सुप्रीम कोर्ट ने कहा: बस कंडक्टर से राज्य सचिव तक, हर नागरिक को न्याय की समान पहुंच
सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व न्यायिक अधिकारी की याचिका पर सुनवाई से इनकार करते हुए कहा कि न्याय तक पहुँच सभी के लिए समान है, चाहे उनका पद कुछ भी हो। कोर्ट ने उन्हें हाई कोर्ट में ही अपना अनुरोध रखने का निर्देश दिया और यह बताया कि किसी को विशेष प्राथमिकता देना बाकी मामलों के लिए अनुचित होगा।

सौजन्य से:- Navbharat Times
सुप्रीम कोर्ट ने एक याचिका को सुनने से इनकार करते हुए कहा कि चाहे कोई बस कंडक्टर हो या राज्य का सचिव हर व्यक्ति को न्याय तक पहुंच का समान अधिकार है।
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने उच्चतम न्यायालय ने गुरुवार को एक पूर्व न्यायिक अधिकारी की याचिका पर विचार करने से इनकार करते हुए कहा कि हर व्यक्ति को न्याय तक पहुंच का समान अधिकार है। पूर्व न्यायिक अधिकारी ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के समक्ष लंबित उनकी याचिका पर जल्द सुनवाई का अनुरोध किया था।
जल्द सुनवाई के लिए दी थी अर्जी
न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील से कहा कि चाहे कोई बस कंडक्टर हो या राज्य का सचिव, हर व्यक्ति को न्याय तक पहुंच का समान अधिकार है। पूर्व न्यायिक अधिकारी ने अपनी सेवा समाप्त किए जाने को उच्च न्यायालय में चुनौती दी है।
बोझ के कारण नहीं हो पाया फैसला
शीर्ष अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता को उच्च न्यायालय का रुख कर वहां अनुरोध करना चाहिए। याचिकाकर्ता के वकील ने पीठ को बताया कि उच्च न्यायालय में मामलों के भारी बोझ के कारण उनकी याचिका पर फैसला नहीं हो पाया है।
हाई कोर्ट से कहना होगी नाइंसाफी
पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता की याचिका को प्राथमिकता देने के लिए उच्च न्यायालय से कहना उन अन्य वादियों के साथ अनुचित होगा, जो अपनी याचिकाओं पर सुनवाई के लिए अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं।
लेखक के बारे मेंअक्षय श्रीवास्तवअक्षय श्रीवास्तव, नवभारत टाइम्स (डिजिटल) में प्रिंसिपल डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर हैं। मार्च 2025 में उन्होंने टाइम्स समूह का डिजिटल विंग नवभारत टाइम्स (NBT Digital) ज्वाइन किया। यहां अक्षय न्यूज टीम का हिस्सा हैं और राष्ट्रीय खबरों के साथ-साथ दिल्ली और अपराध से जुड़े समाचारों का संपादन और क्यूरेशन करते हैं। समय-समय पर वह फील्ड रिपोर्टिंग में भी उतरते हैं। अक्षय ग्राउंड पर जाकर खबरों के पीछे छिपी कहानी को निकालने में रुचि रखते हैं। अपने 13 साल के पत्रकारिता के अनुभव में अक्षय ने रिपोर्टिंग के साथ-साथ डेस्क पर भी कई जिम्मेदारियां संभाली हैं। अक्षय ने साल 2019 और 2024 की राजनीति के निर्णायक लोकसभा चुनाव भी कवर किए हैं।
करियर के दौरान अक्षय ने प्रिंट मीडिया में एक लंबी पारी खत्म कर साल 2018 में डिजिटल मीडिया में कदम रखा। यहां उन्होंने डिजिटल पत्रकारिता का शुरुआती काम सीखा। इसके बाद वह दैनिक भास्कर के डिजिटल सेक्शन में काम करने लगे। यहां उन्होंने जीके सेक्शन की जिम्मेदारी संभाली। आज तक में कार्य के दौरान अक्षय ने कनमैलियों पर एक एक्सक्लूसिव स्टोरी की, जो चर्चा का विषय रही। नवभारत टाइम्स में वह कफ सिरप पीकर अपने बच्चे गंवाने वाले परिवारों तक पहुंचे और उनका दर्द जाना।
पत्रकारिता का अनुभव
अक्षय का पत्रकारिता करियर हिंदी अखबार दैनिक नव भारत भोपाल के साथ साल 2013 में बतौर ट्रेनी शुरू हुआ। इसके बाद उन्होंने मध्य प्रदेश से प्रकाशित राज एक्सप्रेस न्यूज पेपर में 2014 से 2016 तक उप-संपादक के रूप में कार्य किया। 2016 से 2018 तक अक्षय ने दैनिक हरिभूमि समाचार पत्र में बतौर उप-संपादक काम किया। साल 2018 में दैनिक भास्कर के साथ उन्होंने डिजिटल मीडिया में कदम रखा। इसके बाद जनवरी 2022 में AajTak डिजिटल के साथ जुड़े और मार्च 2015 तक होम पेज पर अपनी सेवाएं दीं।
अक्षय ने एशिया के पहले पत्रकारिता विश्वविद्यालय माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से बीएससी (इलेक्ट्रॉनिक मीडिया) और एमएससी (इलेक्ट्रॉनिक मीडिया) की पढ़ाई की है। विश्वविद्यालय में अध्ययन के दौरान वह कई प्रतियोगताओं में भाग लेकर उत्कृष्ट प्रदर्शन कर चुके हैं।... और पढ़ें
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