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बुलडोजर की सख्त नसीहत और सवाल- सुप्रीम कोर्ट ने बताया मकान मिटाने का नियम क्यों नहीं

सुप्रीम कोर्ट में बुलडोजर की नसीहत जारी है. सुनवाई के दौरान केंद्रीय जज ने सख्त टिप्पणियां कीं. उन्होंने कहा, 'बुलडोजर चुन-चुन कर नहीं चलना चाहिए.' जस्टिस बागची ने कहा कि देश में बड़े पैमाने पर अवैध निर्माण और अतिक्रमण हो रहे हैं, जब नगर निगम के अधिकारियों और अवैध कब्जाधारियों के बीच आपसी मिलीभगत से कानून के शासन को दबाया जा रहा हो, तो बुलडोजर का इस्तेमाल जरूरी हो सकता है.

16 जुलाई 2026 को 03:13 pm बजे
बुलडोजर की सख्त नसीहत और सवाल-  सुप्रीम कोर्ट ने बताया मकान मिटाने का नियम क्यों नहीं

सौजन्य से:- AajTak

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देश में 'बुलडोजर जस्टिस' यानी बिना कानूनी प्रक्रिया के मकान गिराने की कार्रवाई के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई हुई. कोर्ट में याचिकाएं दायर कर मांग की गई है कि अदालती आदेश के बावजूद तोड़फोड़ करने वाले अधिकारियों के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई की जाए.

याचिकाकर्ताओं ने कहा कि बुलडोजर कार्रवाई को अदालत के आदेशों का घोर उल्लंघन बताया. सुनवाई के दौरान CJI ने सवाल उठाया कि इन मामलों की सुनवाई राज्यों के हाई कोर्ट क्यों नहीं कर सकते?

याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वकील हुजैफा अहमदी ने कोर्ट में कहा, 'राज्यों को ऐसा लगने लगा है कि अदालत चाहे जो भी कहे, वो जमीन पर वही करेंगे जो वो चाहते हैं.'

'फैसला सबूतों के आधार पर करना होगा'

इस पर चीफ जस्टिस ने बताया कि कोर्ट के पिछले आदेश में साफ कहा गया था कि ध्वस्तीकरण पर रोक का नियम सरकारी जमीन या सार्वजनिक सड़कों पर हुए अतिक्रमण पर लागू नहीं होगा. CJI ने कहा, 'जैसे ही राज्य हलफनामा दायर कर कहता है कि निर्माण अवैध था या अतिक्रमण था, तो फैसला सबूतों के आधार पर करना होगा.'

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उत्तर प्रदेश सरकार के वकील ने कोर्ट को बताया कि नोटिस इसलिए जारी किए गए थे क्योंकि निर्माण अवैध थे. एक मामले का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि ग्राम प्रधान को रिश्वत देकर ग्राम सभा की जमीन पर अवैध निर्माण किया गया था.

चुनिंदा कार्रवाई ने कोर्ट की अंतरात्मा को झकझोरा: जस्टिस बागची

सुनवाई के दौरान जस्टिस बागची ने सख्त टिप्पणियां कीं. उन्होंने कहा, 'इस अदालत ने इस मामले का संज्ञान इसलिए लिया था क्योंकि किसी अपराध के आरोपी व्यक्तियों की संपत्तियों को नगर निगम कानूनों और संवैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन करके चुन-चुन कर ढहाने का आरोप था. इसने कोर्ट की अंतरात्मा को झकझोर दिया था.'

जस्टिस बागची ने आगे कहा कि देश में बड़े पैमाने पर अवैध निर्माण और अतिक्रमण हो रहे हैं. जब नगर निगम के अधिकारियों और अवैध कब्जाधारियों के बीच आपसी मिलीभगत से कानून के शासन को दबाया जा रहा हो, तो बुलडोजर का इस्तेमाल जरूरी हो सकता है.

लेकिन, उन्होंने चेतावनी दी, 'बुलडोजर चुन-चुन कर नहीं चलना चाहिए. अगर सबने सरकारी जमीन पर कब्जा किया है और उनमें से कोई एक किसी अपराध का आरोपी बन जाता है और एक उदाहरण सेट करने के लिए सिर्फ उसी के परिवार की संपत्ति को ढहा दिया जाता है, तो इसकी इजाजत नहीं दी जा सकती. किसी आरोपी के परिवार को अकेले निशाना नहीं बनाया जा सकता.'

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'सुप्रीम कोर्ट को अपने फैसलों के साथ खड़ा होना होगा'

वरिष्ठ वकील संजय हेगड़े ने एक मामले का हवाला देते हुए कहा, 'मेरे मामले में एक टीवी एंकर बुलडोजर पर बैठ कर आया था. इसी बात ने कोर्ट को हैरान किया था. मेरा मुवक्किल सिर्फ एक फ्रूट जूस बेचने वाला है.'

इस पर CJI ने सवाल किया कि जब कोई नियमों का उल्लंघन और अतिक्रमण कर रहा हो और उसके अवैध निर्माण के कारण सरकार की पुनर्वास योजनाएं रुकी हों, सीवर और सड़कें ब्लॉक हो रही हों, तो कोर्ट ऐसी दावों को क्यों स्वीकार करे?

यह भी पढ़ें: संभल में फिर गरजा बुलडोजर: कब्रिस्तान की जमीन पर बनी अवैध ईदगाह को किया जमींदोज, देखें- PHOTOS

वकील सीयू सिंह ने दलील दी कि सुप्रीम कोर्ट को अपने खुद के फैसलों के साथ खड़ा होना चाहिए. इस पर जस्टिस बागची ने कहा कि फैसले को उसी संदर्भ में पढ़ा जाना चाहिए जिसमें वो आया था. निर्देशों में खुद ये शर् शामिल है कि सार्वजनिक भूमि पर अवैध निर्माण को कोई सुरक्षा नहीं मिलेगी.

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