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जो ना मानें उनकी उड़ान तत्काल रोक दें, महंगे हवाई किराए पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई फटकार

जो ना मानें उनकी उड़ान तत्काल रोक दें, महंगे हवाई किराए पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई फटकार सुप्रीम कोर्ट ने छुट्टियों के दौरान एयरलाइन्स के बढ़ाए जाने वाले किराए पर नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि इसके लिए दिशानिर्देश तैयार कि…

17 अगस्त 2026 को 11:54 pm बजे
जो ना मानें उनकी उड़ान तत्काल रोक दें, महंगे हवाई किराए पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई फटकार

सौजन्य से:- Hindustan

जो ना मानें उनकी उड़ान तत्काल रोक दें, महंगे हवाई किराए पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई फटकार

सुप्रीम कोर्ट ने छुट्टियों के दौरान एयरलाइन्स के बढ़ाए जाने वाले किराए पर नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि इसके लिए दिशानिर्देश तैयार किए जाएं। जो भी निर्देशों का पालन ना करे उसकी उड़ान तत्काल रोक दी जाए।

सुप्रीम कोर्ट ने त्योहारों और छुट्टियों के दौरान मनमाने हवाई किराए पर सोमवार को सख्त रुख अपनाते हुए कहा है कि यदि विमानन कंपनियां नियमों का पालन नहीं करती हैं, तो उनकी उड़ानें रोक दी जानी चाहिए। केंद्र सरकार ने शीर्ष अदालत को बताया कि उसने विमानन कंपनियों की मानमानी पर लगाम लगाने के लिए बनाए गए कानून ‘भारतीय वायुयान अधिनियम, 2024’ के तहत नियम बनाने की प्रक्रिया तेज कर दी है। सरकार ने कहा कि इस कानून का मकसद देश के विमानन क्षेत्र को आधुनिक बनाना है। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ के समक्ष सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल अनिल कौशिक ने सीलबंद लिफाफे में नियमों का मसौदा पेश करते हुए कहा कि कुछ अंतिम बातचीत चल रही है।

तीन सप्ताह में नियमों को अंतिम रूप देंगे

अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने पीठ से कहा कि इसे तीन सप्ताह के भीतर अंतिम रूप दे दिया जाएगा। शीर्ष अदालत ने इसके बाद केंद्र सरकार से बनाए जा रहे नियम के मसौदे को सात दिनों के भीतर प्रकाशित करने का निर्देश दिया। साथ ही कहा कि ‘यदि विमानन कंपनियां नियमों का पालन नहीं करती हैं, तो उनकी उड़ानें रोक दें।’

याचिका में स्वतंत्र नियामक बनाने की मांग

सुप्रीम कोर्ट सामाजिक कार्यकर्ता एस. लक्ष्मीनारायण की ओर से दाखिल याचिका पर सुनवाई कर रहा है। याचिका में उन्होंने एक मजबूत और स्वतंत्र नियामक बनाने की मांग की है। कहा है कि यह नियामक नागरिक उड्डयन क्षेत्र में पारदर्शिता और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करे।

शुल्क में उतार-चढ़ाव के लिए भी दिशानिर्देश बनाया जाए

याचिका में विमानन कंपनियों द्वारा हवाई किराए और अन्य शुल्कों में होने वाले अचानक उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करने के लिए भी एक नियामक दिशा-निर्देश बनाने की मांग की गई है। याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता रवींद्र श्रीवास्तव ने शीर्ष अदातल से कहा कि जब तक नए नियम लागू नहीं होते, तब तक पुराने नियम ही चल रहे हैं।

इच्छाशक्ति का अभाव

उन्होंने कहा कि अधिकारियों की इच्छाशक्ति की कमी से कंपनियां यात्रियों से मनमाना किराया और अन्य शुल्क वसूल रही हैं। वरिष्ठ अधिवक्ता ने सिस्टम की प्रभावशीलता पर सवाल उठाया। संसद में नागरिक उड्डयन मंत्री के एक बयान का जिक्र करते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता श्रीवास्तव ने पीठ से कहा कि ‘सरकार हवाई किराए पर कोई सीमा (कैप) नहीं लगा सकती।’

केंद्र ने अंतिम रूप देने के लिए समय मांगा

अतिरिक्त सॉलिसिटर कौशिक ने शीर्ष अदालत को भरोसा दिया कि नियमों को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया तीन सप्ताह में पूरी हो जाएगी। इस पर पीठ ने कहा कि हमने सीलबंद लिफाफे में पेश किए नियमों का मसौदा देखा है। इसमें ‘एक सिस्टम का सुझाव तो दिया गया है, लेकिन नियामक के बारे में कुछ भी पक्का नहीं है।’ इस पर केंद्र सरकार ने कहा कि तीन सप्ताह के बाद में हम इसे अंतिम रूप देकर दोबारा से अदालत में पेश करेंगे, अभी अंतिम दौर की प्रक्रिया चल रही है। सुप्रीम कोर्ट ने 13 जुलाई को केंद्र सरकार ने भारतीय वायुयान अधिनियम, 2024 के तहत बनाए गए नियमों को पेश करने का आदेश दिया था। जस्टिस विक्रम नाथ ने 15 मई को कहा था कि हवाई किराए को तर्कसंगत बनाया जाना चाहिए और केंद्र से यात्रियों को राहत देने को कहा था। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा था कि 2024 का नया कानून जनवरी 2025 में लागू कर दिया गया है और उससे जुड़े नियम तैयार किए जा रहे थे।

(हिन्दुस्तान प्रिंट के सहयोग से)

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Ankit Ojhaविद्यालयी जीवन से ही कलात्मक अभिव्यक्ति, विचारशील स्वभाव और मिलनसार व्यक्तित्व और सामान्य के अंदर डुबकी लगाकर कुछ खास खोज लाने का कौशल पत्रकारिता के लिए अनुकूल साबित हुआ। अंकित ओझा एक दशक से डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में लगातार सक्रिय हैं। उत्तर प्रदेश के बाराबंकी के रहने वाले अंकित ओझा समाचारों की दुनिया में तथ्यों के महत्व के साथ ही संवेदनशीलता के पक्ष को साधने में निपुण हैं। पिछले चार साल से हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप के 'लाइव हिन्दुस्तान' के लिए चीफ कॉन्टेंट प्रड्यूसर पद पर कार्य कर रहे हैं। इससे पहले 'टाइम्स ऑफ इंडिया' और 'इंडियन एक्सप्रेस' ग्रुप के साथ भी कार्य कर चुके हैं।

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अकादमिक योग्यताः अंकित ओझा ने प्रारंभिक शिक्षा नवोदय विद्यालय से पूरी करने के बाद जामिया मिल्ल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता में ही ग्रैजुएशन किया है। इसके बाद भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) से पोस्ट ग्रैजुएट डिप्लोमा और कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में एमए किया है। जामिया में अध्ययन के दौरान ही इटैलियन और उर्दू भाषा में भी कोर्स किए हैं। इसके अलावा पंजाबी भाषा की भी अच्छी समझ रखते हैं। विश्वविद्यालय में NCC का 'C सर्टिफिकेट' भी प्राप्त किया है। IIMC और ऑक्सफर्ड से स्वास्थ्य पत्रकारिता का सर्टिफिकेट भी प्राप्त किया है।

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