सुप्रीम कोर्ट ने पीआईएल‑दाखिल करने वाले वकील को दी कड़ी फटकार
सुप्रीम कोर्ट ने फर्जी मेडिकल डिग्री संबंधी जनहित याचिका को खारिज कर दिया और वकील को कहा कि वह हर हफ्ते नया पीआईएल लेकर आती है, मानो पीआईएल की फैक्ट्री चल रही हो, जिससे अदालत का समय बर्बाद होता है। अदालत ने एक्सपर्ट कमिटी की मांग को भी ठुकरा दिया, जबकि याचिकाकर्ता ने चार में से एक डॉक्टर के पास जाली डिग्री होने का आँकड़ा प्रस्तुत किया।

सौजन्य से:- navbharattimes.indiatimes.com
सुप्रीम कोर्ट ने एक जनहित याचिका पर वकील को जमकर फटकारा है। सुप्रीम कोर्ट ने वकील से कहा कि लगता है कि जैसे पब्लिसिटी के लिए पीआईएल की फैक्ट्री बना ली गई है।
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को फर्जी और जाली मेडिकल डिग्री के बढ़ते मामलों पर एक वकील की ओर से दायर जनहित याचिका न सिर्फ खारिज कर दी और उसे जमकर फटकारा भी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा लगता है कि उसके पास जैसे पीआईएल की कोई फैक्ट्री हो, जो हर हफ्ते एक नया पीआईएल लेकर आ जाते हैं।
'पीआईएल की फैक्ट्री बना ली है'
सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच ने याचिककाकर्ता को लेकर कहा कि पब्लिसिटी के लिए अक्सर ऐसी जनहित याचिकाएं डाल दी जाती है। इससे अदालत का समय खराब होता है। लाइवलॉ की एक रिपोर्ट के मुताबिक याचिकाकर्ता अपनी याचिका की खुद ही पैरवी करने पेश हुआ था।
आप हर हफ्ते एक पीआईएल दायर करते हैं। आप किस तरह की याचिका ड्राफ्ट कर रहे हैं? आपने इसे एक फैक्ट्री बना लिया है। यही बात है, हर हफ्ते आप एक रिट याचिका दायर करते हैं। जैसे ही आप कोई न्यूज देखते हैं, एक ड्राफ्ट कर देते हैं। आप अपने प्रेयर्स को देखिए। क्या आप कभी भी दिमाग लगाते हैं?
जस्टिस पीएस नरसिम्हा, सुप्रीम कोर्ट
'इस तरह की याचिकाओं से परेशान न करें'
जस्टिस नरसिम्हा ने आगे कहा कि क्या इस तरह की पीआईएल प्रचार या लोकप्रियता पाने के लिए दायर की जाती है। उन्होंने कहा, 'आप ऐसा क्यों करते हैं, सिर्फ इसलिए क्योंकि रिट याचिका दायर करना आसान है और कोई भी फाइल कर सकता है और पब्लिसिटी कमा सकता है? बस लगातार इस तरह की याचिकाएं डालकर हमें परेशान न करें।'
फर्जी मेडिकल डिग्री से जुड़ी याचिका थी
याचिकाकर्ता ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट से एक एक्सपर्ट कमिटी बनाने की मांग की थी।
उसने बेंच को यह बताने की भी कोशिश की कि उसकी याचिका एक गंभीर सवाल को लेकर है।
उसने कोर्ट के सामने यह आंकड़े भी दिए कि चार डॉक्टरों में से कम से कम एक के पास फर्जी या जाली डिग्री है। लेकिन अदालत ने उसकी याचिका खारिज कर दी।
लेखक के बारे मेंअंजन कुमारअंजन कुमार, नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में असिस्टेंट एडिटर हैं और पिछले 24 साल से भी ज्यादा समय से पत्रकारिता कर रहे हैं। अंजन अप्रैल 2025 में नवभारत टाइम्स ऑनलाइन से जुड़े और बीते 10 वर्षों से डिजिटल मीडिया में राजनीति,चुनाव, जुडिशरी, डिफेंस, विदेश,करेंट अफेयर्स और बिजनेस जैसे विषयों पर लिख रहे हैं। डिजिटल मीडिया से जुड़ने के शुरुआती वर्षों में ये देश की एक टॉप लीडरशिप के आधिकारिक और राजनीतिक भाषणों और उनके पुस्तकों के संपादन कार्यों में भी योगदान दे चुके हैं। इन्होंने करियर का आरंभ टेलीविजन पत्रकारिता से किया और 14 वर्षों तक विभिन्न टीवी न्यूज चैनलों में सेवाएं दीं। इस कार्यकाल में इन्होंने सहारा समय नेशनल न्यूज चैनल पर 2006 में कन्या भ्रूण हत्या पर किए गए एक ऐतिहासिक स्टिंग ऑपरेशन पर बने'कोख में कत्ल' प्रोग्राम सीरीज को प्रोड्यूस किया, जो उन दिनों भारतीय संसद में भी छाया रहा। यहीं पर इन्होंने अगले ही साल पश्चिम बंगाल के नंदीग्राम आंदोलन से जुड़े कार्यक्रमों पर न्यूज सीरीज बनाए, जिसकी देश की मीडिया में काफी चर्चा हुई। आगे के वर्षों में इसी चैनल पर 'मुर्दा, मवेशी, माफिया' प्रोग्राम सीरिज को भी पेश किया, जो दिल्ली-एनसीआर में मरे हुए मवेशियों का मांस बेचने वाली माफिया के खतरनाक स्टिंग ऑपरेशन पर आधारित था। ये 2002 के गुजरात विधानसभा चुनाव और 2004 के आम चुनावों से लेकर 2024 के आम चुनावों और 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव तक को टीवी और डिजिटल मीडिया के अलग-अलग प्लेटफॉर्म के लिए कवर कर चुके हैं।... और पढ़ें
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