दिल्ली उच्च न्यायालय का आदेश: प्राथमिकी की प्रति देने में मजिस्ट्रेट अदालत की लापरवाही पर नाराजगी
दिल्ली उच्च न्यायालय ने एक परित्यक्ता पत्नी को प्राथमिकी की कॉपी न देने पर मजिस्ट्रेट अदालत की कार्यशैली पर नाराजगी जताई है, अदालत ने कहा कि सूचक को एफआईआर की कॉपी देना कानूनी दायित्व है. उच्च न्यायालय ने मजिस्ट्रेट अदालतों को कानून का पालन करने का निर्देश दिया है.

सौजन्य से:- Amar Ujala
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Delhi NCR News: एफआईआर की कॉपी देने से किया मना, अदालत बोली- कानून का पालन करें मजिस्ट्रेट
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने एक परित्यक्ता पत्नी को प्राथमिकी की कॉपी न देने पर मजिस्ट्रेट अदालत की कार्यशैली पर नाराजगी जताई है। अदालत ने कहा कि सूचक को एफआईआर की कॉपी देना कानूनी दायित्व है। न्यायमूर्ति मनोज जैन ने दो जुलाई को सुनवाई के दौरान कहा कि मजिस्ट्रेट अदालतें बीएनएसएस की धारा 173(2) का पालन करें।
मामला एक परित्यक्ता महिला का था, जिसने जांच की निगरानी के लिए मजिस्ट्रेट अदालत में अर्जी दी थी। उसने कहा कि उसे अब तक एफआईआर की कॉपी नहीं मिली है। मजिस्ट्रेट अदालत ने सुनवाई तो की लेकिन प्राथमिकी की कॉपी देने से इनकार कर दिया। अदालत ने टिप्पणी की कि याचिकाकर्ता को एफआईआर की कॉपी साथ लगाकर अर्जी देनी चाहिए थी।
सुनवाई के दौरा राज्य की ओर से अतिरिक्त स्थायी वकील यासिर रऊफ अंसारी ने अदालत में प्राथमिकी की अतिरिक्त कॉपी उपलब्ध करा दी है।
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नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने एक परित्यक्ता पत्नी को प्राथमिकी की कॉपी न देने पर मजिस्ट्रेट अदालत की कार्यशैली पर नाराजगी जताई है। अदालत ने कहा कि सूचक को एफआईआर की कॉपी देना कानूनी दायित्व है। न्यायमूर्ति मनोज जैन ने दो जुलाई को सुनवाई के दौरान कहा कि मजिस्ट्रेट अदालतें बीएनएसएस की धारा 173(2) का पालन करें।
मामला एक परित्यक्ता महिला का था, जिसने जांच की निगरानी के लिए मजिस्ट्रेट अदालत में अर्जी दी थी। उसने कहा कि उसे अब तक एफआईआर की कॉपी नहीं मिली है। मजिस्ट्रेट अदालत ने सुनवाई तो की लेकिन प्राथमिकी की कॉपी देने से इनकार कर दिया। अदालत ने टिप्पणी की कि याचिकाकर्ता को एफआईआर की कॉपी साथ लगाकर अर्जी देनी चाहिए थी।
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सुनवाई के दौरा राज्य की ओर से अतिरिक्त स्थायी वकील यासिर रऊफ अंसारी ने अदालत में प्राथमिकी की अतिरिक्त कॉपी उपलब्ध करा दी है।
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