राजस्व लोक अदालतों से 6.81 लाख मामले निपटाए, फिर भी लंबित मामलों पर डीसी को जिम्मेदार ठहराया जाएगा
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह ने बताया कि राजस्व लोक अदालत और विशेष राजस्व लोक अदालतों के जरिए लगभग 6.81 लाख लंबित राजस्व मामलों का निपटारा किया गया, जिसमें 5.44 लाख से अधिक इंतकाल, 47,333 तकसीम और 63,000 से अधिक निशानदेही के मामले शामिल हैं। फिर भी कुछ क्षेत्रों में मामलों का समय पर निपटारा न होने की सूचना मिल रही है, इसलिए जिला उपायुक्तों की जवाबदेही सुनिश्चित की जाएगी। सरकार ने कहा कि नियमित तौर पर तहसील एवं उप‑तहसील स्तर पर लोक अदालतें तथा जनवरी 2026 से साप्ताहिक विशेष लोक अदालतें आयोजित की जा रही हैं, जिससे ग्रामीण व दूरस्थ लोगों को तेज़ समाधान मिलता रहेगा।

सौजन्य से:- Amar Ujala
हिमाचल: लोक अदालतों के बाद भी राजस्व मामले लंबित रहे तो तय होगी डीसी की जवाबदेही
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने बताया कि राजस्व मामलों के निपटारे के लिए शुरू की गई राजस्व लोक अदालत और विशेष राजस्व लोक अदालतों के माध्यम से प्रदेश में करीब 6.81 लाख लंबित मामलों का निपटारा किया जा चुका है।
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राजस्व लोक अदालत और विशेष राजस्व लोक अदालतों के माध्यम से प्रदेश में लाखों लंबित मामलों का निपटारा किया जा चुका है, बावजूद इसके सरकार को अभी भी प्रदेश के कई क्षेत्रों से राजस्व मामलों के समय पर न निपटने की सूचनाएं मिल रही हैं। ऐसे मामलों में अब जिला उपायुक्तों की जवाबदेही सुनिश्चित की जाएगी। सरकार ने स्पष्ट किया है कि लोगों को बार-बार राजस्व कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें, इसके लिए लंबित मामलों का समयबद्ध निपटारा जरूरी है। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने बताया कि राजस्व मामलों के निपटारे के लिए शुरू की गई राजस्व लोक अदालत और विशेष राजस्व लोक अदालतों के माध्यम से प्रदेश में करीब 6.81 लाख लंबित मामलों का निपटारा किया जा चुका है। इनमें 5,44,000 से अधिक इंतकाल, 47,333 तकसीम और 63,000 से अधिक निशानदेही के मामले शामिल हैं। इसके अलावा राजस्व अभिलेखों में 26,288 दुरुस्ती भी की गई हैं।
अक्तूबर 2023 से हर माह के अंतिम दो दिनों में तहसील और उप-तहसील मुख्यालयों पर राजस्व लोक अदालतें लगाई जा रही हैं। वहीं, जनवरी 2026 से हर सप्ताह मंगलवार, बुधवार और गुरुवार को विशेष राजस्व लोक अदालतों का आयोजन किया जा रहा है। इनमें तकसीम और राजस्व दस्तावेजों में सुधार से संबंधित मामलों का निपटारा किया जाता है। इससे लंबित राजस्व मामलों की संख्या में उल्लेखनीय कमी आई है। सरकार के अनुसार इस पहल से ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों के लोगों को विशेष राहत मिली है। पहले भूमि संबंधी मामलों के निपटारे के लिए लोगों को बार-बार राजस्व कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते थे।
इससे समय और धन दोनों खर्च होते थे। लोक अदालतों के माध्यम से अब लोगों को समयबद्ध तरीके से अपने मामलों के समाधान का मंच मिल रहा है। इससे भूमि मालिकों के समय और पैसे की बचत हो रही है। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेशवासियों को पारदर्शी, जवाबदेह और उत्तरदायी प्रशासन देने के लिए प्रतिबद्ध है। राजस्व से जुड़े मामले सीधे परिवारों और भूमि मालिकों के हितों से जुड़े होते हैं, इसलिए इनका समयबद्ध समाधान सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि सुधारात्मक प्रक्रियाओं को आगे भी जारी रखा जाएगा, ताकि लोगों को वैध मामलों के समाधान के लिए अनावश्यक कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें और अतिरिक्त धन खर्च न करना पड़े।
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