सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ट्रायल में देरी हिरासत को सजा नहीं बना सकती – दो राजस्थानी आरोपियों को जमानत
सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान PHED के वित्तीय अनियमितता मामले में संजय बड़ाया और शुभांशु दीक्षित को जमानत दी, यह कहते हुए कि जांच पूरी और चार्जशीट दाखिल होने के बाद भी ट्रायल में देर होने पर प्री‑ट्रायल हिरासत को दंडात्मक नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत व्यक्तिगत स्वतंत्रता की सुरक्षा के लिए हस्तक्षेप का महत्व रेखांकित किया और बताया कि साक्ष्य पर्याप्त हैं, पर आरोप अभी तय नहीं हुए हैं, इसलिए ट्रायल लंबा चलने की संभावना है।

सौजन्य से:- Navbharat Times
सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान PHED से जुड़ी कथित वित्तीय अनियमितताओं के मामले में संजय बड़ाया और शुभांशु दीक्षित को जमानत दी। कोर्ट ने कहा कि जांच पूरी और चार्जशीट दाखिल होने के बाद, जब ट्रायल शुरू होने में समय लगे तो लंबी प्री-ट्रायल हिरासत को सजा में नहीं बदला जा सकता।
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि मुकदमे की सुनवाई शुरू होने और उसके जल्द पूरा होने की संभावना न हो तो ट्रायल से पहले की हिरासत को सजा के रूप में नहीं बदला जा सकता। कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत व्यक्ति की निजी स्वतंत्रता की रक्षा के लिए हस्तक्षेप जरूरी हो सकता है। इस टिप्पणी के साथ कोर्ट ने राजस्थान के सार्वजनिक स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (PHED) में कथित वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े 2024 के मामले में दो आरोपियों को जमानत दे दी।
जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की बेंच ने संजय बड़ाया और शुभांशु दीक्षित की याचिकाओं पर यह आदेश दिया। दोनों ने राजस्थान हाई कोर्ट द्वारा नियमित जमानत से इनकार किए जाने के आदेशों को चुनौती दी थी। बेंच ने कहा कि यह आपराधिक न्यायशास्त्र का स्थापित सिद्धांत है कि ट्रायल से पहले की हिरासत को दंडात्मक हिरासत का रूप नहीं दिया जा सकता, खासकर तब जब ट्रायल शुरू होने और खत्म होने में अभी काफी समय हो।
अदालत ने राजस्थान के दो आरोपियों को बेल दी, कहा, लंबा चलेगा ट्रायल
जांच पूरी, चार्जशीट दाखिल
मामला जल जीवन मिशन के क्रियान्वयन में कथित अनियमितताओं से जुड़ा है। कोर्ट ने कहा कि दोनों आरोपियों के खिलाफ जांच पूरी हो चुकी है और चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है। अभियोजन का मामला मुख्य रूप से दस्तावेजी साक्ष्यों और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड पर आधारित है। ये सभी सामग्री जांच एजेंसी पहले ही जब्त कर सुरक्षित रख चुकी है, इसलिए सबूतों से छेड़छाड़ की आशंका काफी हद तक समाप्त हो गई है। कोर्ट ने कहा कि मामले में साक्ष्यों की मात्रा काफी अधिक है और अभी आरोप भी तय नहीं हुए हैं। ऐसे में ट्रायल लंबा चलने की संभावना है। कुछ अन्य आरोपियों की जांच अभी जारी है और दो आरोपी फरार बताए गए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने माना कि गहरी साजिश वाले आर्थिक अपराधों को गंभीरता से देखा जाना चाहिए।
लेखक के बारे मेंटीना"टीना नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में बतौर कंसल्टेंट कार्यरत हैं और डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया में अपनी पहचान बनाने की प्रक्रिया में हैं। फिलहाल वह नेशनल, क्राइम, जंगल न्यूज, गुड न्यूज और लोकल खबरों पर सक्रिय रूप से काम कर रही हैं।
इसके अलावा, एनबीटी की सोशल मीडिया टीम के साथ मिलकर वह लगातार डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर यूज़र्स तक प्रभावशाली और भरोसेमंद कंटेंट पहुंचाने का काम कर रही हैं।
टीना ने अपने करियर की शुरुआत ‘फेमिनिज्म इन इंडिया’ से की, जहां उन्होंने समावेशी सोच, जेंडर संवेदनशीलता और सामाजिक मुद्दों को गहराई से समझा। और वहीं, समावेशी दुनिया की परिकल्पना से वाकिफ हुईं।
टीना का सकारात्मक पत्रकारिता और समावेशी लेखन की ओर बेहद झुकाव है। साथ ही, वह सीखने की प्रक्रिया में विश्वास रखती हैं।
टीना ने दिल्ली विश्वविद्यालय के लेडी श्री राम कॉलेज फॉर विमेन से स्नातक और डीयू से ही पत्रकारिता में डिप्लोमा भी प्राप्त किया। इसके बाद उन्होंने, गुरु जम्भेश्वर यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी, हिसार से पत्रकारिता में परास्नातक की डिग्री हासिल की और डिजिटल मीडिया में कदम रखा।"... और पढ़ें
कन्वर्सेशन शुरू करें
Indiaकी ताजा खबरें, ब्रेकिंग न्यूज, अनकही और सच्ची कहानियां, सिर्फ खबरें नहीं उसका विश्लेषण भी। इन सब की जानकारी, सबसे पहले और सबसे सटीक हिंदी में देश के सबसे लोकप्रिय, सबसे भरोसेमंद Hindi Newsडिजिटल प्लेटफ़ॉर्म नवभारत टाइम्स पर
Powered by Nyaya 247 News
संबंधित ख़बरें
इसी विषय की और ख़बरें →
रांची अदालत ने JPSC परीक्षा घोटाले के तीन मुख्य आरोपी की जमानत याचिकाएँ खारिज

ठाणे में शिवसेना‑UBT नेता पर गोली, विपक्ष ने सरकार को ‘कानून व्यवस्था विफल’ का आरोप

उमर ख़ालिद‑शरजील इमाम की जमानत की तीसरी याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट ने फिर इनकार किया

उमर ख़ालिद व शारजील इमाम की जमानत याचिकाओं को दिल्ली हाई कोर्ट ने खारिज किया

पश्चिम बंगाल सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कांग्रेस के नंदिग्राम प्रत्याशी की जमानत रद्दी की मांग की

दिल्ली हाई कोर्ट ने उमर खलीद‑शरजील इमाम को 2020 उत्तर‑पूर्व दिल्ली दंगे के यूएपीए केस में जमानत से वंचित किया

सुप्रीम कोर्ट ने यूपी पुलिस की जांच पर कड़ी फटकार देते हुए कहा, 'भंग कर देना चाहिए'

नंदीग्राम उपचुनाव में मिलन प्रधान की जमानत पर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई, 5 अक्टूबर को तय
ताज़ा ख़बरें
- मेरठ के नीला ड्रम हत्या मामले में आज संभावित फैसला, मुस्कान‑साहिल के सामने सजा की घड़ी
- दिल्ली हाई कोर्ट ने उमर खालिद व शरजील इमाम को 2020 दंगों के यूएपीए केस में तीसरी बार जमानत नहीं दी
- बच्चों के लिए लैंगिक अपराध रोकथाम और कानूनी अधिकारों की विशेष जागरूकता शिविर
- मेहरुत के "नीले ड्रम" मामले में 126 सुनवाइयाँ, 22 गवाह—आज निर्णय अपेक्षित
- सुप्रीम कोर्ट ने सुरक्षा, डिजिटल शुल्क और शिक्षा सहित कई मामलों में सरकार को कड़ी चुनौती
- नीला ड्रम केस में आज सुनाएगा न्यायालय मुस्कान‑साहिल को दोषी या निरपराध का फैसला
- सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में सार्वजनिक स्थानों की सुरक्षा के लिए चार हफ्तों में ऑडिट का आदेश दिया
- दिल्ली हाई कोर्ट ने जियोस्टार को भारत‑वेस्ट इंडीज़ क्रिकेट सीरीज के अवैध स्ट्रीमिंग साइटों पर रीयल‑टाइम ब्लॉकिंग का आदेश दिया

