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मुंबई में बाढ़ का कारण खुद हम हैं, बॉम्बे हाई कोर्ट ने लगाया नागरिकों को आरोप

बॉम्बे हाई कोर्ट ने कहा है कि मुंबई में बाढ़ और जलभराव के लिए सिर्फ बीएमसी को दोष देना बंद करना चाहिए, क्योंकि अतिक्रमण, जाम नालियां और पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर का गलत इस्तेमाल हमारी अपनी देन है।

7 जुलाई 2026 को 11:58 am बजे
मुंबई में बाढ़ का कारण खुद हम हैं, बॉम्बे हाई कोर्ट ने लगाया नागरिकों को आरोप

सौजन्य से:- Jansatta

Bombay High Court News: बॉम्बे हाई कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि लोगों को मुंबई में मॉनसून के दौरान बार-बार होने वाले जलभराव के लिए सिर्फ बीएमसी को दोष देना बंद करना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि अतिक्रमण, जाम नालियां और पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के गलत इस्तेमाल हमारी अपनी ही देन है।

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रविंद्र वी घुगे और न्यायमूर्ति गौतम अंखड़ की पीठ ने डिपार्टमेंट ऑफ एटॉमिक एनर्जी को भी नोटिस जारी किया। यह नोटिस बीएमसी की उस याचिका पर दायर किया गया है जिसमें सियोन-ट्रॉम्बे स्ट्रेच पर मंडला गांव में सड़क चौड़ी करने के लिए जमीन मांगी गई थी। बीएमसी ने कहा था कि उसने अपने हिस्से से अतिक्रमण हटा दिया है और बाकी जमीन डीएई की है।

सड़कों पर बारिश का पानी देखना हमारी नियति- जस्टिस घुगे

जस्टिस घुगे ने कहा, “मुंबई की सड़कों पर बारिश का पानी देखना हमारी नियति है। हम इसमें कुछ नहीं कर सकते।” एसीजे घुगे ने यह भी कहा कि हम जमीन हड़पने में माहिर हैं। जस्टिस घुगे ने कहा, “जमीन हड़पने में हम माहिर हैं। हम सारी मिट्टी और सामग्री उसमें भर देते हैं, नालियां बंद कर देते हैं। हम फुटपाथ पर ब्लॉक लगा देते हैं। जन प्रतिनिधियों द्वारा इनका उद्घाटन किया जाता है और फिर ये पार्किंग स्थल बन जाते हैं। मुंबई में हल्की सी बारिश से सड़कें जाम हो जाती हैं। ये सब हमारी ही करतूत है।”

जस्टिस ने कहा, “हमें नगर निगम को दोष देना बंद कर देना चाहिए। नगर निगम ने हमें नालियां दीं। हमने उन्हें भर दिया। उन्होंने फुटपाथ पर ईंटें लगा दीं। हमने उन पर अपनी गाड़ियां खड़ी करना शुरू कर दिया। नगर निगम ने हमें फुटपाथ दिए, हमने उन पर पाव भाजी, पाव मसाला, साबूदाना वड़ा के स्टॉल लगा लिए।”

हमारी आदत अपनी ही मातृभूमि को लूटने की है- न्यायाधीश

न्यायाधीश ने आगे कहा कि बॉम्बे हाई कोर्ट के पूर्वी हिस्से के बाहर फुटपाथों पर फोटोकॉपी मशीन की दुकानें, चाय की दुकानें और संतरे के जूस के विक्रेता भी मौजूद थे। जस्टिस घुगे ने कहा, “आप चल नहीं सकते। निगम क्या करेगा? हमारी आदत अपनी ही मातृभूमि को लूटने की है। इसलिए हम जमीन हड़प लेते हैं और फिर अपनी दुकानें खड़ी कर लेते हैं और यह सब अवैध रूप से करते हैं।”

न्यायमूर्ति घुगे ने उन लोगों के प्रति भी नाराजगी व्यक्त की जो तोड़फोड़ के नोटिस का सामना करने के बाद ही कानून का सहारा लेते हैं। उन्होंने कहा, “जब नगर निगम तोड़फोड़ के लिए आता है, तो आप कहते हैं ‘मुझे सात दिन का नोटिस दीजिए’। फिर अचानक कानून की किताबें खुल जाती हैं और आप कानून पढ़ना शुरू कर देते हैं। लेकिन जब जमीन पर कब्जा कर लिया जाता है, तो कोई कानून नहीं पढ़ता। मुंबई में यही हाल है। सड़कों पर पानी भरा होना और हर जगह जाम लगना हमारी मजबूरी है। हम कुछ नहीं कर सकते।”

बीएमसी का जवाब

पिछले महीने बॉम्बे हाई कोर्ट ने कहा था कि वह बीएमसी कमिश्नर के जवाब पर विचार करने के बाद यह तय करेगा कि नगर निकाय के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू की जानी चाहिए या नहीं। मंगलवार को, बीएमसी का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ वकील मिलिंद साठे ने कहा कि नगर निकाय ने मौजूदा 30 फीट चौड़ी सड़क के लिए अतिक्रमण हटा दिया था, जिसके लिए लगभग 192 पेड़ भी काटे गए थे।

हालांकि, उन्होंने कहा कि सड़क को 50 फीट तक चौड़ा करने के लिए जरूरी बची हुई जमीन डीएई के पास है, जो संबंधित सड़क के आसपास स्थित भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र की देखरेख करता है। साठे ने आगे कहा कि अगर बीएआरसी को 50 फीट चौड़ी सड़क चाहिए, तो नगर निगम इसे बनाने के लिए तैयार है, हालांकि, इसके लिए उसे 30 से 50 फीट के बीच अतिक्रमण मुक्त भूमि उपलब्ध करानी होगी। उन्होंने कहा, “ऐसा लगता है कि बीएआरसी सड़क को चौड़ा नहीं करवाना चाहता।”

नगर निगम की बात सुनने के बाद हाई कोर्ट ने टिप्पणी की कि डीएई को मौजूदा सड़क को 20 फीट और चौड़ा करने के लिए भूमि उपलब्ध कराने पर निर्णय लेने की आवश्यकता है।” नगर निकाय के अंतरिम आवेदन पर डीएई को नोटिस जारी करते हुए, बॉम्बे उच्च न्यायालय ने मामले की सुनवाई इस महीने के अंत में स्थगित कर दी।

यह भी पढ़ें: ‘क्या लोगों को भारत सरकार का गुलाम बनाया जा रहा, कोई विरोध भी नहीं कर सकता?’, हाई कोर्ट ने लगाई पुलिस की जमकर क्लास

बॉम्बे हाई कोर्ट ने गुरुवार को एक मामले की सुनवाई के दौरान सरकार के पक्ष लेने पर पुलिस को कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने कहा कि किसी नागरिक की ओर से केंद्र सरकार के कुछ फैसलों का विरोध करने और उसके खिलाफ नारे लगाने मात्र से उसे किसी भी क्षेत्र से निष्कासित नहीं किया जा सकता। यहां क्लिक कर पढ़ें पूरी खबर…

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