भरी अदालत में सीजेआई को गाली देने वाले युवक को जमानत, अदालत ने कहा संस्थागत संयम पालन करना जरूरी है
दिल्ली की निचली अदालत ने सुप्रीम कोर्ट जैसी बड़ी संस्था की गरिमा से जुड़े संवेदनशील मामलों में संस्थागत संयम का पालन करने की जरूरत पर जोर देते हुए 24 वर्षीय प्रबल प्रताप सिंह को जमानत देने का आदेश सुनाया है।

सौजन्य से:- Navbharat Times
दोनों आरोपियों को बेल देते हुए निचली अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि सुप्रीम कोर्ट जैसी बड़ी संस्था की गरिमा किसी एक परेशान और बिना वकील वाले याचिकाकर्ता के बेलगाम बर्ताव से कमतर नहीं हो सकती, इसलिए निचली अदालतों को भी संस्थागत संयम का पालन करना चाहिए।
25,000 रुपये के बेल बॉन्ड पर मिली जमानत
- जुडिशल मजिस्ट्रेट रवि ने अपने आदेश में साथ ही साथ यह भी कहा कि ऐसे बर्ताव 'बर्दाश्त नहीं किए जा सकते और इसकी स्पष्ट तौर पर निंदा की जाती है।'
- अदालत ने 24 वर्षीय प्रबल प्रताप सिंह की जमानत याचिका पर सुनवाई के बाद यह आदेश सुनाया है।
- 27 जुलाई, 2026 का यह आदेश बुधवार को उपलब्ध कराया गया है।
- मजिस्ट्रेट ने कहा कि उम्मीद है कि आरोपी भविष्य में किसी अन्य अदालत में मर्यादा के साथ पेश आएंगे और न्यायिक-प्रक्रिया की गरिमा का ख्याल रखेंगे।
- उन्होंने कहा कि 10 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को बहुत ही संयम के साथ संभाला और याचिकाकर्ता की बेतुकी और अमर्यादित बातों के खिलाफ किसी कार्रवाई का प्रस्ताव नहीं रखा।
- इसलिए बेल याचिका को जमानत के कानूनी सिद्धांतों के तहत निपटाया जाना चाहिए।
- अदालत को आरोपों के 'भावानात्मक पहलू' से प्रभावित हुए बिना यह भी देखना चाहिए कि आरोपी को हिरासत में रखना जरूरी है या नहीं।
- अदालत ने कहा कि आरोपी के खिलाफ अपराध में दो साल की सजा का प्रावधान है, दिल्ली पुलिस की जांच पूरी हो चुकी है और कोई जब्ती और हिरासत में पूछताछ की आवश्यकता नहीं है।
- आखिरकार कोर्ट ने 25,000 रुपये के बेल बॉन्ड और इतनी ही रकम की शुरिटी के आधार पर जमानत देने का आदेश जारी कर दिया।
सुप्रीम कोर्ट में सीजेआई दो दी थी गाली
- उत्तर प्रदेश के इटावा का रहने वाला प्रबल प्रताप लखनऊ यूनिवर्सिटी से लॉ के तीसरे वर्ष का छात्र है।
- वह सुप्रीम कोर्ट में पिटीशनर-इन-पर्सन के तौर पर रायबरेली के रहने वाले दूसरे वर्ष के कानून के छात्र चंदर भान (23 साल) के साथ उस दिन सुप्रीम कोर्ट में पेश हुआ था।
- पुलिस के अनुसार 10 जुलाई, 2026 को प्रबल प्रताप ने सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही को 'गाली और असंसदीय भाषा' का इस्तेमाल करके बाधित किया।
- पुलिस ने यह भी कहा कि उसने कोर्टरूम में पेपर फेंका, हंगामा किया और सुरक्षाकर्मियों पर आपराधिक बल का प्रयोग किया।
- सोशल मीडिया पर कोर्टरूम का जो वीडियो आया था, उसमें वह सीजेआई के लिए भद्दी गालियां निकाल रहा था। (पीटीआई इनपुट के साथ)
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