अमेरिका ने रूस‑तेल खरीदारों पर 100% टैरिफ बिल शुरू, भारत पर भी हो सकता है दबाव
संयुक्त राज्य ने रूसी कच्चे तेल की बड़ी मात्रा खरीदने वाले पाँच देशों पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने का बिल पास किया, जिसमें भारत‑चीन सहित कई देशों का नाम शामिल है। अमेरिकी कांग्रेस के पास अब यह बिल हाउस में पेश हो रहा है, जबकि भारत का विदेश मंत्रालय कहा कि अमेरिकी दवाब के बावजूद देश रूस से तेल की खरीद जारी रखेगा, क्योंकि यह 140 करोड़ नागरिकों की ऊर्जा जरूरतों के अनुकूल है।

सौजन्य से:- ABP News
100 फीसदी टैरिफ वाला कानून ला रहा अमेरिका, MEA बोला- 'कुछ भी कर लो भारत...'
रूस से ज्यादा तेल खरीद रहे देशों पर अमेरिका ने 100 फीसदी टैरिफ को लेकर कानून बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. कई सांसदों ने प्रतिबंध लगाने वाले देशों में सीधे तौर पर भारत का नाम लिखने की मांग की है.
रूस से अधिक क्रूड ऑयल खरीद रहे देशों पर अमेरिका ने 100 फीसदी टैरिफ को लेकर कानून बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. अमेरिकी सीनेट से बिल को मंजूरी मिलने के बाद अब इसे हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव में पेश किया जा रहा है. जानकारी के मुताबिक अमेरिकी कांग्रेस के निचले सदन में इस बिल पर गुरुवार (17 सितंबर) को वोटिंग होगी.
अमेरिकी बिल पास होने के बाद भारत पर 100 फीसदी टैरिफ लग सकता है. दूसरी ओर नई दिल्ली ने साफ कर दिया है कि वॉशिंगटन चाहे जो कर ले, भारत रूस से तेल खरीदता रहेगा और किसी भी दबाव के आगे नहीं झुकेगा. भारत ने मंगलवार को एक बयान में कहा कि अमेरिका भले ही टैरिफ लगा ले, भारत दबाव में नहीं आएगा और रूस से तेल की खरीद जारी रखेगा.
विदेश मंत्रालय का बयान
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों से जुड़े फैसले अपने 140 करोड़ नागरिकों के हितों को ध्यान में रखकर करता आया है और वो आगे भी इसी के मुताबिक काम करेगा. अमेरिका में इस बिल को लिंडसे ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान बिल का नाम दिया गया है.
अमेरिकी सीनेट में 86-11 के भारी बहुमत से इसे पास करा लिया गया. इसमें रूस से सबसे ज्यादा तेल खरीदने वाले 5 देशों पर 100 फीसदी टैरिफ लगाने का प्रावधान है, जिसमें सीधे तौर पर भारत-चीन शामिल हैं. भारत सरकार से जुड़े सूत्रों ने कहा है कि वे स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं, लेकिन यह साफ है कि भारत सरकार इस बारे में अपनी नीति में कोई बदलाव नहीं करेगी और रूस से तेल की खरीद जारी रखेगी.
भारत का नाम लिखने की मांग
बता दें कि पहले खबर आई थी कि कुछ अमेरिकी सांसदों ने बिल में कुछ बदलावों की सिफारिश की है, जिसमें मांग की गई है कि प्रतिबंध लगाने वाले देशों में सीधे तौर पर भारत का नाम लिखा जाए. इससे पहले बिल में पहले सिर्फ 'रूस से तेल खरीदने वाले देशों' का जिक्र था, इसमें किसी देश का नाम नहीं था. अब इसमें भारत का नाम अलग से जोड़ने की मांग की गई है.
अमेरिकी सांसदों का ये भी कहना है कि बिल में रूस से सबसे ज्यादा तेल खरीदने वाले 10 देशों का नाम साफ-साफ लिखा जाए और उन पर 100 फीसदी टैरिफ लगाया जाए. इन देशों में भारत, चीन के अलावा तुर्किये, अजरबैजान, हंगरी, स्लोवाक गणराज्य, यूएई, सिंगापुर, कजाकिस्तान और किर्गिस्तान भी शामिल हैं.
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