सुप्रीम कोर्ट ने हाई पावर कमेटी के पुनर्गठन की मांग खारिज, जांच जारी रखने का आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में छात्र प्रदर्शन के बाद स्थापित हाई पावर कमेटी (HPEC) के पुनर्गठन की याचिका को अस्वीकार कर दिया, यह कहते हुए कि समिति के सदस्यों पर लगे आरोप केवल अटकलें हैं। अदालत ने कमेटी को पैलेट गन के उपयोग, लक्षित हिंसा और महिला प्रदर्शनकारियों के उत्पीड़न सहित कई मुद्दों की जांच जारी रखने और गवाहों की सुरक्षा तथा गोपनीयता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

सौजन्य से:- Navbharat Times
दिल्ली में छात्र प्रदर्शनकारियों पर कथित पुलिस ज्यादती की जांच के लिए गठित पांच सदस्यीय हाई पावर कमेटी (HPEC) के पुनर्गठन की मांग को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है।
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कथित पुलिस ज्यादती की जांच के लिए गठित पांच सदस्यीय हाई पावर कमेटी (HPEC) के पुनर्गठन की मांग बुधवार को खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि कमेटी के सदस्यों के खिलाफ लगाए गए आरोप महज अनुमान और पहले से बनी धारणाओं पर आधारित हैं। कोर्ट ने समिति को मामले की जांच आगे बढ़ाने का निर्देश दिया।
आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने की टिप्पणी
चीफ जस्टिस सूर्यकांत , जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने 10 सितंबर के आदेश (आदेश मंगलवार को अपलोड हुआ है) में कहा कि HPEC का गठन निष्पक्षता, पारदर्शिता और निष्पक्ष दृष्टिकोण के उच्चतम मानकों को ध्यान में रखते हुए किया गया है। समिति का उद्देश्य अदालत के समक्ष किसी एक पक्ष के हित में खड़ा होना नहीं है।
किसी तरह का बदलाव करने के इच्छुक नहीं
शीर्ष अदालत ने कहा कि हम समिति के गठन में किसी तरह का बदलाव करने के इच्छुक नहीं हैं, खासकर तब जब पुनर्गठन की मांग महज अनुमान और पहले से बनी धारणाओं पर आधारित हो और HPEC ने अभी अपनी जांच शुरू भी नहीं की है। सुप्रीम कोर्ट ने HPEC को पैलेट गन के इस्तेमाल, लक्षित हिंसा, महिला प्रदर्शनकारियों के साथ कथित उत्पीड़न तथा दोनों पक्षों की ओर से हुई अत्यधिक हिंसा और संपत्ति को नुकसान पहुंचाने जैसे मुद्दों की जांच जारी रखने को कहा।
सुप्रीम कोर्ट ने दिए निर्देश
गवाहों और शिकायत लेकर समिति के सामने आने वाले लोगों की सुरक्षा को लेकर कोर्ट ने विशेष निर्देश दिए। पीठ ने कहा कि संवेदनशील और कमजोर गवाहों को उचित सुरक्षा दी जाए तथा उनकी पहचान गोपनीय रखी जाए। ऐसे गवाहों के बयान और उनके द्वारा उपलब्ध कराए गए साक्ष्यों की भी पूरी गोपनीयता बनाए रखने को कहा गया। कोर्ट ने जरूरत पड़ने पर दस्तावेज और साक्ष्य जमा करने के लिए अलग ऑनलाइन पोर्टल बनाने का सुझाव दिया।
SC ने समिति से किया अनुरोध
पीठ ने सीनियर एडवोकेट मोनिका गुसैन और अधिवक्ता सी. सोलोमन को HPEC की ओर से अदालत की सहायता करने और दोनों पक्षों के बीच स्वतंत्र मध्यस्थ की भूमिका निभाने को कहा। साथ ही समिति से जल्द सदस्य सचिव नियुक्त करने का अनुरोध किया।
लेखक के बारे मेंराजेश चौधरीराजेश चौधरी, नवभारत टाइम्स में लीगल एडिटर हैं। वह 22 साल से भी ज्यादा वर्षों से लीगल रिपोर्टिंग कर रहे हैं। शुरुआत में वह दिल्ली की निचली अदालत और सीबीआई कवर करते थे और बाद में वह दिल्ली हाई कोर्ट और फिर लगातार डेढ़ दशक से सुप्रीम कोर्ट कवर कर रहे हैं। इस दौरान राजेश ने देश के तमाम हाई प्रोफाइल केस नीतीश कटारा मर्डर केस, जेसिक लाल केस, बोफोर्स केस, उपहार केस, पार्लियामेंट अटैक केस, प्रिय दर्शनी मट्टू केस से लेकर तमाम संवैधानिक मसले कवर किए जिनमें अनुच्छेद-370, तीन तलाक, निजता का अधिकार, होमो सेक्सुअलिटी को अपराध से बाहर करने का मामला और राम मंदिर मसले अहम है। राजेश ने इस 22 साल के करियर के दौरान दो साल 2006 से लेकर 2007 के सितंबर तक सहारा समय टीवी चैनल में भी बतौर लीगल संवावददाता काम किया। इसके बाद दोबारा वह नवभारत टाइम्स आए और उसके बाद लगातार कानूनी अफेयर्स को कवर करते रहे। नेशनल ब्यूरो में रहते हुए उन्होंने सुप्रीम कोर्ट और कानून मंत्रालय को कवर करने के साथ साथ कानून के विषय पर लगातार एडिट पेज पर लिख रहे हैं। साथ ही लगातार ऑनलाइन माध्यम के लिए भी सक्रिय रिपोर्टिंग करते रहे हैं और ..कोर्ट रूम..नाम के एक साप्ताहिक विडियो इंटरव्यू भी लगातार देते हैं जिनमें सप्ताह भर के मुख्य कानूनी मसले पर उनका साक्षात्कार प्रसारित होता है। इसके अलावा वह लगातार लीगल मसले पर लीगल फोरम नामक कॉलम भी लिखते रहे हैं। उन्होंने दरभंगा के ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय से केमिस्ट्री में एमएससी किया है। साथ ही उन्होंने जर्नलिज्म में पीजी डिप्लोमा किया और एलएलबी भी कर रखा है।... और पढ़ें
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