होमवकीलजेल अदालत में न्याय की निशानी: 18 साल पुराना मामला हुआ निपटाना
वकील

जेल अदालत में न्याय की निशानी: 18 साल पुराना मामला हुआ निपटाना

सरायकेला मंडल कारा में जेल अदालत और विधिक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें बंदियों को उनके कानूनी अधिकारों की जानकारी दी गई और वर्षों पुराने मामलों का निपटारा हुआ।

16 अगस्त 2026 को 09:54 am बजे
जेल अदालत में न्याय की निशानी: 18 साल पुराना मामला हुआ निपटाना

सौजन्य से:- Prabhat Khabar

जेल अदालत में सुनवाई के दौरान जब बंदियों ने स्वीकार किया अपना दोष...

विधिक जागरूकता कार्यक्रम में उपस्थित न्यायिक पदाधिकारी.

सरायकेला मंडल कारा में स्वतंत्रता दिवस पर जेल अदालत, चिकित्सा जांच और विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया. जानें पूरी खबर यहां.

सरायकेला : स्वतंत्रता दिवस पर सरायकेला मंडल कारा में आयोजित जेल अदालत और विधिक जागरूकता कार्यक्रम चर्चा का विषय बन गया. एक ओर वर्षों से लंबित मामलों की सुनवाई हुई, तो दूसरी ओर बंदियों को उनके कानूनी अधिकारों की जानकारी दी गई. सबसे खास बात यह रही कि 18 साल पुराने मामले का भी निपटारा किया गया. कार्यक्रम के दौरान महिला बंदियों की समस्याएं भी सुनी गईं. अभियुक्तों ने अपना दोष स्वीकार कर लिया. इसके बाद मामलों का निष्पादन किया गया.

जेल अदालत में पांच मामलों की हुई सुनवाई

झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकार के निर्देश पर मंडल कारा, सरायकेला में जेल अदालत-सह-चिकित्सा जांच शिविर और विधिक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया. जेल अदालत में कुल पांच मामलों को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया, जिनमें दो मामलों का निष्पादन किया गया. निष्पादित मामलों में एक मामला मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी के न्यायालय और दूसरा एसीजेएम, सरायकेला के न्यायालय से संबंधित था. इनमें से एक मामला वर्ष 2008 से लंबित था. दोनों मामलों में अभियुक्तों ने अपना दोष स्वीकार कर लिया, जिसके बाद मामलों का निष्पादन किया गया.

महिला वार्ड का किया निरीक्षण

कार्यक्रम के दौरान न्यायिक पदाधिकारियों और जिला विधिक सेवा प्राधिकार के अधिकारियों ने महिला वार्ड का निरीक्षण किया. इस दौरान महिला बंदियों से बातचीत कर उनकी समस्याएं और शिकायतें सुनी गईं. साथ ही उन्हें आवश्यक कानूनी सहायता उपलब्ध कराने का आश्वासन भी दिया गया. जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव तौसीफ मेराज ने बंदियों को संविधान और कानून के तहत मिलने वाले अधिकारों की जानकारी दी. उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम में महात्मा गांधी और शहीद भगत सिंह के योगदान का भी उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि कोई भी व्यक्ति आर्थिक या सामाजिक कारणों से न्याय से वंचित नहीं रहेगा. विधिक जागरूकता कार्यक्रम के साथ-साथ बंदियों के लिए चिकित्सा जांच शिविर भी आयोजित किया गया. कार्यक्रम में न्यायिक पदाधिकारियों, अधिवक्ताओं, चिकित्सा पदाधिकारियों और अन्य अधिकारियों ने भाग लिया.

प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By प्रताप कुमार मिश्रा

प्रताप कुमार मिश्रा वर्ष 2003 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. उन्होंने कोल्हन विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में स्नातक किया है. राजनीतिक, सामाजिक, क्राइम, खेल की खबरों में इन्हें विशेषज्ञता हासिल है. डिजिटल जर्नलिज्म में 10 साल का अनुभव है.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Powered by Nyaya 247 News

संबंधित ख़बरें

इसी विषय की और ख़बरें →
लोक अदालत को लेकर हुई बैठक - Sheikhpura News
वकील

लोक अदालत को लेकर हुई बैठक - Sheikhpura News

राष्ट्रीय लोक अदालत में केसों के निष्पादन पर जोर - Darbhanga News
वकील

राष्ट्रीय लोक अदालत में केसों के निष्पादन पर जोर - Darbhanga News

लोक अदालत को लेकर की बैठक - Munger News
वकील

लोक अदालत को लेकर की बैठक - Munger News

पानीपत के रीपक कंसल बने सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के कोषाध्यक्ष, कोविड मुआवजा समेत कई याचिकाओं से रहे चर्चित

 - ripak kansal of panipat became the treasurer of the supreme court bar association and has been prominent in several petitions including those for covid compensation
वकील

पानीपत के रीपक कंसल बने सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के कोषाध्यक्ष, कोविड मुआवजा समेत कई याचिकाओं से रहे चर्चित - ripak kansal of panipat became the treasurer of the supreme court bar association and has been prominent in several petitions including those for covid compensation

सुप्रीम कोर्ट ने यमुना नदी के मैदान को हुए नुकसान के लिए 'आर्ट ऑफ लिविंग' को जिम्मेदार ठहराने वाले एनजीटी के आदेश को खारिज कर दिया; 5 करोड़ रुपए रिफंड का निर्देश दिया
वकील

सुप्रीम कोर्ट ने यमुना नदी के मैदान को हुए नुकसान के लिए 'आर्ट ऑफ लिविंग' को जिम्मेदार ठहराने वाले एनजीटी के आदेश को खारिज कर दिया; 5 करोड़ रुपए रिफंड का निर्देश दिया

न्यायमूर्ति संजय करोल ने पद छोड़ते हुए कहा, न्यायाधीश भगवान नहीं हैं, वे हर फैसले को सही नहीं देंगे - द ट्रिब्यून
वकील

न्यायमूर्ति संजय करोल ने पद छोड़ते हुए कहा, न्यायाधीश भगवान नहीं हैं, वे हर फैसले को सही नहीं देंगे - द ट्रिब्यून

लोक अदालत और मध्यस्थता: त्वरित समाधान का मार्ग
वकील

लोक अदालत और मध्यस्थता: त्वरित समाधान का मार्ग

राष्ट्रीय लोक अदालत की तैयारी को लेकर बैठक
वकील

राष्ट्रीय लोक अदालत की तैयारी को लेकर बैठक

ताज़ा ख़बरें