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सुप्रीम कोर्ट ने ऑनलाइन बाल यौन शोषण सामग्री को रोकने का निर्देश, केंद्र को तत्परता दिखाने को कहा

अदालत ने बाल यौन शोषण व दुरुपयोग सामग्री (CSEAM) को ‘अत्यंत गंभीर’ कहकर इसे इंटरनेट पर प्रकाशित या प्रदर्शित होने से रोकने की उपायों की मांग की। यह आदेश न्यायालय में जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रन एलायंस की याचिका पर दिया गया, जिसमें दो साल पहले के पूर्वनिर्देशन के कार्यान्वयन की मांग थी। केंद्र ने कहा कि वह शपथपत्र और कार्यवाही की रिपोर्ट प्रस्तुत करेगा।

25 सितंबर 2026 को 03:04 am बजे
सुप्रीम कोर्ट ने ऑनलाइन बाल यौन शोषण सामग्री को रोकने का निर्देश, केंद्र को तत्परता दिखाने को कहा

सौजन्य से:- The New Indian Express

IndiaPrevent child sex content online, SC tells Centre

The Bench asked the Centre to consider steps to ensure that such material is prevented from being uploaded or surfaced online.

NEW DELHI: The Supreme Court on Thursday termed the issue of Child Sexual Exploitation and Abuse Material (CSEAM) “extremely serious” and asked the Centre to focus on preventing such material from appearing online in the first place.

A bench of Justices J B Pardiwala and K Vinod Chandran asked the Centre to consider steps to ensure that such material is prevented from being uploaded or surfaced online.

The court was hearing a plea filed by Just Rights for Children Alliance (JRCA) through its founder Bhuwan Ribhu, seeking effective implementation of the directions issued by the Supreme Court in its September 23, 2024 judgment in Just Rights for Children Alliance & Anr vs S Harish & Ors.

The petitioner noted that nearly two years had passed since the judgment. The Centre said it would file an affidavit and an action-taken report.

The New Indian Express

www.newindianexpress.com

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