भारत-रूस सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक सहयोग: न्यायिक सहयोग के लिए समझौता हस्ताक्षर
भारत और रूस के सुप्रीम कोर्ट ने न्यायिक सहयोग के क्षेत्र में एक सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं। यह समझौता दोनों देशों की न्यायपालिका के बीच सहयोग को बढ़ावा देगा।

सौजन्य से:- Jagran
भारत और रूस के सुप्रीम कोर्ट करेंगे सहयोग, एमओयू पर हस्ताक्षर
भारत और रूस के सुप्रीम कोर्ट ने न्यायिक सहयोग के लिए एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। यह समझौता न्यायिक शिक्षा, डिजिटल बदलाव और तकनीकी स ...और पढ़ें
HighLights
- भारत-रूस सुप्रीम कोर्ट ने न्यायिक सहयोग एमओयू पर हस्ताक्षर किए।
- न्यायिक शिक्षा, डिजिटल बदलाव और तकनीकी सहयोग पर जोर।
- दोनों देशों की न्यायपालिका के लिए संयुक्त कार्यदल बनेगा।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भारत और रूस के सुप्रीम कोर्ट ने न्यायिक सहयोग के क्षेत्र में एक सहमति पत्र पर (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस पर मंगलवार को भारत के प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और रूस के प्रधान न्यायाधीश जस्टिस इगोर क्रास्नोव ने हस्ताक्षर किए।
सुप्रीम कोर्ट के एक प्रतिनिधिमंडल के साथ जस्टिस सूर्यकांत ने रूसी प्रधान न्यायाधीश से मुलाकात की। एक बयान के अनुसार, यह बैठक दोनों देशों के ऐतिहासिक और सामयिक रिश्तों पर जोर देते हुए शुरू हुई।
बातचीत में उभरती चुनौतियों से निपटने के लिए आपसी सहयोग की जरूरत, दोनों देशों की न्यायपालिका द्वारा किए गए डिजिटल बदलाव (न्याय प्रणाली को बेहतर बनाने व न्याय तक पहुंच को आसान बनाने के लिए तकनीक व एआई को शामिल करना) और उच्च गुणवत्ता वाली न्यायिक शिक्षा का महत्व शामिल था।
विस्तृत बातचीत के बाद हस्ताक्षरित एमओयू में सीखने के मकसद से यात्राएं, अल्पकालिक व दीर्घकालिक प्रशिक्षण कार्यक्रम और संयुक्त संगोष्ठियों व सम्मेलनों के जरिये सहयोग की प्रतिबद्धता जताई गई। साथ ही दोनों देशों की न्यायपालिका तकनीकी सहयोग और गहरे संस्थागत जुड़ाव के लिए एक संयुक्त कार्यदल भी बनाएंगे।
(समाचार एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)
Powered by Nyaya 247 News
संबंधित ख़बरें
इसी विषय की और ख़बरें →
मेरठ आवास एवं विकास परिषद ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत 108 नई दुकानों का निर्माण शुरू किया

सुप्रीम कोर्ट का फैसला: क्या महिलाएं सुरक्षा के लिए हथियार रख सकती हैं?

सुप्रीम कोर्ट ने दी चेतावनी: ‘अधिकारियों को महाशक्तिशाली CEC से निष्क्रिय बना दें’

सुप्रीम कोर्ट ने आईसीयू स्टाफ की भर्ती को 6 महीनों, बुनियादी ढांचा 9 महीनों में पूरा करने का आदेश दिया

सुप्रीम कोर्ट ने मेरठ के अवैध रिहायशी‑व्यावसायिक निर्माणों पर विशेष आयोग स्थापित किया

क्या महिलाएं सुरक्षा के लिये हथियार रख सकती हैं? सुप्रीम कोर्ट का दृष्टिकोण

ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्तों की बैठक में मतदाता सूची एसआईआर पर ली गई मुख्य मंज़ूरियाँ

क्या महिलाएं अपनी सुरक्षा के लिए हथियार रख सकती हैं? सुप्रीम कोर्ट का दृष्टिकोण
ताज़ा ख़बरें
- महिलाओं के आत्मरक्षा अधिकार पर सुप्रीम कोर्ट की राय
- सुरक्षा के लिए हथियार रखने पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला
- सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने चार हाईकोर्ट के 12 अपर जजों को स्थायी पद पर रखने की सिफारिश की
- सुप्रीम कोर्ट के 13 सवालों पर FSSAI ने 43 पृष्ठों का विस्तृत हलफ़नामा पेश किया
- FSSAI ने 13 प्रश्नों के उत्तर में पेश किया 43‑पृष्ठीय हलफनामाः लाल चेतावनी लेबल का ढांचा और समय‑सीमा
- सुप्रीम कोर्ट ने निजी विश्वविद्यालयों को दिया कड़ाकेदार चेतावनी
- सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई से इनकार किया, सोशल मीडिया पर राष्ट्रविरोधी सामग्री हटाने के प्रस्ताव पर निर्णय टाला
- सुप्रीम कोर्ट ने निजी विश्वविद्यालयों को चेतावनी दी: शिक्षा से अधिक मुनाफे पर न ध्यान दें

