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वीरता पुरस्कार विवाद: सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को फटकारा

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के आदेश का पालन करने का निर्देश दिया है, जिसमें एक पूर्व पुलिस अधिकारी को 'राष्ट्रपति वीरता पुरस्कार' देने का निर्देश दिया गया था। केंद्र को 29 जुलाई तक आदेश का पालन करने का समय दिया गया है।

20 जुलाई 2026 को 07:14 pm बजे
वीरता पुरस्कार विवाद: सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को फटकारा

सौजन्य से:- हिंदुस्तान

वीरता पदक मामले में केंद्र के रुख पर सुप्रीम कोर्ट नाराज

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार की नाराजगी जताई है कि उसने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के एक आदेश का पालन नहीं किया, जिसमें एक पूर्व पुलिस अधिकारी को 'राष्ट्रपति वीरता पुरस्कार' देने का निर्देश दिया गया था। न्यायालय ने केंद्र को 29 जुलाई तक आदेश का पालन करने का समय दिया है।

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को केंद्र सरकार द्वारा मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के एक आदेश का पालन न करने पर नाराजगी जताई। हाईकोर्ट ने एक पूर्व पुलिस अधिकारी को प्रतिष्ठित ‘राष्ट्रपति वीरता पुरस्कार’ देने को कहा था। अधिकारी ने दो दशक से पहले एक ऑपरेशन के दौरान दो डकैतों को ढेर किया था। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति संदीप मेहता और न्यायमूर्ति आर. महादेवन की पीठ ने केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन की अर्जी पर सुनवाई करते हुए केंद्र को 29 जुलाई तक का समय दिया कि वह पुलिस अधिकारी विवेक सिंह चौहान को पुरस्कार देने के हाईकोर्ट के आदेश का पालन करे।

केंद्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पीठ को बताया कि सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के 25 मार्च के आदेश के खिलाफ समीक्षा याचिका दायर की है, जिसमें हाईकोर्ट के निर्देश को सही ठहराया गया था। मेहता ने कहा कि हमने समीक्षा याचिका दायर की है। यह सैद्धांतिक आपत्ति है, न कि अधिकारी के खिलाफ। मेहता ने तर्क दिया कि अगर समीक्षा याचिका सफल होती है, तो पुरस्कार वापस लिया जा सकता है और यह मामला किसी व्यक्ति के बजाय सिद्धांत का ज्यादा है। मेहता ने तर्क दिया कि सम्मान दिए जाते हैं, न कि न्यायिक निर्देशों के जरिए उनकी मांग की जाती है। जस्टिस नाथ ने जवाब दिया कि कोर्ट को पता है कि ‘मैन्डमस’(अदालती आदेश) कहां जारी करना है और कहां नहीं। उन्होंने यह भी कहा कि हाईकोर्ट ने ऐसा निर्देश जरूर किसी मज़बूत वजह से ही दिया होगा। पीठ ने सॉलिसिटर जनरल से कहा कि कृपया सरकार को बता दें कि कोर्ट इस बात से खुश नहीं था। कोर्ट ने मामले को 29 जुलाई को सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया और यह भी साफ कर दिया कि अब और समय नहीं दिया जाएगा।

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न्याय 247 न्यूज़ द्वारा प्रस्तुत

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