बुलडोजर की सख्त नसीहत और सवाल- सुप्रीम कोर्ट ने बताया मकान मिटाने का नियम क्यों नहीं
सुप्रीम कोर्ट में बुलडोजर की नसीहत जारी है. सुनवाई के दौरान केंद्रीय जज ने सख्त टिप्पणियां कीं. उन्होंने कहा, 'बुलडोजर चुन-चुन कर नहीं चलना चाहिए.' जस्टिस बागची ने कहा कि देश में बड़े पैमाने पर अवैध निर्माण और अतिक्रमण हो रहे हैं, जब नगर निगम के अधिकारियों और अवैध कब्जाधारियों के बीच आपसी मिलीभगत से कानून के शासन को दबाया जा रहा हो, तो बुलडोजर का इस्तेमाल जरूरी हो सकता है.

सौजन्य से:- AajTak
Sign In
Advertisement
X
देश में 'बुलडोजर जस्टिस' यानी बिना कानूनी प्रक्रिया के मकान गिराने की कार्रवाई के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई हुई. कोर्ट में याचिकाएं दायर कर मांग की गई है कि अदालती आदेश के बावजूद तोड़फोड़ करने वाले अधिकारियों के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई की जाए.
याचिकाकर्ताओं ने कहा कि बुलडोजर कार्रवाई को अदालत के आदेशों का घोर उल्लंघन बताया. सुनवाई के दौरान CJI ने सवाल उठाया कि इन मामलों की सुनवाई राज्यों के हाई कोर्ट क्यों नहीं कर सकते?
याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वकील हुजैफा अहमदी ने कोर्ट में कहा, 'राज्यों को ऐसा लगने लगा है कि अदालत चाहे जो भी कहे, वो जमीन पर वही करेंगे जो वो चाहते हैं.'
'फैसला सबूतों के आधार पर करना होगा'
इस पर चीफ जस्टिस ने बताया कि कोर्ट के पिछले आदेश में साफ कहा गया था कि ध्वस्तीकरण पर रोक का नियम सरकारी जमीन या सार्वजनिक सड़कों पर हुए अतिक्रमण पर लागू नहीं होगा. CJI ने कहा, 'जैसे ही राज्य हलफनामा दायर कर कहता है कि निर्माण अवैध था या अतिक्रमण था, तो फैसला सबूतों के आधार पर करना होगा.'
Advertisement
उत्तर प्रदेश सरकार के वकील ने कोर्ट को बताया कि नोटिस इसलिए जारी किए गए थे क्योंकि निर्माण अवैध थे. एक मामले का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि ग्राम प्रधान को रिश्वत देकर ग्राम सभा की जमीन पर अवैध निर्माण किया गया था.
चुनिंदा कार्रवाई ने कोर्ट की अंतरात्मा को झकझोरा: जस्टिस बागची
सुनवाई के दौरान जस्टिस बागची ने सख्त टिप्पणियां कीं. उन्होंने कहा, 'इस अदालत ने इस मामले का संज्ञान इसलिए लिया था क्योंकि किसी अपराध के आरोपी व्यक्तियों की संपत्तियों को नगर निगम कानूनों और संवैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन करके चुन-चुन कर ढहाने का आरोप था. इसने कोर्ट की अंतरात्मा को झकझोर दिया था.'
जस्टिस बागची ने आगे कहा कि देश में बड़े पैमाने पर अवैध निर्माण और अतिक्रमण हो रहे हैं. जब नगर निगम के अधिकारियों और अवैध कब्जाधारियों के बीच आपसी मिलीभगत से कानून के शासन को दबाया जा रहा हो, तो बुलडोजर का इस्तेमाल जरूरी हो सकता है.
लेकिन, उन्होंने चेतावनी दी, 'बुलडोजर चुन-चुन कर नहीं चलना चाहिए. अगर सबने सरकारी जमीन पर कब्जा किया है और उनमें से कोई एक किसी अपराध का आरोपी बन जाता है और एक उदाहरण सेट करने के लिए सिर्फ उसी के परिवार की संपत्ति को ढहा दिया जाता है, तो इसकी इजाजत नहीं दी जा सकती. किसी आरोपी के परिवार को अकेले निशाना नहीं बनाया जा सकता.'
Advertisement
'सुप्रीम कोर्ट को अपने फैसलों के साथ खड़ा होना होगा'
वरिष्ठ वकील संजय हेगड़े ने एक मामले का हवाला देते हुए कहा, 'मेरे मामले में एक टीवी एंकर बुलडोजर पर बैठ कर आया था. इसी बात ने कोर्ट को हैरान किया था. मेरा मुवक्किल सिर्फ एक फ्रूट जूस बेचने वाला है.'
इस पर CJI ने सवाल किया कि जब कोई नियमों का उल्लंघन और अतिक्रमण कर रहा हो और उसके अवैध निर्माण के कारण सरकार की पुनर्वास योजनाएं रुकी हों, सीवर और सड़कें ब्लॉक हो रही हों, तो कोर्ट ऐसी दावों को क्यों स्वीकार करे?
यह भी पढ़ें: संभल में फिर गरजा बुलडोजर: कब्रिस्तान की जमीन पर बनी अवैध ईदगाह को किया जमींदोज, देखें- PHOTOS
वकील सीयू सिंह ने दलील दी कि सुप्रीम कोर्ट को अपने खुद के फैसलों के साथ खड़ा होना चाहिए. इस पर जस्टिस बागची ने कहा कि फैसले को उसी संदर्भ में पढ़ा जाना चाहिए जिसमें वो आया था. निर्देशों में खुद ये शर् शामिल है कि सार्वजनिक भूमि पर अवैध निर्माण को कोई सुरक्षा नहीं मिलेगी.
---- समाप्त ----
Latest News in Hindi »
Advertisement
Powered by Nyaya 247 News
संबंधित ख़बरें
इसी विषय की और ख़बरें →
बुलडोजर न्याय: उच्च न्यायालयों में अवमानना याचिकाओं को स्थानांतरित करने के आदेश

पाकिस्तानी लड़की की हत्या के दोषियों को न्याय देना जरूरी था: इटली की पीएम

सुप्रीम कोर्ट ने भगवंत मान के खिलाफ विरोध मार्च से जुड़े मामले पर सुनवाई से किया इनकार

सुप्रीम कोर्ट में हंगामे के आरोपी छात्रों को न्यायिक हिरासत

सीएम योगी 17 जुलाई को गाजियाबाद में राजनीतिक दौरे पर, कांवड़ यात्रा और विकास परियोजनाओं का जायजा लेंगे

सुप्रीम कोर्ट ने "बुलडोजर न्याय" के उल्लंघन पर अवमानना याचिका खारिज कर दी, पक्षों को उच्च न्यायालयों में जाने का निर्देश दिया

भगवंत मान को सुप्रीम कोर्ट से राहत, आप नेताओं के खिलाफ मामला रद्द करने पर चुनौती खारिज

लखनऊ की अदालत ने दोषी रखा, आईएसआईएस से जुड़ने पर राकिब इमाम अंसारी को पांच साल की सजा
ताज़ा ख़बरें
- सुप्रीम कोर्ट ने अदालत और थाने में गंवाने-खोने वाले शब्दों पर लगाया पाबंदी
- मप्र उच्च न्यायालय ने स्कूल यूनिफॉर्म टेंडर पर रोक लगाकर सरकार को जवाब देने का मांग
- सुप्रीम कोर्ट ने अवमानना याचिकाओं में सुनवाई से इनकार किया, उच्च न्यायालयों से निर्णय लेने को कहा
- सुप्रीम कोर्ट ने 'बुलडोजर न्याय' के उल्लंघन पर अवमानना याचिकाओं को खारिज किया
- सुप्रीम कोर्ट ने उच्च न्यायालयों से विध्वंस के खिलाफ दिशानिर्देश पर अवमानना याचिकाओं का निपटान करने को कहा
- सुप्रीम कोर्ट का फैसला: हाईकोर्ट का आदेश रद्द, ट्रायल जज को प्रशिक्षण नहीं देना
- पुलिस की लापरवाही पर हाई कोर्ट सख्त, जमानत अर्जी में देरी के लिए लगाया 50 हजार का हर्जाना
- हल्द्वानी में नए भवन के लिए नैनीताल हाईकोर्ट को शिफ्ट करने का आदेश! अब 6 सप्ताह में क्लीयरेंस देना है

