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अयोध्या सांसद ने सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग, ट्रस्ट भंग करने की भी उठाई आवाज

अयोध्या सांसद ने सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग, ट्रस्ट भंग करने की भी उठाई आवाज अयोध्या में राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण को लेकर सांसद अवधेश प्रसाद ने कहा है कि राम मंदिर ट्रस्ट की पारदर्शिता पर सवाल उठते हैं। उन्…

Hindustan Hindi News के अनुसार15 जून 2026 को 12:27 am बजे
अयोध्या सांसद ने सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग, ट्रस्ट भंग करने की भी उठाई आवाज

सौजन्य से:- Hindustan Hindi News

अयोध्या सांसद ने सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग, ट्रस्ट भंग करने की भी उठाई आवाज

अयोध्या में राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण को लेकर सांसद अवधेश प्रसाद ने कहा है कि राम मंदिर ट्रस्ट की पारदर्शिता पर सवाल उठते हैं। उन्होंने एसआईटी की जांच पर असंतोष व्यक्त किया और सुप्रीम कोर्ट के अधीन स्वतंत्र समिति से जांच की मांग की, ताकि सभी दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो सके।

अयोध्या, संवाददाता। राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण को लेकर राजनीति तेज हो गई है।

राजनीति तेज़

अयोध्या से सांसद अवधेश प्रसाद ने रविवार को प्रेस वार्ता कर राम मंदिर ट्रस्ट को कटघरे में खड़ा किया और मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट के निर्देशन में गठित स्वतंत्र समिति से कराने की मांग की। सांसद ने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा गठित एसआईटी पर उन्हें भरोसा नहीं है। उनका कहना था कि निष्पक्ष और पारदर्शी जांच सुनिश्चित करने के लिए पहले राम मंदिर ट्रस्ट को भंग किया जाना चाहिए तथा सभी जिम्मेदार पदाधिकारियों को उनके पदों से हटाया जाना चाहिए।

जांच की मांग

अवधेश प्रसाद ने आरोप लगाया कि ट्रस्ट के पदाधिकारियों के पद पर बने रहने से जांच प्रभावित हो सकती है। उन्होंने कहा कि जांच के आधार पर किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाना चाहिए और सभी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।

आरोपो का श्रेय

सपा सांसद ने इस मामले को सार्वजनिक करने का श्रेय सपा प्रमुख अखिलेश यादव को दिया। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर इस प्रकरण को उठाया और इसकी जांच की मांग की।

आस्था का मुद्दा

प्रेस वार्ता के दौरान अवधेश प्रसाद ने कहा कि यह केवल ट्रस्ट या प्रदेश का मामला नहीं है, बल्कि भगवान राम और देशभर के करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा विषय है। उन्होंने दावा किया कि चढ़ावे की रकम को गोबर और घूर गड्ढों में छिपाए जाने जैसी सूचनाएं भी सामने आ रही हैं। उन्होंने दोहराया कि सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच होने पर ही पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सकेगी।

स्वतंत्र पुष्टि का इंतजार

हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है और संबंधित पक्षों की ओर से इस पर आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है।

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