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अरशद मदनी ने UCC पर उठाई आवाज़: शरीयत के खिलाफ कोई कानून स्वीकार नहीं

जमीयत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने सरकार के समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के कथित बयान पर सवाल उठाए, यह कहते हुए कि शरीयत के खिलाफ कोई कानून स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने उत्तराखंड हाईकोर्ट की सुनवाई के दौरान धार्मिक स्वतंत्रता के अनुच्छेद 25-26 का हवाला देते हुए बताया कि मुसलमान अपने धर्म से समझौता नहीं कर सकते और UCC से धार्मिक पर्सनल लॉ पर असर पड़ेगा।

16 सितंबर 2026 को 09:04 am बजे
अरशद मदनी ने UCC पर उठाई आवाज़: शरीयत के खिलाफ कोई कानून स्वीकार नहीं

सौजन्य से:- navbharattimes.indiatimes.com

जमीयत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष अरशद मदनी ने UCC को लेकर सरकार पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि शरीयत के खिलाफ कोई कानून स्वीकार नहीं किया जा सकता। मदनी ने अनुच्छेद 25-26 के तहत धार्मिक स्वतंत्रता का हवाला देते हुए उत्तराखंड हाईकोर्ट में चल रही सुनवाई का जिक्र किया।

नई दिल्ली: केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के उस कथित बयान पर घमासान छिड़ गया है, जिसमें उन्होंने यह ऐलान किया है कि 2029 से पहले एनडीए शासित सभी 21 राज्यों में समान नागरिक संहिता ( UCC ) कर दिया जाएगा। अब इस पर जमीयत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने सवाल उठाए हैं। सोशल मीडिया पर पोस्ट जारी कर उन्होंने कहा कि देश संविधान से चलेगा या किसी राजनीतिक दल के वैचारिक एजेंडे से? उन्होंने UCC को धार्मिक स्वतंत्रता और संवैधानिक अधिकारों में हस्तक्षेप करने वाला कदम बताया।

उत्तराखंड हाईकोर्ट पहुंची जमीयत

अरशद मदनी ने कहा कि जमीयत उलमा-ए-हिंद देश के धर्मनिरपेक्ष संविधान, लोकतंत्र और कानून के शासन को कायम रखना चाहती है। इसी उद्देश्य से संगठन ने समान नागरिक संहिता के खिलाफ उत्तराखंड हाईकोर्ट का रुख किया है। उनके मुताबिक, मामले में अब तक छह सुनवाई हो चुकी हैं और जमीयत की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल समेत अन्य वकील अदालत में पेश हो चुके हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि संगठन को न्याय मिलेगा।

'शरीयत के खिलाफ कोई कानून स्वीकार नहीं'

जमीयत अध्यक्ष ने कहा कि मुसलमान ऐसा कोई कानून स्वीकार नहीं कर सकते, जो शरीयत के खिलाफ हो। उन्होंने कहा, 'मुसलमान हर चीज से समझौता कर सकता है, लेकिन अपने धर्म और दीन से हरगिज कोई समझौता नहीं कर सकता।' उनके मुताबिक, यह सवाल मुसलमानों के वजूद का नहीं, बल्कि उनके संवैधानिक और धार्मिक अधिकारों का है।

अनुच्छेद 25 और 26 का दिया हवाला

अरशद मदनी ने कहा कि मुस्लिम पारिवारिक कानून कुरआन और हदीस से लिए गए हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जब संविधान के प्रावधानों के तहत अनुसूचित जनजातियों को UCC से छूट दी जा सकती है, तो संविधान के अनुच्छेद 25 और 26 के तहत मुसलमानों को प्राप्त धार्मिक स्वतंत्रता का सम्मान क्यों नहीं किया जा सकता?

उन्होंने यह भी कहा कि जो लोग किसी धार्मिक पर्सनल लॉ के तहत अपने मामलों का संचालन नहीं करना चाहते, उनके लिए देश में पहले से वैकल्पिक नागरिक कानून मौजूद हैं। ऐसे में अनिवार्य समान नागरिक संहिता की जरूरत पर उन्होंने सवाल खड़ा किया।

'भारत में अलग-अलग कानूनों की अनुमति'

जमीयत अध्यक्ष ने सरकार के 'एक देश, एक कानून' और 'एक घर में दो कानून नहीं हो सकते' जैसे नारों पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि भारत का कानूनी ढांचा विभिन्न राज्यों में कई मामलों में अलग-अलग कानूनों और विशेष प्रावधानों की अनुमति देता है। गौहत्या से संबंधित कानूनों में भी पूरे देश में एकरूपता नहीं है।

अरशद मदनी ने कहा कि जमीयत उलमा-ए-हिंद की पुरानी मांग रही है कि गाय को राष्ट्रीय पशु का दर्जा देकर पूरे देश में उसकी सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। उन्होंने आरोप लगाया कि UCC लागू करने का उद्देश्य नागरिकों की धार्मिक स्वतंत्रता पर अंकुश लगाना और उनके संवैधानिक अधिकारों को सीमित करना है।

लेखक के बारे मेंअभिषेक पाण्डेयअभिषेक पाण्डेय नवभारत टाइम्स में डिजिटल में पत्रकार हैं। वे जुलाई- 2025 में टाइम्स ऑफ इंडिया ग्रुप के नवभारत टाइम्स, डिजिटल विंग से जुड़े। वह वर्तमान में नेशनल और दिल्ली डेस्क से जुड़ी खबरों को कवर करते हैं। पत्रकारिता में बतौर रिपोर्टर और डेस्क पर काम करने का 4 वर्षों का अनुभव है। नवभारत टाइम्स में जुड़ने से पहले वह दैनिक जागरण में सीनियर सब एडिटर के पद पर कार्यरत थे। अभिषेक ने 2022 में उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव, लोकसभा चुनाव 2024, महाकुंभ 2025 को काफी करीब से कवर किया है। अभी वह राष्ट्रीय स्तर पर हो रही सियासी उथल-पुथल, सामाजिक परिवर्तन और क्राइम से जुड़ी खबरों पर बारीकी से नजर रखते हैं।

विशेषज्ञता

उत्तर भारत के राज्यों की सियासी व आपराधिक घटनाक्रम पर अच्छी पकड़, किताबों के जरिए इतिहास को वर्तमान के पन्नों में खंगालने की कोशिश।

पत्रकारिता अनुभव

रामा यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातक की डिग्री हासिल करने के बाद अभिषेक पाण्डेय ने दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित संस्थान में पत्रकारिता का शुरुआती ज्ञान लिया। इसके बाद उन्होंने कई संस्थानों के लिए फ्रीलांसिग की। इस दौरान ग्रामीण क्षेत्रों में शौचालयों के लिए जारी होने वाली धनराशि में घोटाले का खुलासा, सरकारी राशन वितरकों द्वारा 'राशन चोरी' का भंड़ाफोड़ किया, साथ ही किसान आंदोलन की ग्राउंड रिपोर्टिंग की। इसके बाद साल 2022 में दैनिक जागरण के डिजिटल विंग में बतौर सब एडिटर के पद पर अपने करियर की औपचारिक शुरुआत की। यहां उन्होंने उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की डेस्क पर अपनी पकड़ मजबूत की। बेहतरीन लेखनी और कार्य के प्रति समर्पण को ध्यान में रखते हुए संस्थान ने उन्हें 2024 में वरिष्ठ उप संपादक के पद पर प्रमोट किया। दैनिक जागरण में रहते हुए उन्होंने, खबरों का संपादन, एक्सप्लेनर खबरों पर काम किया। इसके बाद अभिषेक पाण्डेय ने जुलाई 2025 में नवभारत टाइम्स के साथ अपनी पारी की शुरुआत की।

शिक्षा/पुरस्कार

मूल रूप से कानपुर से जुड़े अभिषेक पाण्डेय ने रामा यूनिवर्सिटी से मास कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म में ग्रेजुएशन किया है। दैनिक जागरण में उन्हें तीन बार बेस्ट परफॉर्मर ऑफ द मंथ से सम्मानित किया गया था।... और पढ़ें

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