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मार्गदर्शी को मिली बड़ी राहत, सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व सांसद की याचिका पर सुनवाई करने से इनकार किया

मार्गदर्शी को मिली बड़ी राहत, सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व सांसद की याचिका पर सुनवाई करने से इनकार किया पूर्व सांसद वुंडावल्ली अरुण कुमार ने दाखिल की थी याचिका. कोर्ट ने कहा, आपका लोकस नहीं बनता है. By Sumit Saxena Published :…

20 अगस्त 2026 को 01:56 pm बजे
मार्गदर्शी को मिली बड़ी राहत, सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व सांसद की याचिका पर सुनवाई करने से इनकार किया

सौजन्य से:- ETV Bharat

मार्गदर्शी को मिली बड़ी राहत, सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व सांसद की याचिका पर सुनवाई करने से इनकार किया

पूर्व सांसद वुंडावल्ली अरुण कुमार ने दाखिल की थी याचिका. कोर्ट ने कहा, आपका लोकस नहीं बनता है.

By Sumit Saxena

Published : August 20, 2026 at 3:30 PM IST

नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को पूर्व सांसद वुंडावल्ली अरुण कुमार द्वारा मार्गदर्शी फाइनेंसर्स के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया. यह मामला जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस प्रसन्ना बी वराले की पीठ के सामने सुनवाई के लिए आया था.

पीठ ने याचिकाकर्ता उंडावल्ली की उस याचिका पर सुनवाई की जिसमें तेलंगाना हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसके तहत मार्गदर्शी फाइनेंसर्स के पक्ष में फैसला दिया गया था. सुप्रीम कोर्ट की दो जजों की पीठ ने गुरुवार को उंडावल्ली की तरफ से दायर की गई विशेष अनुमति याचिका पर आखिरी सुनवाई की. सीनियर वकील सिद्धार्थ लूथरा और नागमुथु ने पीठ के सामने मार्गदर्शी फाइनेंसर्स की तरफ से प्रतिनिधित्व किया.

सुनवाई के दौरान पीठ ने याचिकाकर्ता से विशेष रूप से पूछा, “आप यह याचिका दायर करने वाले कौन होते हैं?” पीठ ने कहा कि ऐसा लगता है कि यह केवल उनका व्यक्तिगत विवाद है और इसके अलावा कुछ भी नजर नहीं आ रहा है. पीठ ने याचिकाकर्ता को साफ कर दिया कि वह इस मामले में जितनी ज़्यादा बहस करेंगे, उनके खिलाफ शक उतना ही बढ़ेगा.

मार्गदर्शी फाइनेंसर्स की तरफ से सीनियर वकील ने जोर देकर कहा कि अब तक 2,500 करोड़ रुपये वापस किए जा चुके हैं. पीठ को बताया गया कि बाकी 5.23 करोड़ रुपये की बिना दावे वाली रकम एक एस्क्रो अकाउंट (Escrow Account) में जमा कर दी गई है.

मार्गदर्शक फाइनेंसर्स के वकीलों ने इस बात पर जोर दिया कि हाई कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार काम किया था, और उसी के अनुसार एक पब्लिक नोटिस जारी किया गया था और उसके बाद की प्रक्रिया पूरी की गई थी. दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने उंडावल्ली अरुण कुमार की याचिका खारिज कर दी.

आपको बता दें कि 2025 की शुरुआत में, मार्गदर्शी ने तेलंगाना उच्च न्यायालय में एक अंतरिम आवेदन दायर किया था, जिसमें प्रार्थना की गई थी कि 2008 में उसके खिलाफ शुरू की गई आपराधिक कार्यवाही उसके सभी जमाकर्ताओं को धन वापस कर दिए जाने के कारण निष्प्रभावी हो गई है.

आवेदन में न्यायालय को यह भी बताया गया था कि ग्रुप फाउंडर रामोजी राव का जून 2024 में निधन हो गया था और हिंदू अविभाजित परिवार (एचयूएफ) के अन्य शेष सदस्यों को आरोपी नहीं बनाया जा सकता है.2008 में, वाईएसआर के शासनकाल के दौरान अविभाजित आंध्र प्रदेश राज्य ने मार्गदर्शी के खिलाफ आपराधिक शिकायत दर्ज की थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि एचयूएफ होने के बावजूद आम जनता से जमा स्वीकार करके उसने आरबीआई अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन किया है.

मार्गदर्शी के खिलाफ कार्यवाही को 10 साल बाद उच्च न्यायालय ने रद्द कर दिया था.अप्रैल 2024 में सर्वोच्च न्यायालय ने मामले को उच्च न्यायालय को वापस भेज दिया ताकि यह निर्धारित किया जा सके कि मार्गदर्शी फाइनेंसर्स के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही जारी रखना आपराधिक न्याय प्रणाली के संचालन के लिए लाभकारी होगा या निरर्थक.

न्यायालय ने इस उद्देश्य के लिए वास्तविक निवेशकों/जमाकर्ताओं से दावे/आपत्तियां आमंत्रित करने का सुझाव दिया.तदनुसार, उच्च न्यायालय रजिस्ट्री ने 26 सितंबर, 2024 को समाचार पत्रों में एक सार्वजनिक सूचना प्रकाशित कर वास्तविक निवेशकों/जमाकर्ताओं से दावे/आपत्तियां आमंत्रित कीं.

समाचार पत्र प्रकाशन के जवाब में कोई जमाकर्ता आगे नहीं आया. आपराधिक कार्यवाही के लंबित रहने के दौरान मार्गदर्शी फाइनेंस ह्युफ के पूर्व कर्ता के निधन को ध्यान में रखते हुए, उच्च न्यायालय ने मार्गदर्शी की आपराधिक याचिकाओं को स्वीकार कर लिया, जिससे आरोप समाप्त हो गए. सर्वोच्च न्यायालय ने उच्च न्यायालय के निर्णय में हस्तक्षेप करने का कोई कारण नहीं देखा और वुंडावल्ली अरुण कुमार द्वारा दायर याचिका को खारिज कर दिया.

ये भी पढ़ें- सुप्रीम कोर्ट मनी लॉन्ड्रिंग मामलों में ED से जुड़े फैसले के खिलाफ पुनर्विचार याचिकाओं पर सुनवाई करेगा

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