पति की मदद से पत्नी की पढ़ाई‑नौकरी, फिर रिश्ते में खाई: बिहार में तलाक के मामले अदालतों तक पहुँच रहे हैं
बिहार के फुलवारी शरीफ में कई मामलों में शादी के बाद पत्नियों की पढ़ाई और नौकरी में पति का सहयोग रहा, पर नौकरी मिलने के बाद वैवाहिक दूरी बढ़ गई। यह तनाव पंचायत, शरिया अदालत और सामान्य कोर्ट तक पहुँचकर मध्यस्थता की आवश्यकता को उजागर कर रहा है।

सौजन्य से:- Jagran
शादी के बाद पढ़ाया, नौकरी दिलाई... फिर क्यों छूट रहा साथ? बिहार में कोर्ट पहुंच रहे पति-पत्नी के झगड़े
फुलवारी शरीफ में ऐसे कई मामले सामने आए हैं जहां पत्नियों की पढ़ाई और नौकरी में पति के सहयोग के ...और पढ़ें
HighLights
- पत्नियों की नौकरी के बाद पति-पत्नी के रिश्तों में बढ़ रही दूरी।
- वैवाहिक विवाद पंचायत, शरिया अदालत और कोर्ट-कचहरी तक पहुंच रहे हैं।
- करियर-परिवार संतुलन की बदलती अपेक्षाएं रिश्तों को प्रभावित कर रही हैं।
संवाद सूत्र, फुलवारी शरीफ(पटना)। एक दौर था जब लड़की वालों को चिंता रहती थी कि उनकी बेटी का वर कैसा मिलेगा। अब कई मामलों में तस्वीर बदलती दिख रही है। शादी के बाद पत्नी की पढ़ाई, प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी और नौकरी में पति का सहयोग करने के बावजूद जब रिश्ते में दूरी बढ़ती है, तो विवाद घर की चौखट से निकलकर पंचायत, शरिया अदालत और कोर्ट-कचहरी तक पहुंच रहा है।
फुलवारी शरीफ और आसपास के इलाकों में सामने आए तीन मामलों ने बदलते वैवाहिक रिश्तों पर बहस छेड़ दी है।
पढ़ाई से नौकरी तक पति ने दिया साथ, फिर बढ़ी दूरी
वाल्मीकि नगर के पास रहने वाले किसान प्रमोद कुमार की शादी बीएड शिक्षित युवती से हुई थी। प्रमोद के अनुसार, शादी के बाद पत्नी ने पहले अपने पैरों पर खड़ा होने और फिलहाल बच्चा नहीं करने की इच्छा जताई।
पति का कहना है कि उसने पत्नी की इच्छा का सम्मान करते हुए उसकी पढ़ाई और नौकरी में सहयोग किया। शिक्षक की नौकरी लगने के बाद पत्नी ने मायके के पास पदस्थापन करा लिया।
तीन साल अलग रहने के बाद पहुंचा विवाद
प्रमोद का आरोप है कि करीब तीन वर्षों तक पत्नी उसके साथ नहीं रही और संपर्क भी सीमित रहा। कारण जानने की कोशिश पर उसके खिलाफ दहेज प्रताड़ना का मामला दर्ज हो गया।
बाद में पंचायती हुई, जिसके बाद पत्नी वैवाहिक उपहार में मिले जेवर और नकदी लेकर अलग हो गई। इस मामले में दोनों पक्षों के दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
दूसरा मामला शरिया अदालत तक पहुंचा
फुलवारी शरीफ के 24 वर्षीय सद्दाम की शादी आरा जिले में हुई थी। सद्दाम के अनुसार, पत्नी करीब दस दिन ससुराल में रहने के बाद मायके चली गई।
उसे वापस लाने की कोशिश की गई तो ससुराल पक्ष की ओर से कहा गया कि पत्नी बीएड की पढ़ाई पूरी कर नौकरी करेगी। इसके बाद विवाद रिश्तेदारों से होते हुए इमारत-ए-शरिया की शरिया अदालत तक पहुंच गया।
सुलह की कोशिश के बावजूद नहीं बनी बात
सद्दाम के मामले में सुलह की कोशिशें भी की गईं, लेकिन मामला वैवाहिक अलगाव की स्थिति तक पहुंच गया। परिवार और रिश्तेदारों की मध्यस्थता के बाद भी दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बन सकी।
नौकरी लगी तो पति-पत्नी के बीच बढ़ी दूरी
तीसरा मामला नौशाद और उजमा का है। दोनों की शादी पटना सिटी में हुई थी। उजमा ने शादी के बाद पढ़ाई जारी रखने और आगे बढ़ने के लिए पति से सहयोग मांगा था।
नौशाद इसके लिए तैयार हो गया। बाद में उजमा की सिपाही के पद पर नौकरी लग गई। नौशाद का आरोप है कि नौकरी लगने के बाद दोनों के बीच दूरी बढ़ती गई और पत्नी ससुराल आने को तैयार नहीं है।
अब इमारत-ए-शरिया में हो रही सुलह की कोशिश
नौशाद-उजमा का मामला भी इमारत-ए-शरिया तक पहुंच चुका है। दोनों पक्षों के बीच सुलह की कोशिश की जा रही है। ऐसे मामलों ने यह सवाल खड़ा किया है कि शादी के बाद करियर और पारिवारिक जीवन के बीच संतुलन को लेकर बदलती अपेक्षाएं रिश्तों को किस तरह प्रभावित कर रही हैं।
तलाक के बजाय खुला के मामले बढ़ने का दावा
इमारत-ए-शरिया से जुड़े मामलों में काम करने वाले जानकारों के अनुसार, वैवाहिक विवादों में अब ऐसे मामले भी सामने आ रहे हैं, जिनमें शादी के कुछ ही समय बाद पति-पत्नी अलग रहने लगते हैं।
कई मामलों में दो-तीन महीने की शादी के बाद ही अलग होने की मांग सामने आने की बात कही जा रही है। जानकारों के मुताबिक, पुरुषों की ओर से तलाक देने के बजाय महिलाओं की ओर से खुला मांगने के मामले भी सामने आ रहे हैं।
बढ़ रही है मध्यस्थता की जरूरत
जानकारों का कहना है कि ऐसे विवादों में शुरुआती स्तर पर संवाद और मध्यस्थता की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। शादी के बाद पढ़ाई, नौकरी, रहने की जगह और पारिवारिक जिम्मेदारियों को लेकर पति-पत्नी के बीच स्पष्ट सहमति न बनने पर विवाद बढ़ सकता है।
ऐसे मामलों में परिवार और मध्यस्थ संस्थाओं के स्तर पर समय रहते बातचीत की जरूरत महसूस की जा रही है।
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