मुजफ्फरपुर में राष्ट्रीय लोक अदालत, 91,751 मामलों का त्वरित समाधान
मुजफ्फरपुर सिविल कोर्ट में शनिवार को राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन होगा, जहाँ जिला विधिक सेवा प्राधिकार ने 44 बेंचों सहित 13 विशेष ट्रैफिक बेंच स्थापित की हैं। इस सत्र में 91,751 मामलों (68,768 प्री‑लिटिगेशन और 22,983 पोस्ट‑लिटिगेशन) को आपसी समझौते के माध्यम से निपटाने का लक्ष्य है, जिसमें अदालत शुल्क नहीं ली जाएगी और जमा शुल्क वापस कर दिया जाएगा।

सौजन्य से:- Prabhat Khabar
मुजफ्फरपुर सिविल कोर्ट में शनिवार को राष्ट्रीय लोक अदालत, 91 हजार से ज्यादा मामलों का होगा निपटारा
प्रतीकात्मक तस्वीर
मुजफ्फरपुर सिविल कोर्ट में राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन होने जा रहा है. इस बार 91,751 से अधिक मामलों के निपटारे का लक्ष्य है. आम लोगों को मुकदमों के त्वरित, सरल और नि:शुल्क समाधान का अवसर मिलेगा.
राष्ट्रीय लोक अदालत: मुजफ्फरपुर सिविल कोर्ट परिसर में शनिवार को राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन होने जा रहा है. जिला विधिक सेवा प्राधिकार के तत्वावधान में आयोजित होने वाले इस कार्यक्रम की शुरुआत सुबह 10:30 बजे से होगी. इसका मुख्य उद्देश्य आम लोगों को मुकदमों के त्वरित, सरल और नि:शुल्क समाधान का अवसर देना है. जिला प्रशासन और प्राधिकार की ओर से इसका व्यापक प्रचार-प्रसार किया जा रहा है ताकि अधिक से अधिक जरूरतमंद इसका लाभ उठा सकें.
प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह जिला विधिक सेवा प्राधिकार की अध्यक्ष श्वेता कुमारी सिंह ने मुकदमों की सुनवाई के लिए कुल 44 बेंचों का गठन किया है. शहर में पेंडिंग ट्रैफिक मामलों को तेजी से निपटाने के लिए 13 विशेष बेंच सिर्फ ट्रैफिक चालान के निष्पादन के लिए बनाई गई हैं.
91,751 मुकदमों की हुई पहचान
इस बार अदालत में कुल 91,751 मामलों के निष्पादन का लक्ष्य तय किया गया है. इनमें:
- प्री-लिटिगेशन मामले: 68,768 (कोर्ट आने से पहले सुलझने योग्य विवाद)
- पोस्ट-लिटिगेशन मामले: 22,983 (अदालत में लंबित वाद)
इन मामलों का होगा आपसी समझौते से समाधान
लोक अदालत में दोनों पक्षों की सहमति और सौहार्दपूर्ण बातचीत से केस बंद कराए जाते हैं. प्रमुख मामले:
- बैंक ऋण वसूली एवं नीलाम-पत्र वाद
- शमनीय (समझौता योग्य) लघु आपराधिक मुकदमे व चेक बाउंस (NI एक्ट)
- बिजली विवाद, श्रम वाद एवं माप-तौल मामले
- मोटर वाहन दुर्घटना दावा एवं सिविल सूट
- ट्रैफिक चालान से जुड़े प्रकरण
मुफ्त न्याय और कोर्ट फीस वापसी की सुविधा
लोक अदालत में मामले के निपटारे पर किसी भी तरह की अदालती फीस नहीं ली जाती है. यदि किसी लंबित मामले में पहले से कोर्ट फीस जमा कराई गई है, तो समझौते के बाद वह पूरी राशि वापस कर दी जाती है. इसके अलावा लोक अदालत के फैसले के खिलाफ आगे कोई अपील नहीं होती है, जिससे वर्षों चलने वाली मुकदमेबाजी हमेशा के लिए समाप्त हो जाती है.
ये भी पढ़ें: राज्यपाल का एक दिवसीय दौरा , विश्वविद्यालय और रामकृष्ण मिशन के कार्यक्रमों में होंगे शामिल
आपके शहर में
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए
Powered by Nyaya 247 News
संबंधित ख़बरें
इसी विषय की और ख़बरें →
बॉम्बे हाई कोर्ट ने बीएमसी को दी कड़ी चेतावनी: मुंबई की सड़कों पर गंदगी का अलार्म

दिल्ली HC ने विनेश फोगाट को मातृत्व‑छूट नहीं दी, चयन नियम लागू रखे

सर्वर त्रुटि 500: पृष्ठ अभी नहीं खुल रहा

सर्वर त्रुटि 500: अस्थायी समस्या, पुनः प्रयास करें

सर्वर त्रुटि 500 – पुनः प्रयास करें

सर्वर त्रुटि 500: अनुरोध पूरा नहीं हो सका

करनाल में प्री‑लोक अदालत: बैंक से जुड़े 500 विवादों का समाधान

सर्वर त्रुटि 500: अनुरोध में समस्या
ताज़ा ख़बरें
- सर्वर त्रुटि 500: क्या करें?
- सर्वर त्रुटि: 500 – अस्थायी समस्या
- कानून मंत्री मेघवाल ने राष्ट्रीय न्यायाधिकरण आयोग के नियमों पर सुझाव मांगे, आईटीएटी को न्यायिक आधारशिला बताया
- सर्वर त्रुटि 500: पुनः प्रयास आवश्यक
- सर्वर त्रुटि 500 – कृपया पुनः प्रयास करें
- कुल्लू में कल राष्ट्रीय लोक अदालत, हल होंगे जमीनी और आर्थिक विवाद
- हाईकोर्ट ने यूपी पुलिस की सजा‑पुनरावलोकन में देरी को माफ़ करने का आदेश दिया
- जज ने सौरभ दास को दी सच्ची सीख‑‘सही‑गलत की जाँच किए बिना कोर्ट में न फंसें’

