सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को तृणमूल कांग्रेस के नाम‑चिह्न विवाद पर समयसीमा देने का आदेश
अदालत ने तृणमूल कांग्रेस के दो विरोधी गुटों में नाम और ‘जोड़ा घास फूल’ प्रतीक को लेकर चल रहे विवाद पर अंतिम निर्णय की समयसीमा बताने को चुनाव आयोग से कहा और याचिका की सुनवाई 28 सितंबर निर्धारित की। वरिष्ठ वकीलों ने चुनाव प्रक्रिया के दौरान आयोग के कदमों की वैधता पर प्रश्न उठाए, जबकि कोर्ट ने आयोग को नियमित सुनवाई कर निर्णय देने का निर्देश दिया।

सौजन्य से:- ETV Bharat
तृणमूल कांग्रेस विवाद: सुप्रीम कोर्ट ने निर्वाचन आयोग से अंतिम फैसले के लिए समयसीमा बताने को कहा
सुप्रीम कोर्ट ने 21 सितंबर को बनर्जी की याचिका को तत्काल सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने पर सहमत हो गई थी.
Published : September 24, 2026 at 2:48 PM IST
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को निर्वाचन आयोग से कहा कि वह तृणमूल कांग्रेस के दो विरोधी गुटों के भीतर पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न ‘जोड़ा घास फूल’ को लेकर जारी विवाद में अंतिम निर्णय लेने संबंधी समयसीमा की जानकारी प्रदान करे.
सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की बेंच पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें उन्होंने निर्वाचन आयोग द्वारा तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिह्न पर रोक लगाए जाने को चुनौती दी है.
बेंच ने निर्वाचन आयोग की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता डी.एस. नायडू से कहा कि वह तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिह्न पर जारी विवाद पर अंतिम फैसला लेने की समयसीमा के बारे में जानकारी दें. अदालत ने बनर्जी की याचिका पर सुनवाई के लिए 28 सितंबर की तारीख निर्धारित कर दी.
ममता बनर्जी की तरफ से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कहा, "ईमानदारी से कहूं तो, मैं इस चुनाव पर रोक लगाने की मांग नहीं कर सकता." उन्होंने यह बात छह अक्टूबर को होने वाले पश्चिम बंगाल विधानसभा उपचुनाव के संदर्भ में तब कही, जब न्यायमूर्ति बागची ने कहा कि चुनाव की प्रक्रिया पहले ही शुरू हो चुकी है.
सिब्बल ने कहा कि निर्वाचन आयोग द्वारा अपनाई गई प्रक्रिया पूरी तरह गलत है क्योंकि यह चुनाव प्रक्रिया के दौरान की गई, जिससे बनर्जी के पास रोक के आदेश को चुनौती देने का कोई उपाय नहीं बचा. सुप्रीम कोर्ट ने कहा, "शायद (निर्वाचन) आयोग को यह निर्देश देने की जरूरत है कि वे इस मामले की सुनवाई शुरू करें, कुछ समय तक रोज़ाना सुनवाई करें, जो भी सबूत या गवाही पेश करनी हो, उसे लें और इस पर फैसला करें."
सुप्रीम कोर्ट ने 21 सितंबर को बनर्जी की याचिका को तत्काल सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने पर सहमत हो गई थी. निर्वाचन आयोग ने ‘अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस’ नाम का इस्तेमाल करने से दोनों गुटों को रोकते हुए उन्हें अलग-अलग नाम और चुनाव चिह्न आवंटित किए थे. साथ ही, विवाद पर अंतिम फ़ैसला होने तक उनके चुनाव चिह्न को ‘निलंबित’ रख लिया था.
ये भी पढ़ें: ममता बनर्जी को हाई कोर्ट से बड़ी राहत: चुनाव चिह्न फ्रीज होने के बाद भी बैंक अकाउंट इस्तेमाल करने की इजाजत
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