सुप्रीम कोर्ट ने तीन-भाषा नीति पर सवाल उठाए, CBSE से कक्षा 6 के छात्रों को राहत देने को कहा
सुप्रीम कोर्ट ने तीन-भाषा नीति पर सवाल उठाए, CBSE से कक्षा 6 के छात्रों को राहत देने को कहा सुप्रीम कोर्ट ने CBSE की संशोधित त्रि-भाषा नीति के तहत अंग्रेजी को गैर-स्वदेशी भाषा के रूप में वर्गीकृत करने पर भी सवाल उठाया. B…

सौजन्य से:- ETV Bharat
सुप्रीम कोर्ट ने तीन-भाषा नीति पर सवाल उठाए, CBSE से कक्षा 6 के छात्रों को राहत देने को कहा
सुप्रीम कोर्ट ने CBSE की संशोधित त्रि-भाषा नीति के तहत अंग्रेजी को गैर-स्वदेशी भाषा के रूप में वर्गीकृत करने पर भी सवाल उठाया.
By Sumit Saxena
Published : August 20, 2026 at 7:45 PM IST
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) से कक्षा 6 के विद्यार्थियों को तीसरी भाषा की अनिवार्यता से एक बार की राहत देने पर विचार करने को कहा, ताकि उन्हें उस विषय में कक्षा 10 की अनिवार्य बोर्ड परीक्षा से बचाया जा सके और मौजूदा विदेशी भाषा के संयोजन को भी सुरक्षित रखा जा सके.
सुप्रीम कोर्ट ने सीबीएसई की संशोधित त्रि-भाषा नीति के तहत अंग्रेजी को गैर-स्वदेशी के रूप में वर्गीकृत करने पर भी सवाल उठाया.
चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना की पीठ ने सीबीएसई से यह भी जांच करने के लिए कहा कि क्या तीसरी भाषा वास्तव में कक्षा 6 से शुरू की जानी चाहिए या इसकी शुरुआत कक्षा 3 या 4 से की जा सकती है. पीठ ने CBSE, NCERT और केंद्र से इस नीति की समीक्षा करने और नए सिरे से विचार करने (go back to the drawing board) के लिए कहा.
सुनवाई के दौरान, पीठ ने इस बात पर जोर दिया कि नीति लागू होने से पहले पर्याप्त शिक्षकों, पाठ्यक्रम सामग्री और अन्य बुनियादी ढांचे की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए एक रोडमैप की जरूरत है. जस्टिस बागची ने कहा कि दूसरा महत्वपूर्ण पहलू यह तय करना है कि सीमा कहां खींची जाए: चाहे वह छठी कक्षा हो या तीसरी कक्षा, इसके लिए तीन भाषाओं या दो भाषाओं के बारे में CBSE के पाठ्यक्रम के आधार पर फैसला लेना होगा.
सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय क्षेत्रीय भाषाओं को कमतर मानने के खिलाफ भी चेतावनी दी, क्योंकि ऐसा माना जाता है कि वे विदेशी भाषाओं की तरह रोजगार के अवसर प्रदान नहीं करती हैं.
पीठ ने केंद्र सरकार का प्रतिनिधित्व कर रहीं अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी से कहा कि अगर आपके लिए मानक कक्षा 6 है, तो उन्हें वर्तमान छठी कक्षा के लिए राहत दें ताकि पूर्वव्यापी संचालन का मुद्दा भी समाप्त हो जाए और उनकी तात्कालिक समस्या का भी समाधान हो जाए.
जस्टिस बागची ने टिप्पणी की, "मेरा अनुभव है कि तीसरी भाषा कक्षा 3 या 4 से शुरू होती है... जो कोई भी अब 2027 के लिए विकल्प चुन रहा है, वह जानता है कि मेरे पास ये तीन विकल्प उपलब्ध हैं. लेकिन जिसने पहले ही विकल्प चुन लिया है, उसे राहत दी जानी चाहिए."
भाटी ने कहा कि सीबीएसई ने लचीली स्टाफिंग व्यवस्था की अनुमति दी है और छात्रों को शुरू में बुनियादी स्तर पर पढ़ाया जाएगा.
पीठ ने कहा कि हालांकि वह राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 को लागू करने पर सवाल नहीं उठा रही है, लेकिन इसके लागू होने से छात्रों के अधिकारों पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ना चाहिए.
जस्टिस बागची ने कहा कि गहरी बहस इस बात पर होगी कि क्या हम अंग्रेजी को अपनी मूल भाषा मानते हैं या एक विदेशी भाषा, शायद इसके लिए एक संवैधानिक विश्लेषण की आवश्यकता होगी.
वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने, एक याचिकाकर्ता की ओर से बहस करते हुए, तर्क दिया कि अंग्रेजी सुप्रीम कोर्ट और विधायिका की आधिकारिक भाषा है, और इस बात पर जोर दिया कि वे कह रहे हैं कि 400 साल बाद यह अपनी भाषा नहीं है.
पीठ ने मौखिक रूप से भाटी से कहा, "आपको इस पर जवाब देना होगा…"
अंग्रेजी को गैर-स्वदेशी भाषा में वर्गीकृत करने पर सवाल
जस्टिस बागची ने मौखिक रूप से टिप्पणी की कि अदालत को इस बात की पड़ताल करनी होगी कि अंग्रेजी को किस हद तक एक गैर-स्वदेशी भाषा माना जा सकता है. जस्टिस बागची ने कहा, "व्यक्तिगत रूप से मुझे 'नेटिव' शब्द पर गंभीर आपत्ति है. इसके औपनिवेशिक निहितार्थ हैं. इसकी जगह 'इंडिजिनस' (स्वदेशी) होना चाहिए…"
सीजेआई ने भाटी से कहा कि यह जांचना जरूरी है कि CBSE के अलावा अन्य बोर्डों, जैसे ICSE बोर्ड और इंटरनेशनल बोर्ड में क्या हो रहा है. शंकरनारायणन ने कहा कि ICSE में कोई बदलाव नहीं हुआ है और राज्य बोर्डों में भी कोई बदलाव नहीं हुआ है.
पीठ ने टिप्पणी की कि तीसरी भाषा शुरू करने में कुछ भी गलत नहीं है, लेकिन याचिकाकर्ताओं की चिंता इसे लागू करने के तरीके को लेकर है.
पीठ ने कहा, "नई भाषा सीखना एक बड़ी संपत्ति और अनमोल है. परीक्षा की कोई बाध्यता नहीं है, फिर हिचकिचाहट क्यों होनी चाहिए?"
पीठ ने यह भी पूछा कि अगर उत्तर भारत का कोई व्यक्ति दक्षिण भारत की कोई भाषा सीखना चाहे तो इसमें क्या नुकसान है.
वरिष्ठ अधिवक्ता आनंद ग्रोवर ने, जो एक याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए, यह दलील दी कि यह मुद्दा विशेष रूप से कक्षा 6 के छात्रों के लिए था. उन्होंने जोर दिया कि CBSE के पास कक्षा 6 से 8 के लिए पाठ्यक्रम तैयार करने का वैधानिक अधिकार नहीं है, यह NCERT के अधिकार क्षेत्र में आता है.
सुप्रीम कोर्ट उन अभिभावकों की याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा था, जिन्होंने CBSE के उस निर्णय को चुनौती दी थी जिसमें तीन-भाषा नीति लागू किया गया है. इस फॉर्मूले के तहत छात्रों के लिए तीन भाषाएं पढ़ना अनिवार्य है, जिनमें से दो भारतीय भाषाएं होनी चाहिए.
CBSE के 29 जून के परिवर्तनकालीन दिशा-निर्देशों ने कक्षा 7, 8 और 9 के उन छात्रों को पहले ही राहत दे दी थी जो पहले से ही दो गैर-स्वदेशी (विदेशी) भाषाएं पढ़ रहे थे.
ऐसे छात्रों को अपने मौजूदा संयोजन को बनाए रखने और तीसरी भाषा के रूप में एक भारतीय भाषा को जोड़ने की अनुमति दी गई थी. अतिरिक्त भाषा का मूल्यांकन आंतरिक स्कूल-आधारित मूल्यांकन के माध्यम से किया जाएगा और जब छात्र कक्षा 10 में पहुंचेंगे, तब इसकी कोई बोर्ड परीक्षा नहीं होगी.
यह भी पढ़ें- APAAR सहमति-पत्र पर उड़ीसा हाई कोर्ट का फैसला देशभर में लागू करे CBSE: सुप्रीम कोर्ट
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