देहरा कोर्ट ने घरेलू हिंसा के मामले में पति को दोषी करार दिया, न्यायालय की रोक के बावजूद बेची भूमि
धर्मशाला में अदालत ने घरेलू हिंसा से संरक्षण अधिनियम के तहत पारित सुरक्षा आदेश का उल्लंघन करने के मामले में आरोपी पति को दोषी करार दिया।

सौजन्य से:- Amar Ujala
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Kangra News: अदालत की रोक के बाद भी बेची भूमि, पति दोषी करार
Fri, 17 Jul 2026 04:53 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Fri, 17 Jul 2026 04:53 AM IST
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धर्मशाला। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी देहरा गौरव चौधरी की अदालत ने घरेलू हिंसा से संरक्षण अधिनियम के तहत पारित सुरक्षा आदेश का उल्लंघन करने के मामले में आरोपी को दोषी करार दिया है। अदालत ने पाया कि आरोपी ने न्यायालय की रोक के बावजूद अपनी 15 मरला भूमि रिश्तेदारों के नाम बेच दी।
मामले के अनुसार ज्वालामुखी तहसील की महिला ने वर्ष 2012 में घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत न्यायालय से संरक्षण आदेश प्राप्त किया था। जनवरी 2012 को पारित आदेश में अदालत ने आरोपी को घरेलू हिंसा करने, महिला को उसके कब्जे वाले घर से बेदखल करने, उसकी संपत्ति में हस्तक्षेप करने और अपने नाम दर्ज भूमि को बेचने या किसी अन्य के नाम हस्तांतरित करने से रोक दिया था।
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि न्यायालय के आदेश के बावजूद आरोपी ने न केवल उसके साथ दुर्व्यवहार किया बल्कि अदालत के स्पष्ट प्रतिबंध के बावजूद अपनी 15 मरला भूमि अपने रिश्तेदारों के नाम विक्रय कर दी। इस पर अदालत में संरक्षण आदेश के उल्लंघन की शिकायत दायर की गई।
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न्यायालय ने पाया कि शिकायतकर्ता घरेलू हिंसा, बेदखली अथवा अन्य आरोपों को संदेह से परे सिद्ध नहीं कर सकी, लेकिन आरोपी स्वयं अपनी जिरह में यह स्वीकार कर चुका था कि उसने न्यायालय के प्रतिबंध के बावजूद संबंधित भूमि बेच दी थी।
बिक्री विलेख भी न्यायालय में प्रस्तुत किया गया, जिससे संरक्षण आदेश का उल्लंघन साबित हुआ। अदालत ने माना कि आरोपी ने संरक्षण आदेश के उस हिस्से का उल्लंघन किया, जिसमें उसे अपने नाम दर्ज भूमि का हस्तांतरण करने से रोका गया था।
इस आधार पर अतिरिक्त मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी देहरा ने आरोपी को घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम, 2005 की धारा 31 सहपठित के तहत दोषी ठहराया। न्यायालय ने दोष सिद्धि के बाद सजा के निर्धारण के लिए आरोपी को सुनवाई का अवसर प्रदान करने के निर्देश दिए हैं।
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मामले के अनुसार ज्वालामुखी तहसील की महिला ने वर्ष 2012 में घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत न्यायालय से संरक्षण आदेश प्राप्त किया था। जनवरी 2012 को पारित आदेश में अदालत ने आरोपी को घरेलू हिंसा करने, महिला को उसके कब्जे वाले घर से बेदखल करने, उसकी संपत्ति में हस्तक्षेप करने और अपने नाम दर्ज भूमि को बेचने या किसी अन्य के नाम हस्तांतरित करने से रोक दिया था।
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शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि न्यायालय के आदेश के बावजूद आरोपी ने न केवल उसके साथ दुर्व्यवहार किया बल्कि अदालत के स्पष्ट प्रतिबंध के बावजूद अपनी 15 मरला भूमि अपने रिश्तेदारों के नाम विक्रय कर दी। इस पर अदालत में संरक्षण आदेश के उल्लंघन की शिकायत दायर की गई।
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न्यायालय ने पाया कि शिकायतकर्ता घरेलू हिंसा, बेदखली अथवा अन्य आरोपों को संदेह से परे सिद्ध नहीं कर सकी, लेकिन आरोपी स्वयं अपनी जिरह में यह स्वीकार कर चुका था कि उसने न्यायालय के प्रतिबंध के बावजूद संबंधित भूमि बेच दी थी।
बिक्री विलेख भी न्यायालय में प्रस्तुत किया गया, जिससे संरक्षण आदेश का उल्लंघन साबित हुआ। अदालत ने माना कि आरोपी ने संरक्षण आदेश के उस हिस्से का उल्लंघन किया, जिसमें उसे अपने नाम दर्ज भूमि का हस्तांतरण करने से रोका गया था।
इस आधार पर अतिरिक्त मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी देहरा ने आरोपी को घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम, 2005 की धारा 31 सहपठित के तहत दोषी ठहराया। न्यायालय ने दोष सिद्धि के बाद सजा के निर्धारण के लिए आरोपी को सुनवाई का अवसर प्रदान करने के निर्देश दिए हैं।
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