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गर्ग‑दुबे के बीच मानहानि लड़ाई अदालत तक, दुबे ने कहा 'जेल भेजूँगा, पीएम की कुर्सी 2034 तक नहीं होगी'

पूर्व वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग और भाजपा सांसद निशिकांत दुबे के बीच का वैर अब दिल्ली के कोर्ट में दो करोड़ रुपये के मानहानि मुकदमे में बदला है। दुबे ने गर्ग पर यूपीआई शुल्क, एसआईआर और वित्तीय आंकड़ों को लेकर आरोप लगाए, जबकि गर्ग ने अपने बयानों को सच्चाई मानते हुए माफी से इंकार कर दिया। इस संघर्ष के बीच दुबे ने पॉडकास्ट में कहा कि प्रधानमंत्री का पद 2034 तक खाली नहीं रहेगा।

30 सितंबर 2026 को 02:04 am बजे
गर्ग‑दुबे के बीच मानहानि लड़ाई अदालत तक, दुबे ने कहा 'जेल भेजूँगा, पीएम की कुर्सी 2034 तक नहीं होगी'

सौजन्य से:- Amar Ujala

अनम्यूट भारत: गर्ग और दुबे की जुबानी जंग पहुंची अदालत, निशिकांत बोले-जेल भेजकर रहूंगा; पीएम के पद पर क्या कहा?

पूर्व वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग और भाजपा सांसद निशिकांत दुबे की जुबानी जंग अदालत पहुंच चुकी है। झारखंड के गोड्डा से निर्वाचित लोकसभा सांसद दुबे ने अमर उजाला के पॉडकास्ट अनम्यूट भारत में गर्ग के साथ तल्खी के अलावा यूपीआई शुल्क, एसआईआर और संथाल परगना पर भी खुलकर बात की। उन्होंने कहा, 2034 तक प्रधानमंत्री की कुर्सी खाली नहीं है।

विस्तार

जीडीपी के आंकड़ों पर एक लेख से शुरू हुई जुबानी जंग अब अदालत की दहलीज पर पहुंच चुकी है। गोड्डा से भाजपा सांसद डॉ. निशिकांत दुबे ने पूर्व वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग के खिलाफ दिल्ली का पटियाला हाउस कोर्ट और दिल्ली हाईकोर्ट में दो करोड़ रुपये का मानहानि मामला दायर करने का एलान किया।

मामला दायर करने से पहले अमर उजाला के पॉडकास्ट अनम्यूट भारत में दुबे ने कहा था कि गर्ग ने माफी नहीं मांगी तो उन्हें जेल तक ले जाएंगे। उनका कहना था कि यह धमकी नहीं, उनकी अपनी पहचान बचाने का सवाल है। भाजपा सांसद ने पॉडकास्ट में कई मुद्दों पर खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि 2034 तक प्रधानमंत्री की कुर्सी खाली नहीं है।

सांसद और पूर्व वित्त सचिव के बीच ऐसे छिड़ा घमासान

इस माह के शुरू में गर्ग ने एक लेख में दावा किया कि चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में वास्तविक आर्थिक वृद्धि लगभग शून्य है। इस पर दुबे ने उनका मजाक उड़ाते हुए लिखा कि गर्ग को अज्ञानता के कारण रातो-रात वित्त सचिव के पद से हटाया गया था। उन्होंने मार्च 2018 में प्रधानमंत्री को लिखी वह चिट्ठी भी साझा की, जिसमें गर्ग की राजकोषीय घाटे से जुड़ी नीति पर सवाल उठाए गए थे।

सितंबर मध्य में गर्ग ने पलटवार करते हुए आरोप लगाया कि 2018 में दुबे ने जीवन बीमा निगम के अध्यक्ष पर एक तबादले के मामले में दबाव डलवाने के लिए उनसे संपर्क किया था, और मना करने पर प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव से उनकी शिकायत की थी। इसके बाद 21 सितंबर को दुबे की ओर से भारतीय न्याय संहिता की धारा 356 के तहत नोटिस भेजकर सात दिन में बिना शर्त माफी मांगने को कहा गया।

गर्ग बोले-माफी नहीं मांगूंगा, दुबे ने कहा-सबूत दिखाएं

गर्ग ने 26 सितंबर को नोटिस का जवाब भेजकर उसे सार्वजनिक कर दिया। साथ ही, कहा कि उनकी बात पूरी तरह सच है और एक लोकसेवक के सार्वजनिक आचरण पर सद्भाव में दी गई राय है, इसलिए मानहानि नहीं बनती।

डॉ. निशिकांत ने सोमवार को एक्स पर लिखा कि उन्होंने गर्ग से न व्यक्तिगत रूप से बात की, न फोन पर, और प्रधानमंत्री कार्यालय में प्रधान सचिव का कमरा तक नहीं देखा। पॉडकास्ट में दुबे ने कहा कि 2014 में सरकार बनने के दिन ही उन्होंने तय कर लिया था कि क्षेत्र के काम के अलावा किसी मंत्री से नहीं मिलेंगे। जब मंत्री से मिलने नहीं जाते तो सचिव की क्या बिसात। कोई एक तस्वीर दिखा दे जिसमें वह वित्त मंत्रालय में अरुण जेटली, पीयूष गोयल या निर्मला सीतारमण से मिलने गए हों।

दुबे के मुताबिक, गर्ग से उनकी तल्खी नोटबंदी के बाद की है। उन्होंने दावा किया, वीरप्पा मोइली की अध्यक्षता वाली वित्त संबंधी संसदीय स्थायी समिति, जिसमें डॉ. मनमोहन सिंह भी सदस्य थे, नोटबंदी पर अपनी रिपोर्ट इसलिए स्वीकार नहीं कर पाई क्योंकि उन्होंने अकेले दम पर समानांतर रिपोर्ट तैयार कर दी थी।

हर सवाल पर दिया बेबाक जवाब

- यूपीआई: यूपीआई शुल्क के विवाद में दुबे ने कहा, दो हजार रुपये से कम के लेनदेन पर आज भी कोई शुल्क नहीं है और 95-96 फीसदी लेनदेन इसी दायरे में हैं।

- एसआईआर: राहुल गांधी वही बातें दोहरा रहे हैं जो सोरोस फाउंडेशन और सैम पित्रोदा से जुड़ी संस्थाएं वर्षों से कह रही हैं। झारखंड में एसआईआर शुरू होने पर उन्हें और उनकी पत्नी को भी नोटिस मिला।

राहुल को समझ नहीं

दुबे ने कहा-प्रधानमंत्री पद के लिए 2034 तक कुर्सी खाली नहीं है। राहुल गांधी को देश की समझ नहीं, और भाजपा की मजबूती में उनका बड़ा योगदान है।

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