मोहन भागवत ने कहा: समलैंगिक साथ रहने के लिए कानून चाहिए, लेकिन विवाह का विरोध
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि भारत में समलैंगिक साथ रहने के लिए स्पष्ट नियम और कानून होने चाहिए, लेकिन समलैंगिक विवाह का विरोध किया। उन्होंने कहा कि इससे शादी की संस्था प्रभावित होगी।

सौजन्य से:- दिप्रिंट हिंदी
मुंबई: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने गुरुवार को कहा कि भारत में समलैंगिक साथ रहने (समलिंगी साहचर्य) के लिए स्पष्ट नियम और कानून होने चाहिए, लेकिन उन्होंने समलैंगिक विवाह का विरोध करते हुए कहा कि इससे शादी की संस्था प्रभावित होगी.
मुंबई में इंडिया इंटरनेशनल मूवमेंट टू यूनाइट नेशंस (आई. आई. एम. यू. एन.) के एक कार्यक्रम में भागवत ने कहा, “एल. जी. बी. टी. समुदाय के लोग भी हमारे समाज का हिस्सा हैं और समाज में उन्हें जगह मिलनी चाहिए.”
जब उनसे पूछा गया कि संघ एलजीबीटीक्यूआईए+ विवाह का समर्थन क्यों नहीं करता, तो उन्होंने कहा कि इससे शादी की पारंपरिक व्यवस्था कमजोर होगी.
उन्होंने कहा, “भारतीय समाज में विवाह का उद्देश्य सिर्फ दो लोगों का साथ रहना नहीं है. विवाह अच्छी संतान और मजबूत समाज बनाने की भी एक संस्था है.”
उन्होंने आगे कहा, “अगर हम मौजूदा व्यवस्था को बदलेंगे तो टकराव पैदा होगा. इसलिए इस नजरिए से समलैंगिक विवाह को विवाह नहीं माना जाना चाहिए.”
भारत और उसके पड़ोसी देशों पाकिस्तान और चीन के साथ तनाव पर पूछे गए सवाल के जवाब में भागवत ने कहा कि ऐसे समय में लोगों को सरकार की बात माननी चाहिए.
उन्होंने कहा, “भारत का रास्ता शांति और आपसी सद्भाव का है. हमेशा के लिए नफरत या दुश्मनी नहीं होनी चाहिए, क्योंकि पूरी मानवता एक है, लेकिन संघर्ष के समय सरकार जो कहे, उसका पालन करना चाहिए.”
भागवत ने आरक्षण के मुद्दे पर भी अपनी बात रखी. उन्होंने कहा कि सामाजिक कारणों से आरक्षण ज़रूरी हुआ.
उन्होंने कहा, “जब तक समाज में भेदभाव रहेगा, तब तक आरक्षण की जरूरत बनी रहेगी. आरक्षण राजनीति का विषय नहीं बनना चाहिए. अगर सुधार के सभी कदम ईमानदारी और सही तरीके से लागू किए जाएं, तो भविष्य में आरक्षण की जरूरत खत्म हो सकती है.”
भागवत ने समाज और RSS में महिलाओं की भूमिका पर भी बात की. उन्होंने कहा कि महिलाओं की भूमिका बराबर और एक-दूसरे की पूरक होनी चाहिए.
उन्होंने कहा कि अगर करीब 100 साल पहले RSS की शुरुआत के समय महिलाओं ने इसका नेतृत्व किया होता, तो शायद संघ इतना आगे नहीं बढ़ पाता.
उन्होंने बताया कि इसी वजह से महिलाओं के लिए एक अलग समानांतर संगठन बनाया गया, ताकि वे पुरुषों के संगठन के काम में हस्तक्षेप न करें और पुरुष भी उनके काम में दखल न दें.
भागवत ने कहा, “यह धारणा गलत है कि संघ में महिलाओं की कोई जगह नहीं है.”
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
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न्याय 247 न्यूज़ द्वारा प्रस्तुत
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