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दिल्ली में बेड एंड ब्रेकफास्ट कानून होगा समाप्त, 750 प्रतिष्ठानों को मिली राहत

दिल्ली पर्यटन मंत्री कपिल मिश्रा ने विधानसभा में बेड एंड ब्रेकफास्ट कानून को रद्द करने के लिए एक बिल पेश किया। यह निर्णय मालवीय नगर में हुई आग की घटना के बाद लिया गया है। दिल्ली में पहले से चल रहे 750 प्रतिष्ठानों पर इसका असर नहीं पड़ेगा।

8 अगस्त 2026 को 04:15 am बजे
दिल्ली में बेड एंड ब्रेकफास्ट कानून होगा समाप्त, 750 प्रतिष्ठानों को मिली राहत

सौजन्य से:- नवभारत टाइम्स

दिल्ली के पर्यटन मंत्री कपिल मिश्रा ने शुक्रवार को विधानसभा के मॉनसून सत्र के दौरान मौजूदा 'बेड एंड ब्रेकफास्ट एस्टेब्लिशमेंट्स (रजिस्ट्रेशन एंड रेगुलेशन) एक्ट, 2007 को रद्द करने के लिए एक बिल पेश किया। यह कानून जून में मालवीय नगर में हुई उस आग की घटना के बाद लाया गया है, जिसमें एक 'बेड एंड ब्रेकफास्ट' सुविधा केंद्र जलकर खाक हो गया था और 11 विदेशी नागरिकों समेत 21 लोगों की जान चली गई थी।

नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली की रेखा गुप्ता सरकार ने 17 साल पुराने बेड एंड ब्रेकफास्ट (बी.&बी.) कानून को खत्म कर रही है। दिल्ली विधानसभा में शुक्रवार को पर्यटन मंत्री कपिल मिश्रा ने इसे लेकर दिल्ली बेड एंड ब्रेकफास्ट एस्टेब्लिशमेंट्स (रिपील) बिल 2026 पेश किया। इस विधेयक के जरिए बेड एंड ब्रेकफास्ट कानून और उसके 2010 व 2021 के संशोधनों को निरस्त किया जाएगा। सरकार का कहना है कि मौजूदा कानून की जगह जल्द ही अधिक सरल और व्यावहारिक नीति लागू की जाएगी। बता दें कि यह एक्शन मालवीय नगर में हुई उस आग की घटना के बाद लिया गया है।

बेड एंड ब्रेकफास्ट कानून खत्म होने के बाद क्या होगा

सदन में पेश विधेयक के अनुसार, नई नीति लागू होने तक बेड एंड ब्रेकफास्ट प्रतिष्ठानों के नए रजिस्ट्रेशन नहीं होंगे और मौजूदा लंबित आवेदनों की प्रक्रिया फिलहाल स्थगित रहेगी। हालांकि, दिल्ली में पहले से बेड एंड ब्रेकफास्ट योजना के तहत चल रहे 750 प्रतिष्ठानों पर इसका असर नहीं पड़ेगा। यानी जब तक उनके लाइसेंस की अवधि खत्म नहीं होती, तब तक वे चलते रहेंगे।

हालांकि, नियमों का उल्लंघन होने पर उनके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि कानून खत्म होने का मतलब यह नहीं होगा कि इस क्षेत्र में सभी नियम समाप्त हो जाएंगे। आग से सुरक्षा, सार्वजनिक स्वास्थ्य, नगर निगम के नियम और कानून-व्यवस्था से जुड़े सभी प्रावधान पहले की तरह लागू रहेंगे।

क्या है बेड एंड ब्रेकफास्ट कानून

बेड एंड ब्रेकफास्ट कानून दिल्ली में साल 2007 में पर्यटन को बढ़ावा देने और खास कर के 2010 के राष्ट्रमंडल खेलों के दौरान होटल के कमरों की कमी को पूरा करने के लिए शुरू की गई थी। इस योजना के तह घर को ही होमस्टे बनाने की योजना थी। इसमें कम से कम 1 और अधिकतम 6 कमरे किराए पर दिए जा सकते थे।

लेखक के बारे मेंसंजीव कुमारसंजीव कुमार (सीनियर डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर)

संजीव कुमार वर्तमान में नवभारत टाइम्स में सीनियर डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर के पद पर कार्यरत हैं। वे मई 2025 में टाइम्स ऑफ इंडिया ग्रुप के नवभारत टाइम्स, डिजिटल विंग से जुड़े। पत्रकारिता में ऑनलाइन न्यूज डेस्क पर उन्हें काम करने का 6 साल का अनुभव है। नवभारत टाइम्स में जुड़ने से पहले वह अमर उजाला, वन इंडिया हिंदी और दैनिक जागरण के डिजिटल विंग में सेवा दे चुके हैं। वह वर्तमान में नवभारत टाइम्स में नेशनल और दिल्ली डेस्क से जुड़ी खबरों को कवर करते हैं। खबरों की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए स्रोतों की जांच के साथ तथ्यों की पुष्टि अनिवार्य रूप से करते हैं।

विशेषज्ञता

संजीव कुमार खास तौर पर मौसम की खबर, नेशनल और राजनीति की खबर, ब्रेकिंग न्यूज, रियल टाइम खबरें, एक्सप्लेनर और रिसर्च आधारित खबरें करते हैं। इसके अलावा वह हर तरह के इवेंट का पल-पल का लाइव कवरेज भी करते हैं।

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संजीव कुमार ने पत्रकारिता में स्नातक और मास्टर की डिग्री हासिल करने के बाद अमर उजाला जैसे प्रतिष्ठित संस्थान में पत्रकारिता का शुरुआती ज्ञान लिया, यहां उन्होंने हेडलाइन, ब्रेकिंग न्यूज, लाइव कवरेज, स्पेशल खबरों को यूजर के इंटरेस्ट के अनुसार बनाने के तरीके को बारीकी से समझा। इसके बाद उन्होंने वन इंडिया हिंदी में नेशनल डेस्क पर काम किया। फिर दैनिक जागरण में बिहार-झारखंड की लोकल खबरों पर 1 साल 6 महीने तक काम किया है। इसके बाद नवभारत टाइम्स में पारी की शुरुआत की।

शिक्षा/पुरस्कार

मूल रूप से बिहार के बेगूसराय के रहने वाले संजीव कुमार ने वेस्ट बंगाल यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी से बैचेलर इन मीडिया साइंस में स्नातक किया। फिर आईसीएफएआई यूनिवर्सिटी से मास्टर इन मीडिया बिजनेस मैनेजमेंट की भी डिग्री ली। इसके अलावा उन्होंने मीडिया से संबंधित कई ऑनलाइन कोर्स भी किए हैं।... और पढ़ें

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न्याय 247 न्यूज़ द्वारा प्रस्तुत

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