होम›कानून›रक्तपिपासु नदियों को मानवीय समझें: जलवायु, प्रदूषण और जनसंख्या के दबाव से बचाव के नए विचार
कानून
रक्तपिपासु नदियों को मानवीय समझें: जलवायु, प्रदूषण और जनसंख्या के दबाव से बचाव के नए विचार
जलवायु परिवर्तन, बढ़ती प्रदूषण और जनसंख्या का दबाव भारतीय नदियों को गंभीर संकट में ले आया है। इन चुनौतियों को इंसान जैसी संवेदना से देखना उनके संरक्षण के नए मार्ग खोल सकता है। इस पर 'दुनिया जहान' में इस सप्ताह विशेष चर्चा होगी।

सौजन्य से:- facebook.com
हमारी नदियां मुश्किल में हैं. जलवायु परिवर्तन उनके बहाव को बिगाड़ रहा है. प्रदूषण उनके पानी को ज़हरीला बना रहा है. बढ़ती आबादी नदियों को बर्दाश्त करने की हद से आगे धकेल रही है. लेकिन क्या हो अगर हम...
Powered by Nyaya 247 News
संबंधित ख़बरें
इसी विषय की और ख़बरें →
कानून
हरियाणा में 12 सितंबर को ट्रैफिक ई‑चालान निपटाने लोक अदालत, कार‑बाइक मालिकों के लिए अवसर

कानून
महराजगंज में अवकाशकालीन सुरक्षा को सुदृढ़ करने के लिए डीएम‑एसपी ने अधिकारियों को सतर्क रहने का निर्देश

कानून
लोक अदालत में अधिक मामलों का निपटारा बढ़ाने पर जोर

कानून
सत्य निकेतन हादसे के बाद अतिरिक्त मंजिलों को सील करने में सरकारी नियमों की अड़चन

कानून
हमारी नदियों की ज़िन्दगी के लिए एक नया दृष्टिकोण

कानून
नदियों की संकट स्थिति: जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण और जनसंख्या दबाव से बढ़ रही चुनौतियाँ

कानून
वाराणसी में पेंशनधारकों के लिए 15 दिसंबर को पेंशन अदालत का संचालन

कानून
जलवायु परिवर्तन और जनसंख्या दबाव से नदियों की बिगड़ती स्थिति—इन्हें इंसान मानना बदल सकता है?
ताज़ा ख़बरें
- नदियों को मानवीय दृष्टिकोण से देखें: जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण और जनसंख्या का बढ़ता दबाव
- नदियाँ भी मनुष्य हैं: उनके संकट पर नया दृष्टिकोण
- कुशीनगर में 12 सितंबर को राष्ट्रीय लोक अदालत, बैंक‑ऋण व पारिवारिक विवाद सुलह‑समझौते से सुलझेंगे
- रक्तरंजित धारा: जलवायु‑परिवर्तन, प्रदूषण और जनसंख्या दबाव से नदियों की संकटग्रस्त स्थिति
- विद्यार्थियों ने राष्ट्रीय लोक अदालत के प्रचार हेतु जागरूकता रैली निकाली
- नदियों को मानवीकृत करें? क्या इससे जल संकट में बदलाव आ सकता है?
- नदियों की दुविधा: जलवायु, प्रदूषण और जनसंख्या के साथ संघर्ष
- नदियों के संकट को मानवीय रूप में देखें: क्या इससे बदलाव आएगा?

