाई
साथ ही जांच और मुकदमे के दौरान न्यायिक हिरासत में बिताई गई अवधि को सजा की अवधि में समायोजित करने का निर्देश भी दिया गया है। घटना के संबंध में बताया जाता है कि आरोपी वर्ष 2024 में बांग्लादेश से नेपाल के रास्ते भारत में प्रवेश कर किशनगंज पहुंचा था। मामले का खुलासा होने के बाद गलगलिया पुलिस ने कार्रवाई करते हुए उसे गिरफ्तार किया था। इस फैसले को सीमावर्ती क्षेत्र में अवैध घुसपैठ के मामलों पर सख्त कानूनी कार्रवाई के रूप में देखा जा रहा है।
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