पुलिस के कारण जेल भेजे गए निर्दोषों को इलाहाबाद हाईकोर्ट से 2 लाख का मुआवजा
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पुलिस द्वारा निर्दोषों को जेल भेजने के मामलों में सख्त रुख अपनाया है और अब पुलिस अफसरों की सैलरी से जुर्माना कटेगा। न्यायमूर्ति सिद्धार्थ और न्यायमूर्ति विनय कुमार द्विवेदी की खंडपीठ ने 8 जून 2026 को 8 दिन तक अवैध हिरासत में रखे गए व्यक्ति को 2 लाख मुआवजा देने का आदेश दिया है। यह आदेश पुलिस द्वारा 'शांति भंग' की धाराओं के दुरुपयोग पर आधारित है।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पुलिस द्वारा निर्दोषों को जेल भेजने पर सख्त रुख अपनाया और पुलिस अफसरों की सैलरी से जुर्माना कटाने का आदेश दिया। न्यायमूर्ति सिद्धार्थ एवं न्यायमूर्ति विनय कुमार द्विवेदी की खंडपीठ ने हेबियस कॉर्पस रिट याचिका संख्या 317/2026 में 8 जून 2026 को सुनाए गए फैसले में 8 दिन तक अवैध हिरासत में रखे गए व्यक्ति को ₹2 लाख मुआवजा देने का आदेश दिया।
सूत्र: इलाहाबाद हाईकोर्ट के अनुसार, यह आदेश पुलिस द्वारा 'शांति भंग' की धाराओं के दुरुपयोग पर आधारित है। पुलिस कमिश्नरों और उनके अधीन कार्य कर रहे अधिकारियों को जो मजिस्ट्रेटी शक्तियां प्रदान की गई हैं, उनका कई मामलों में दुरुपयोग किया जा रहा है।
इसका मतलब क्या है
इलाहाबाद हाईकोर्ट का यह फैसला पुलिस द्वारा निर्दोषों को जेल भेजने पर सख्त रुख अपनाने का संकेत देता है। यह आदेश पुलिस को चेतावनी देता है कि अवैध हिरासत में रखे जाने पर उन्हें आर्थिक दंड का सामना करना पड़ सकता है। इससे पुलिस को अधिक सावधानी से कार्य करने के लिए प्रेरित किया जा सकता है और निर्दोष लोगों को परेशानी से बचाया जा सकता है।
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