होमकानूनPM मोदी अपने ही नागरिकों से लड़ रहे हैं, खुद को बचाने के लिए बना रहे हैं कानून: अरविंद केजरीवाल
कानून

PM मोदी अपने ही नागरिकों से लड़ रहे हैं, खुद को बचाने के लिए बना रहे हैं कानून: अरविंद केजरीवाल

दिल्ली के पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर आरोप लगाया कि वे अपने ही नागरिकों से लड़ रहे हैं और खुद को बचाने के लिए कानून बना रहे हैं। केजरीवाल ने दावा किया कि पेपर लीक और E20 फ्यूल जैसे मुद्दों पर मोदी के पुराने समर्थक भी अब उनके खिलाफ हो रहे हैं।

7 अगस्त 2026 को 09:15 am बजे
PM मोदी अपने ही नागरिकों से लड़ रहे हैं, खुद को बचाने के लिए बना रहे हैं कानून: अरविंद केजरीवाल

सौजन्य से:- Hindustan

खुद को लोगों से बचाने के लिए कानून बना रहे हैं PM मोदीः अरविंद केजरीवाल

दिल्ली के पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल ने प्रधानमंत्री मोदी पर गंभीर आरोप लगाया है। केजरीवाल ने कहा कि मेटा की सरकारी जांच की आड़ में पीएम मोदी खुद को बचाने के लिए कानून बना रहे हैं। आप संयोजक ने दावा किया कि पेपर लीक और E20 फ्यूल जैसे मुद्दों पर मोदी के पुराने समर्थक भी अब उनके खिलाफ हो रहे हैं।

आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने शुक्रवार को प्रधानमंत्री मोदी पर बेहद गंभीर आरोप लगाया। केजरीवाल ने कहा कि सरकार द्वारा मेटा (Meta) की जांच को लेकर चल रहे विवाद के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारत के नागरिकों से खुद को बचाने के लिए कानून बना रहे हैं।

केजरीवाल ने दावा किया कि प्रधानमंत्री अपने ही नागरिकों से लड़ रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि पेपर लीक और E20 फ्यूल जैसे मुद्दों पर मोदी के पुराने समर्थक भी अब उनके खिलाफ हो रहे हैं। केजरीवाल के ये बयान तब आए जब सूत्रों ने बताया कि मेटा के सीईओ मार्क जुकरबर्ग ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का फेसबुक वीडियो कुछ समय के लिए हटाए जाने पर सरकार से माफी मांगी है। एक्स पर एक पोस्ट में केजरीवाल ने लिखा कि भारत के प्रधानमंत्री अब अपने ही नागरिकों से लड़ रहे हैं। वे भारत के नागरिकों से खुद को बचाने के लिए कानून बना रहे हैं। पेपर लीक और E20 वगैरह का शिकार होने के बाद उनके पुराने समर्थक भी तेजी से उनके खिलाफ हो रहे हैं।

इससे पहले, सूत्रों ने बताया कि जुकरबर्ग ने बच्चों के यौन शोषण से जुड़े मटीरियल, डीपफेक कंटेंट और प्लेटफॉर्म के संचालन में हुई गलतियों के मुद्दों पर सरकार से माफी मांगी थी। बुधवार को सूत्रों ने बताया कि एक मीडिया रिपोर्ट के बाद बच्चों के यौन शोषण और दुर्व्यवहार से जुड़े मटीरियल से संबंधित कथित विज्ञापनों को लेकर जांच का सामना कर रही मेटा ने माना है कि गैर-कानूनी कंटेंट को प्रमोट किया गया था। मेटा ने यह भी माना कि ये कंटेंट खास ऑडियंस के लिए पेड प्रमोशन किए गए थे। सूत्रों ने आगे कहा कि इन चिंताओं को लेकर कंपनी को फिर से बुलाया जाएगा।

एक सूत्र ने कहा कि मार्क जुकरबर्ग ने बच्चों के यौन शोषण से जुड़े कंटेंट, डीपफेक कंटेंट और प्लेटफॉर्म के संचालन में हुई गलतियों के लिए माफी मांगी। उन्हें यह स्पष्ट कर दिया गया कि वे 'इंटरमीडियरी' (मध्यस्थ) की परिभाषा के दायरे में नहीं आते हैं। वे खुद चुनते हैं कि कंटेंट किसे मिलेगा। इसलिए आईटी एक्ट के तहत 'सेफ हार्बर' (सुरक्षा कवच) का नियम उन पर लागू नहीं होता है।

बुधवार को मेटा के चीफ ग्लोबल अफेयर्स ऑफिसर जोएल कपलान की अगुवाई में मेटा के एक हाई-लेवल डेलिगेशन ने इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सेक्रेटरी एस. कृष्णन से मुलाकात की। 45 मिनट की इस मीटिंग में मेटा के अधिकारियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का फेसबुक वीडियो गलती से हटाए जाने के बारे में जानकारी दी।

यह मीटिंग तब हुई जब कम्युनिकेशन और सूचना प्रौद्योगिकी पर बनी संसदीय स्थायी समिति ने फेसबुक से प्रधानमंत्री का वीडियो हटाए जाने को लेकर जुकरबर्ग से बिना शर्त माफी की मांग की और चेतावनी दी कि भारत में प्लेटफॉर्म को मिलने वाली कानूनी छूट खत्म की जा सकती है।

लेखक के बारे में

Subodh Kumar Mishraसुबोध कुमार मिश्रा पिछले 19 साल से हिंदी पत्रकारिता में योगदान दे रहे हैं। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' में स्टेट डेस्क पर बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। दूरदर्शन के 'डीडी न्यूज' से इंटर्नशिप करने वाले सुबोध ने पत्रकारिता की विधिवत शुरुआत 2007 में दैनिक जागरण अखबार से की। दैनिक जागरण के जम्मू एडीशन में बतौर ट्रेनी प्रवेश किया और सब एडिटर तक का पांच साल का सफर पूरा किया। इस दौरान जम्मू-कश्मीर को बहुत ही करीब से देखने और समझने का मौका मिला। दैनिक जागरण से आगे के सफर में कई अखबारों में काम किया। इनमें दिल्ली-एनसीआर से प्रकाशित होने वाली नेशनल दुनिया, नवोदय टाइम्स (पंजाब केसरी ग्रुप), अमर उजाला और हिन्दुस्तान जैसे हिंदी अखबार शामिल हैं। अखबारों के इस लंबे सफर में खबरों को पेश करने के तरीकों से पड़ने वाले प्रभावों को काफी बारीकी से समझने का मौका मिला।

ज्यादातर नेशनल और स्टेट डेस्क पर काम करने का अवसर मिलने के कारण राजनीतिक और सामाजिक विषयों से जुड़ी खबरों में दिलचस्पी बढ़ती गई। कई लोकसभा और विधानसभा चुनावों की खबरों की पैकेजिंग टीम का हिस्सा रहने के कारण भारतीय राजनीति के गुणा-भाग को समझने का मौका मिला।

शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो सुबोध ने बीएससी (ऑनर्स) तक की अकादमिक शिक्षा हासिल की है। साइंस स्ट्रीम से पढ़ने के कारण उनके पास चीजों को मिथ्यों से परे वैज्ञानिक तरीके से देखने की समझ है। समाज से जुड़ी खबरों को वैज्ञानिक कसौटियों पर जांचने-परखने की क्षमता है। उन्होंने मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया है। इससे उन्हें खबरों के महत्व, खबरों के एथिक्स, खबरों की विश्वसनीयता और पठनीयता आदि को और करीब से सीखने और लिखने की कला में निखार आया। सुबोध का मानना है कि खबरें हमेशा प्रमाणिकता की कसौटी पर कसा होना चाहिए। सुनी सुनाई और कल्पना पर आधारित खबरें काफी घातक साबित हो सकती हैं, इसलिए खबरें तथ्यात्मक रूप से सही होनी चाहिए। खबरों के चयन में क्रॉस चेकिंग को सबसे महत्वपूर्ण कारक मानने वाले सुबोध का काम न सिर्फ पाठकों को केवल सूचना देने भर का है बल्कि उन्हें सही, सुरक्षित और ठोस जानकारी उपलब्ध कराना भी है।

Powered by Nyaya 247 News

संबंधित ख़बरें

इसी विषय की और ख़बरें →

ताज़ा ख़बरें