हलाला रेप में पॉक्सो कानून के खिलाफ मुस्लिम पर्सनल लॉ नहीं चलेगा: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने साफ कर दिया है कि अगर किसी नाबालिग लड़की के साथ निकाह हलाला के तहत यौन संबंध बनाए जाते हैं, तो भले ही वह उस व्यक्ति से दोबारा शादी करना चाहे जिसने उसे तलाक दिया था, पॉक्सो एक्ट के प्रावधान निश्चित रूप से लागू होंगे।

सौजन्य से:- Navbharat Times
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 'निकाह हलाला' के नाम पर बार-बार रेप के आरोप वाली एफआईआर को रद्द करने से इनकार कर दिया है। अदालत ने कहा है कि मुस्लिम पर्सनल लॉ पॉक्सो एक्ट से ऊपर नहीं है, इसलिए प्राथमिकी रद्द नहीं हो सकती।
राजेश कुमार पांडे, प्रयागराज: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक जुलाई को ' निकाह हलाला ' के नाम पर बार-बार रेप के आरोप वाली एफआईआर को रद्द करने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंसेस (POCSO) एक्ट पर्सनल लॉ से ऊपर है। कोर्ट ने कहा कि नाबालिग के खिलाफ यौन अपराधों को सही ठहराने के लिए पर्सनल लॉ का इस्तेमाल ढाल के तौर पर नहीं किया जा सकता।
क्या है निकाह हलाला?
निकाह हलाला एक इस्लामिक प्रथा है जिसके तहत तलाकशुदा महिला को अपने पहले पति से दोबारा शादी करने से पहले किसी अन्य पुरुष से शादी करनी होती है और उसके साथ शारीरिक संबंध बनाने होते हैं। यह एफआईआर अमरोहा जिले के सैदनगली पुलिस स्टेशन में बीएनएस के मुस्लिम महिला (विवाह पर अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम, 2019 और पॉक्सो एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज की गई थी।
डबल हलाला के दौरान गैंग रेप का आरोप
इस प्रथमिकी में पीड़ित महिला ने नौ लोगों पर आरोप लगाया गया था कि उन्होंने शिकायतकर्ता के नाबालिग होने पर 2016 में निकाह हलाला के दौरान उसके साथ रेप किया और 2025 में 'डबल' हलाला के दौरान उसके साथ गैंग-रेप किया।
जस्टिस जेजे मुनीर और तरुण सक्सेना की डिवीजन बेंच ने कहा कि अगर किसी नाबालिग लड़की के साथ निकाह हलाला के तहत यौन संबंध बनाए जाते हैं, तो भले ही वह उस व्यक्ति से दोबारा शादी करना चाहे जिसने उसे तलाक दिया था, पॉक्सो एक्ट के प्रावधान निश्चित रूप से लागू होंगे।
हलाला के एक वैध धार्मिक प्रथा होने का तर्क
याचिकाकर्ताओं के वकील ने तर्क दिया कि 2016 में शरिया कानून के तहत ट्रिपल तलाक को मान्यता प्राप्त थी और निकाह हलाला एक वैध धार्मिक प्रथा थी। वकील ने यह भी तर्क दिया कि मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत नाबालिग की शादी अमान्य नहीं बल्कि केवल रद्द करने योग्य थी, और महिला ने बालिग होने के एक साल के भीतर शादी को अस्वीकार नहीं किया था।
बीएनएस के तहत अपराध
विरोधी पक्ष के वकील ने कहा कि बीएनएस (भारतीय न्याय संहिता) के तहत अपराध माने जाने वाले कृत्यों को बचाने के लिए पर्सनल लॉ का सहारा नहीं लिया जा सकता। हाईकोर्ट ने 'इंडिपेंडेंट थॉट बनाम भारत संघ' मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि शीर्ष अदालत ने पॉक्सो एक्ट को प्राथमिकता दी है, जिससे 18 साल से कम उम्र की लड़की के साथ कानूनी यौन संबंधों की कोई गुंजाइश नहीं बचती। कोर्ट ने कहा कि इस सिद्धांत को बीएनएस में धारा 63 के अपवाद 2 के माध्यम से स्पष्ट रूप से शामिल किया गया है।
लेखक के बारे मेंसूर्यकांत पाठकसूर्यकांत पाठक, नवभारत टाइम्स (डिजिटल) में कंसल्टेंट हैं। वे जून 2025 से टाइम्स ऑफ इंडिया ग्रुप के नवभारत टाइम्स की डिजिटल विंग से जुड़े हैं। सूर्यकांत पाठक एनबीटी डिजिटल में बिहार डेस्क पर सेवाएं दे रहे हैं। सूर्यकांत समाचार विश्लेषण, संपादकीय लेखन, कला समीक्षा, नाट्य और संगीत समीक्षा, पर्यावरण से जुड़े मुद्दों, सामाजिक मुद्दों और राजनीतिक मुद्दों पर धारदार कलम चलाते हैं। वे 31 साल से पत्रकारिता कर रहें हैं। इस लंबी अवधि में उन्होंने कई वर्षों तक अलग-अलग माध्यमों के लिए रिपोर्टिंग की है। कई लोकसभा चुनावों के अलावा मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, जम्मू-कश्मीर के विधानसभा चुनावों को कवर किया है। कई बड़े सांस्कृतिक, साहित्यिक आयोजनों को भी कवर किया है। उन्होंने कई दिग्गज कलाकारों, राजनीतिज्ञों, साहित्यकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के साक्षात्कार किए हैं।
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पत्रकारिता अनुभव
सूर्यकांत पाठक ने पत्रकारिता के करियर की शुरुआत ऑल इंडिया रेडियो- सागर में कैजुअल एनाउंसर/कंपेयर के रूप में सन 1993 में की थी। सन 1995 में दैनिक समाचार पत्र दैनिक भास्कर के सागर ब्यूरो में रिपोर्टर नियुक्त हुए। बाद में भोपाल में भी इसी पद पर काम किया। सन 1997 में प्रतिष्ठित हिंदी दैनिक नईदुनिया के इंदौर संस्करण में रिपोर्टर/सब एडिटर का दायित्व संभाला। इसके बाद सन 2003 में अमर उजाला- जम्मू में सीनियर रिपोर्टर नियुक्त हुए। सन 2005 में उन्होंने ईटीवी ज्वाइन किया और उन्हें जबलपुर में पूर्वी मध्य प्रदेश के ब्यूरो चीफ का जिम्मा दिया गया।
सन 2006 में दैनिक भास्कर-भोपाल में न्यूज एडिटर के रूप में फिर से प्रिंट मीडिया में काम शुरू किया। सन 2009 में पीपुल्स समाचार - भोपाल में न्यूज एडिटर के रूप में ज्वाइन किया। इसके बाद उन्होंने सन 2010 में लोकमत समाचार-औरंगाबाद (महाराष्ट्र) में न्यूज एडिटर का जिम्मा संभाला। उन्होंने जुलाई 2015 में एनडीटीवी इंडिया (डिजिटल)-नई दिल्ली में न्यूज एडिटर के रूप में ज्वाइन किया और 2017 में डिप्टी एडिटर बने। जनवरी 2025 में वे एनडीटीवी में सेवानिवृत्त हुए।
सूर्यकांत पाठक ने डॉ हरिसिंह गौर सेंट्रल यूनिवर्सिटी, सागर से बीए, एमए -परफॉर्मिंग आर्ट (थिएटर), बीसीजे और एसजेसी की डिग्रियां ली हैं। इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय, खैरागढ़ (छत्तीसगढ़) से हिंदुस्तानी शास्त्रीय गायन में डिप्लोमा किया है। उन्होंने भारत भवन- भोपाल पर रिसर्च की है। उन्होंने'बच्चों पर केबिल टेलिविजन का असर' विषय पर लघु शोध किया है। इंदौर की गंदी बस्तियों में लोगों के जीवन स्तर पर एक वृहत सर्वे किया है।
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