चीन का जातीय एकता कानून: उइगर मुस्लिमों का आरोप
कहा-संस्कृति और भाषा मिटाने की साजिश रच रही जिनपिंग सरकार

सौजन्य से:- अमर उजाला
चीन का जातीय एकता कानून: उइगर मुस्लिमों का आरोप, कहा-संस्कृति और भाषा मिटाने की साजिश रच रही जिनपिंग सरकार
शुक्र, 17 जुलाई 2026 05:10 पूर्वाह्न भारतीय समय
राकेश कुमार
एजेंसी, जिनेवा।
एजेंसी, जिनेवा।
प्रकाशितकर्ता: राकेश कुमार
अद्यतन किया गया शुक्र, 17 जुलाई 2026 05:10 पूर्वाह्न भारतीय समय
सार
उइगर सेंटर फॉर डेमोक्रेसी ने चीन के नए 'जातीय एकता और प्रगति कानून' की तीखी आलोचना करते हुए इसे उइगर मुस्लिमों की पहचान मिटाने वाला बताया है। जिनेवा में संगठन के अध्यक्ष डोलकुन ईसा ने कहा कि यह दमनकारी कानून गैर-हान समुदायों पर एकल राष्ट्रीय पहचान थोपने, जबरन श्रम को वैध बनाने और उनकी भाषा-संस्कृति को हाशिए पर धकेलने का एक खतरनाक चीनी प्रयास है।
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विस्तार
चीन द्वारा हाल ही में लागू किए गए जातीय एकता और प्रगति कानून लागू करने की उइगर मुस्लिमों ने तीखी आलोचना की है। उनका तर्क है कि यह कानून जबरन श्रम को संस्थागत रूप देने का प्रयास है, जिससे गैर-हान जातीय समुदायों की पहचान, भाषा और संस्कृति पर खतरा और अधिक बढ़ाने वाला है। उइगर सेंटर फॉर डेमोक्रेसी ने कहा कि यह कानून चीन की वर्षों पुरानी दमनकारी नीतियों की अगली कड़ी है।
जिनेवा में स्वदेशी लोगों के अधिकारों पर विशेषज्ञ तंत्र के 19वें सत्र को संबोधित करते हुए उइगर सेंटर फॉर डेमोक्रेसी के अध्यक्ष डोलकुन ईसा ने कहा, 1 जुलाई 2026 से प्रभावी यह कानून उइगरों, तिब्बतियों व अन्य गैर-हान समूहों के प्रति बीजिंग की नीतियों में एक बड़े और गंभीर आक्रामक बदलाव को दर्शाता है।
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एकल पहचान थोपने का प्रयास
डोलकुन ईसा ने कहा, चीनी कानून एक एकल राष्ट्रीय पहचान को बढ़ावा देने के लिए कानूनी ढांचा तैयार करता है। साथ ही यह जातीय भाषाओं, धार्मिक प्रथाओं और सांस्कृतिक परंपराओं को हाशिए पर धकेलता है। वह बोले- यह कानून शिक्षा, भावी पीढ़ियों तक सांस्कृतिक पहचान पर सरकारी नियंत्रण को और मजबूत करता है।
उइगर समुदायों का विस्थापन शामिल
इस कानून में मनमानी हिरासत, परिवारों को अलग करना, उइगर भाषा पर प्रतिबंध, सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत को नष्ट करना, और उइगर समुदायों का विस्थापन करना शामिल है। उन्होंने चेताया कि यह कानून उन कदमों को वैध बनाएगा जो स्वदेशियों के अधिकारों पर संयुक्त राष्ट्र घोषणा पत्र के सिद्धांतों के खिलाफ हैं।
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जिनेवा में स्वदेशी लोगों के अधिकारों पर विशेषज्ञ तंत्र के 19वें सत्र को संबोधित करते हुए उइगर सेंटर फॉर डेमोक्रेसी के अध्यक्ष डोलकुन ईसा ने कहा, 1 जुलाई 2026 से प्रभावी यह कानून उइगरों, तिब्बतियों व अन्य गैर-हान समूहों के प्रति बीजिंग की नीतियों में एक बड़े और गंभीर आक्रामक बदलाव को दर्शाता है।
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एकल पहचान थोपने का प्रयास
डोलकुन ईसा ने कहा, चीनी कानून एक एकल राष्ट्रीय पहचान को बढ़ावा देने के लिए कानूनी ढांचा तैयार करता है। साथ ही यह जातीय भाषाओं, धार्मिक प्रथाओं और सांस्कृतिक परंपराओं को हाशिए पर धकेलता है। वह बोले- यह कानून शिक्षा, भावी पीढ़ियों तक सांस्कृतिक पहचान पर सरकारी नियंत्रण को और मजबूत करता है।
उइगर समुदायों का विस्थापन शामिल
इस कानून में मनमानी हिरासत, परिवारों को अलग करना, उइगर भाषा पर प्रतिबंध, सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत को नष्ट करना, और उइगर समुदायों का विस्थापन करना शामिल है। उन्होंने चेताया कि यह कानून उन कदमों को वैध बनाएगा जो स्वदेशियों के अधिकारों पर संयुक्त राष्ट्र घोषणा पत्र के सिद्धांतों के खिलाफ हैं।
न्याय 247 न्यूज़ द्वारा प्रस्तुत
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