होमवकीलइमरान ख़ान की मेडिकल रिपोर्ट में 'एंग्जाइटी लेवल थ्री प्लस' का ज़िक्र, ये कितना गंभीर? - BBC News हिंदी
वकील

इमरान ख़ान की मेडिकल रिपोर्ट में 'एंग्जाइटी लेवल थ्री प्लस' का ज़िक्र, ये कितना गंभीर? - BBC News हिंदी

इमरान ख़ान की मेडिकल रिपोर्ट में 'एंग्जाइटी लेवल थ्री प्लस' का ज़िक्र, ये कितना गंभीर? - Author, शहजाद मलिक - पदनाम, बीबीसी उर्दू - प्रकाशित - पढ़ने का समय: 6 मिनट पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व प्रधानमंत्री इमरान…

19 अगस्त 2026 को 03:54 am बजे
इमरान ख़ान की मेडिकल रिपोर्ट में 'एंग्जाइटी लेवल थ्री प्लस' का ज़िक्र, ये कितना गंभीर? - BBC News हिंदी

सौजन्य से:- BBC

इमरान ख़ान की मेडिकल रिपोर्ट में 'एंग्जाइटी लेवल थ्री प्लस' का ज़िक्र, ये कितना गंभीर?

- Author, शहजाद मलिक

- पदनाम, बीबीसी उर्दू

- प्रकाशित

- पढ़ने का समय: 6 मिनट

पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व प्रधानमंत्री इमरान ख़ान को तत्काल इस्लामाबाद के एक निजी अस्पताल, शिफा इंटरनेशनल हॉस्पिटल में एडमिट करने का आदेश दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने एक मेडिकल बोर्ड बनाने का निर्देश भी दिया है.

मंगलवार को तीन सदस्यीय पीठ ने पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ के महासचिव सलमान अकरम राजा और इमरान ख़ान की बहन उज़मा खान की याचिकाओं पर सुनवाई की.

सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि मेडिकल बोर्ड में इमरान ख़ान के निजी चिकित्सक डॉ. फैसल और उज़मा ख़ान को भी शामिल किया जाएगा. अदालत ने अगली सुनवाई में इमरान ख़ान की मेडिकल रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया है.

न्यायमूर्ति शाहिद वहीद की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय पीठ ने कहा कि पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ़ पार्टी (पीटीआई), पूर्व प्रधानमंत्री के स्वास्थ्य को लेकर राजनीति नहीं करेगी और पूर्व प्रधानमंत्री अगली सुनवाई तक अस्पताल में ही रहेंगे.

न्यायालय ने इन याचिकाओं की अगली सुनवाई 16 सितंबर को तय की है.

यह अंतरिम आदेश ऐसे समय में आया है जब खैबर पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री सोहेल अफ़रीदी ने हाल ही में पूर्व प्रधानमंत्री इमरान ख़ान को उनके परिवार और निजी डॉक्टरों तक पहुंच नहीं दिए जाने की स्थिति में विरोध प्रदर्शन कार्यक्रम की घोषणा की .

अदियाला जेल के अधीक्षक की सुप्रीम कोर्ट में पेश की गई एक मेडिकल रिपोर्ट के अनुसार, पूर्व प्रधानमंत्री इमरान ख़ान में एंग्जाइटी और पैनिक के 'गंभीर' लक्षण पाए गए हैं.

मेडिकल बोर्ड ने पूर्व प्रधानमंत्री को प्रतिदिन एक घंटा पैदल चलने और कुछ मेंटल रिलैक्सेशन एक्टिविटीज की सिफ़ारिश की थी.

अदियाला जेल के अधीक्षक की सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में पेश की गई रिपोर्ट में इमरान ख़ान के स्वास्थ्य से जुड़े कई विवरण शामिल थे.

पूर्व प्रधानमंत्री इमरान ख़ान रावलपिंडी की अदियाला जेल में तीन साल से कैद हैं. उन पर 19 करोड़ पाउंड के अल-कादिर ट्रस्ट मामले सहित कई मामले चल रहे हैं.

सोमवार को अन्य वरिष्ठ पीटीआई नेताओं के साथ एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए सोहेल अफ़रीदी ने कहा, "हम कोई असंवैधानिक या अवैध मांग नहीं कर रहे हैं."

"हम सिर्फ़ इतना चाहते हैं कि इमरान ख़ान का इलाज उनके निजी डॉक्टरों और परिवार की मौजूदगी में एक बेहतर अस्पताल में किया जाए. और अगर कोई मीटिंग आयोजित की जाती है, तो हम गारंटी देते हैं कि कोई भी बाहर आकर राजनीति की बात नहीं करेगा."

रिपोर्ट में और क्या-क्या है?

इमरान की मेडिकल रिपोर्ट में एंग्जाइटी का लेवल थ्री प्लस बताया गया है, जिसे बेहद गंभीर माना जाता है.

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि पूर्व प्रधानमंत्री इमरान ख़ान की आखिरी बार मेडिकल जांच 10 अगस्त, 2026 को एक मेडिकल बोर्ड द्वारा की गई थी. और इस मेडिकल बोर्ड में ऑप्थल्मोलॉजी, कार्डियोलॉजी और मेडिसन में एक्सपर्टीज रखने वाले डॉक्टर शामिल थे.

सुप्रीम कोर्ट में पेश की गई रिपोर्ट के अनुसार, पूर्व प्रधानमंत्री लगभग 73 वर्ष के हैं और मेडिकल एग्जामिनेशन के दौरान इमरान ख़ान का ब्लड प्रेशर 140/80 और पल्स 54 प्रति मिनट दर्ज की गई. इस रिपोर्ट में पूर्व प्रधानमंत्री की ईसीजी सामान्य बताई गई है, चेस्ट में कोई समस्या नहीं है और हार्ट वाल्व और चैम्बर सामान्य हैं.

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि इमरान ख़ान ने सिर में भारीपन और दिल की धड़कन तेज होने की शिकायत की थी. हालांकि मेडिकल रिपोर्ट के अनुसार, सीने में दर्द, भारीपन या सांस लेने में तकलीफ की कोई शिकायत नहीं थी.

रिपोर्ट में बताया गया है कि मेडिकल बोर्ड ने ब्लड प्रेशर और एंग्जाइटी को कंट्रोल करने के लिए दवाएं दी हैं.

रिपोर्ट में इमरान ख़ान को पत्रिकाएं, समाचार पत्र, टीवी और पढ़ने के लिए किताबें उपलब्ध कराने की सिफ़ारिश की गई है. मेडिकल बोर्ड ने पीटीआई संस्थापक की अपने परिवार और पत्नी के साथ मीटिंग की अवधि बढ़ाने की सिफारिश की है.

सुप्रीम कोर्ट में पेश की गई एक रिपोर्ट के अनुसार, परिवार के साथ अधिक मेल-जोल से इमरान ख़ान की एंग्जाइटी और ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने में मदद मिल सकती है.

अदियाला जेल अधिकारियों ने सुप्रीम कोर्ट में पेश की गई रिपोर्ट में कहा है कि याचिकाकर्ता ने कुछ समय पहले इस्लामाबाद हाई कोर्ट में इसी तरह की याचिका दायर की थी.

इस्लामाबाद हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सरफ़राज डोगर की अध्यक्षता वाली एक पीठ ने याचिका पर सुनवाई की थी.

जेल के बाहर मीडिया से बात

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि सलमान अकरम राजा ने इस्लामाबाद हाई कोर्ट को आश्वासन दिया था कि इमरान खान से मिलने के बाद वह जेल परिसर के अंदर मीडिया से बात नहीं करेंगे. लेकिन इसके बावजूद उन्होंने इस संबंध में अदालत के आदेश का उल्लंघन किया है.

रिपोर्ट में कहा गया है कि जेल में पूर्व प्रधानमंत्री के साथ हुई मुलाक़ातों के माध्यम से न्यायपालिका, विदेश नीति और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के ख़िलाफ़ जनभावना को भड़काया गया था.

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि जेल नियमों के तहत इमरान ख़ान और उनकी पत्नी बुशरा बीबी की हर मंगलवार को नियमित रूप से मुलाकात होती है. और रिपोर्ट के अनुसार, इमरान ख़ान और उनकी पत्नी के बीच जेल में अब तक 84 मुलाकातें हो चुकी हैं.

रिपोर्ट में कहा गया है कि इमरान ख़ान के वकील सलमान सफदर ने भी 10 फरवरी और 4 अप्रैल, 2026 को पूर्व प्रधानमंत्री से मुलाकात की थी.

सुप्रीम कोर्ट को सौंपी गई रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि मेडिकल ऑफिसर्स इमरान ख़ान की डाइट की जांच करते हैं और दिन में तीन बार उनका मेडिकल चेपअप होता है.

रिपोर्ट में कहा गया है कि पूर्व प्रधानमंत्री की जांच कई सरकारी डॉक्टरों द्वारा भी की गई थी, जिसका रिकॉर्ड उपलब्ध है. इसके साथ ही पीटीआई संस्थापक की आंखों का इलाज एक नेत्र रोग विशेषज्ञ द्वारा किया गया था.

जेल अधिकारियों ने जो रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को सौंपी है उसमें कहा गया है कि इमरान ख़ान की एक आंख लगभग सामान्य हो गई है.

सुप्रीम कोर्ट को सौंपी गई रिपोर्ट में 4 नवंबर, 2023 से 10 अगस्त, 2026 तक 39 अलग-अलग मेडिकल एक्सपर्ट्स की इमरान ख़ान की मेडिकल चेकअप की समरी भी शामिल है.

जेल अधिकारियों ने सुप्रीम कोर्ट से इस याचिका का निपटारा करने का अनुरोध किया है.

एंग्जाइटी का लेवल थ्री से ज्यादा होने का मतलब क्या है

मनोवैज्ञानिक डॉ. रियाज भट्टी ने बीबीसी के असद सोहैब को बताया कि एंग्जाइटी का लेवल थ्री से ज़्यादा होना 'गंभीर चिंता और घबराहट की स्थिति' को दर्शाता है.

बीबीसी न्यूज़ उर्दू से बात करते हुए उन्होंने कहा, "यह स्थिति दिखाती है कि संबंधित व्यक्ति अपने आस-पास के माहौल के कारण चिंता और तनाव से पीड़ित है."

"लंबे समय तक एकांतवास और सामाजिक मेल-जोल की कमी से चिंता की यह स्थिति और भी बढ़ जाती है. रोगी निराश और अवसादग्रस्त भी हो सकता है."

उन्होंने कहा कि एकमात्र समाधान यह है कि संबंधित व्यक्ति को उनसे बातचीत करने की अनुमति दी जाए और जिस स्थान पर वह स्थित है, वहां की परिस्थितियों को उसके लिए अधिक अनुकूल बनाया जाए.

डॉ. रियाज भट्टी के अनुसार, सामाजिक मेलजोल, टहलना और व्यायाम करने से भी चिंता और घबराहट के लक्षण कम होते हैं.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

BBC World Service के नए ऐप को डाउनलोड करें

BBC News हिन्दी को चुनें और पाइए न्यूज़ अलर्ट, लाइव टीवी, पॉडकास्ट... सब एक जगह

कृपया नोट करें: नया ऐप ब्रिटेन और अमेरिका में उपलब्ध नहीं है.

Powered by Nyaya 247 News

संबंधित ख़बरें

इसी विषय की और ख़बरें →
लोक अदालत को लेकर हुई बैठक - Sheikhpura News
वकील

लोक अदालत को लेकर हुई बैठक - Sheikhpura News

राष्ट्रीय लोक अदालत में केसों के निष्पादन पर जोर - Darbhanga News
वकील

राष्ट्रीय लोक अदालत में केसों के निष्पादन पर जोर - Darbhanga News

लोक अदालत को लेकर की बैठक - Munger News
वकील

लोक अदालत को लेकर की बैठक - Munger News

पानीपत के रीपक कंसल बने सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के कोषाध्यक्ष, कोविड मुआवजा समेत कई याचिकाओं से रहे चर्चित

 - ripak kansal of panipat became the treasurer of the supreme court bar association and has been prominent in several petitions including those for covid compensation
वकील

पानीपत के रीपक कंसल बने सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के कोषाध्यक्ष, कोविड मुआवजा समेत कई याचिकाओं से रहे चर्चित - ripak kansal of panipat became the treasurer of the supreme court bar association and has been prominent in several petitions including those for covid compensation

सुप्रीम कोर्ट ने यमुना नदी के मैदान को हुए नुकसान के लिए 'आर्ट ऑफ लिविंग' को जिम्मेदार ठहराने वाले एनजीटी के आदेश को खारिज कर दिया; 5 करोड़ रुपए रिफंड का निर्देश दिया
वकील

सुप्रीम कोर्ट ने यमुना नदी के मैदान को हुए नुकसान के लिए 'आर्ट ऑफ लिविंग' को जिम्मेदार ठहराने वाले एनजीटी के आदेश को खारिज कर दिया; 5 करोड़ रुपए रिफंड का निर्देश दिया

न्यायमूर्ति संजय करोल ने पद छोड़ते हुए कहा, न्यायाधीश भगवान नहीं हैं, वे हर फैसले को सही नहीं देंगे - द ट्रिब्यून
वकील

न्यायमूर्ति संजय करोल ने पद छोड़ते हुए कहा, न्यायाधीश भगवान नहीं हैं, वे हर फैसले को सही नहीं देंगे - द ट्रिब्यून

लोक अदालत और मध्यस्थता: त्वरित समाधान का मार्ग
वकील

लोक अदालत और मध्यस्थता: त्वरित समाधान का मार्ग

राष्ट्रीय लोक अदालत की तैयारी को लेकर बैठक
वकील

राष्ट्रीय लोक अदालत की तैयारी को लेकर बैठक

ताज़ा ख़बरें