सुपौल में राष्ट्रीय लोक अदालत की त्वरित तैयारी: एमएसीटी व बैंक ऋण मामलों को प्रमुखता
सुपौल के न्यायिक अधिकारी एक बैठक में आगामी राष्ट्रीय लोक अदालत के लिए मामलों की पहचान और सूचीबद्ध करने पर जोर दे रहे हैं, जिससे पक्षकारों की सहमति से विवादों का शीघ्र समाधान हो सके। विशेष रूप से मोटर दुर्घटना (एमएसीटी) और बैंक ऋण से जुड़े मामलों को प्राथमिकता दी गई है, जबकि अन्य समझौता योग्य मामलों को भी तेजी से निपटाने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं।

सौजन्य से:- Prabhat Khabar
सुपौल में राष्ट्रीय लोक अदालत की तैयारी तेज, एमएसीटी समेत समझौता योग्य मामलों के त्वरित निस्तारण पर जोर
बैठक के दौरान न्यायाधीश. | Prabhat Khabar Network
सुपौल व्यवहार न्यायालय में आगामी राष्ट्रीय लोक अदालत को सफल बनाने हेतु न्यायिक पदाधिकारियों की महत्वपूर्ण बैठक हुई. बैठक में एमएसीटी, बैंक ऋण और अन्य समझौता योग्य मामलों के त्वरित एवं सौहार्दपूर्ण निस्तारण पर विशेष बल दिया गया. उद्देश्य पक्षकारों की सहमति से विवादों का समाधान है.
आगामी राष्ट्रीय लोक अदालत को सफल बनाने और अधिक से अधिक मामलों का त्वरित एवं सौहार्दपूर्ण निस्तारण सुनिश्चित करने को लेकर व्यवहार न्यायालय, सुपौल में जिले के न्यायिक पदाधिकारियों की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गयी. बैठक की अध्यक्षता प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकार, सुपौल राजेश कुमार बच्चन ने की. बैठक में सुपौल मुख्यालय के न्यायिक पदाधिकारियों के अलावा वीरपुर और निर्मली अनुमंडल के न्यायिक पदाधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से शामिल हुए.
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मामलों के चिन्हांकन और सूचीबद्ध करने पर जोर
बैठक के दौरान आगामी राष्ट्रीय लोक अदालत की तैयारियों, निस्तारण योग्य मामलों के चिन्हांकन और अधिकतम मामलों के समाधान को लेकर विस्तार से चर्चा की गयी. प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने न्यायिक पदाधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश देते हुए कहा कि लोक अदालत का उद्देश्य केवल मामलों की संख्या कम करना नहीं है. इसका वास्तविक उद्देश्य पक्षकारों की सहमति और आपसी समझौते के आधार पर विवादों का त्वरित, सरल एवं प्रभावी समाधान उपलब्ध कराना है.
उन्होंने निस्तारण योग्य मामलों की पहचान कर उन्हें समय से सूचीबद्ध करने तथा संबंधित पक्षकारों को लोक अदालत से मिलने वाले लाभों की जानकारी देने पर विशेष जोर दिया.
एमएसीटी मामलों के निस्तारण को प्राथमिकता
बैठक में मोटर दुर्घटना दावा वाद यानी एमएसीटी के अधिक से अधिक मामलों के निस्तारण को प्राथमिकता देने का निर्देश दिया गया. इसके साथ ही विद्युत विभाग से संबंधित मामलों, समझौता योग्य आपराधिक मामलों और यातायात चालान से जुड़े मामलों को भी आगामी राष्ट्रीय लोक अदालत में अधिक संख्या में निस्तारित कराने के लिए आवश्यक कार्रवाई करने को कहा गया.
न्यायिक पदाधिकारियों को ऐसे मामलों की पहचान कर संबंधित पक्षकारों के साथ समन्वय स्थापित करने का निर्देश दिया गया, ताकि आपसी सहमति के आधार पर विवादों का समाधान कराया जा सके.
बैंक ऋण मामलों के समाधान पर भी रहेगा फोकस
बैठक में बैंक ऋण और ऋण वसूली से संबंधित मामलों के समाधान पर भी विशेष ध्यान देने को कहा गया. संबंधित बैंकों और वित्तीय संस्थानों के साथ समन्वय स्थापित कर ऋणग्राहियों को आपसी समझौते के माध्यम से मामलों के समाधान का अवसर उपलब्ध कराने पर बल दिया गया.
प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने कहा कि लोक अदालत त्वरित और सुलभ न्याय का प्रभावी माध्यम है. इसके जरिए पक्षकार लंबे समय तक चलने वाली न्यायिक प्रक्रिया से बच सकते हैं. साथ ही समय और धन दोनों की बचत करते हुए आपसी सहमति से विवाद का समाधान प्राप्त कर सकते हैं.
समन्वित प्रयास से सफल होगी राष्ट्रीय लोक अदालत
बैठक के अंत में सभी न्यायिक पदाधिकारियों से समन्वित प्रयास करते हुए पात्र मामलों का अधिकतम निस्तारण सुनिश्चित करने और आगामी राष्ट्रीय लोक अदालत को सफल बनाने का आह्वान किया गया. न्यायिक पदाधिकारियों को निर्देश दिया गया कि लोक अदालत से अधिक से अधिक पक्षकारों को लाभ मिले, इसके लिए मामलों की पहचान से लेकर पक्षकारों को समझौते के लिए प्रेरित करने तक प्रभावी प्रयास किए जाएं.
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