हिमाचल में राजस्व लोक अदालतें: 6.81 लाख मामलों का निपटारा
राजस्व लोक अदालतों के चलते हिमाचल प्रदेश में अब तक 6.81 लाख लंबित राजस्व मामलों का समाधान हो चुका है। इनमें 5.44 लाख से अधिक इंतकाल, 47,333 तकसीम और 63,000 निशानदेही के मामले तथा 26,288 दरूस्ती के कार्य शामिल हैं। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने इस पहल को तेज़, सरल और पारदर्शी सरकारी सेवाओं की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।

सौजन्य से:- ETV Bharat
हिमाचल में 6.81 लाख राजस्व मामलों पर चला ‘लोक अदालत’ का हथौड़ा, जमीन के झंझट से मिली बड़ी राहत
हिमाचल में लंबित राजस्व मामलों के निपटारे के लिए हर माह के अंतिम दो दिनों में राजस्व लोक अदालतें आयोजित की जाती हैं.
By ETV Bharat Himachal Pradesh Team
Published : September 5, 2026 at 3:04 PM IST
शिमला: भूमि से जुड़ा कोई छोटा सा काम हो या वर्षों से अटका राजस्व मामला, हिमाचल में लोगों को अक्सर तहसील और उप-तहसील कार्यालयों के चक्कर काटने पड़ते थे. कभी इंतकाल अटकता था तो कभी तकसीम और निशानदेही के मामलों में लंबा इंतजार करना पड़ता था. समय के साथ लंबित मामलों का बोझ बढ़ता गया और लोगों का समय व पैसा दोनों खर्च होते रहे. ऐसे में प्रदेश सरकार की ओर से शुरू की गई राजस्व लोक अदालतें अब लंबित मामलों के निपटारे का प्रभावी माध्यम बनकर सामने आई हैं.
लोक अदालतों के जरिए अब तक प्रदेशभर में करीब 6.81 लाख लंबित राजस्व मामलों का समाधान किया जा चुका है. इनमें 5.44 लाख से अधिक इंतकाल, 47,333 तकसीम और 63 हजार से अधिक निशानदेही के मामले शामिल हैं. इसके अलावा राजस्व अभिलेखों में 26,288 दरूस्ती भी की गई हैं.
सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा, "सरकार आगे भी सुधारात्मक प्रक्रियाओं को जारी रखते हुए ऐसी व्यवस्थाओं को मजबूत करेगी, जिनसे सरकारी सेवाएं लोगों तक त्वरित, सरल और सुगम तरीके से पहुंच सकें. सरकार का उद्देश्य है कि लोगों को अपने वैध मामलों के समाधान के लिए बार-बार सरकारी कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें और अनावश्यक समय व धन खर्च न करना पड़े".
अक्टूबर 2023 से हर महीने लग रही लोक अदालत
लंबित राजस्व मामलों को तेजी से निपटाने के लिए प्रदेश में अक्टूबर 2023 से प्रत्येक माह के अंतिम दो दिनों में तहसील और उप-तहसील मुख्यालयों पर राजस्व लोक अदालतें आयोजित की जा रही हैं. इन अदालतों के माध्यम से लंबित मामलों की सुनवाई कर मौके पर ही निपटारे की प्रक्रिया को गति दी जा रही है. इसका सीधा लाभ उन लोगों को मिल रहा है, जिन्हें छोटे-छोटे राजस्व कार्यों के लिए लंबे समय तक इंतजार करना पड़ता था.
सप्ताह में तीन दिन विशेष अदालत
सरकार ने राजस्व मामलों के निपटारे की रफ्तार और बढ़ाने के लिए जनवरी 2026 से विशेष राजस्व लोक अदालतों की शुरुआत की है. इसके तहत हर सप्ताह मंगलवार, बुधवार और गुरुवार को तीन दिन विशेष लोक अदालतें लगाई जा रही हैं. इनमें मुख्य रूप से तकसीम और राजस्व दस्तावेजों में सुधार से संबंधित मामलों का समाधान किया जा रहा है. इससे लंबित मामलों की संख्या में कमी आने के साथ लोगों को अपनी जमीन से जुड़े मामलों के समाधान के लिए अधिक प्रभावी मंच मिला है.
गांव-दूरदराज के लोगों को सबसे ज्यादा फायदा
राजस्व लोक अदालतों की यह पहल ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों के लोगों के लिए विशेष राहत लेकर आई है. पहले भूमि संबंधी मामलों के लिए लोगों को बार-बार राजस्व कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते थे. इसमें आने-जाने का खर्च, काम से छुट्टी और समय तीनों का नुकसान होता था. लोक अदालतों के माध्यम से मामलों के त्वरित निपटारे से अब लोगों का समय और धन दोनों बच रहा है. राजस्व अभिलेखों में दरूस्ती और भूमि संबंधी मामलों के समयबद्ध समाधान से प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही को भी मजबूती मिल रही है. बड़ी संख्या में मामलों के निपटारे से लोगों में इस व्यवस्था को लेकर भरोसा बढ़ा है.
दफ्तरों के बार चक्कर नहीं
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेशवासियों को पारदर्शी, जवाबदेह और जनोन्मुखी प्रशासन उपलब्ध करवाने के लिए प्रतिबद्ध है. उन्होंने कहा कि राजस्व से जुड़े मामले सीधे परिवारों और भूमि मालिकों के हितों से जुड़े होते हैं, इसलिए इनका समयबद्ध समाधान सरकार की प्राथमिकता है.
ये भी पढ़ें: करुणामूलक आधार पर सुख की सरकार ने 1620 को दी नौकरी, जानिए किस विभाग में कितने केस लंबित, कितने नामंजूर
Powered by Nyaya 247 News
संबंधित ख़बरें
इसी विषय की और ख़बरें →
मानगो चौक में राष्ट्रीय लोक अदालत के बारे में जागरूकता रथ अभियान

हरियाणा में 12 सितंबर को ट्रैफिक ई‑चालान निपटाने लोक अदालत, कार‑बाइक मालिकों के लिए अवसर

महराजगंज में अवकाशकालीन सुरक्षा को सुदृढ़ करने के लिए डीएम‑एसपी ने अधिकारियों को सतर्क रहने का निर्देश

लोक अदालत में अधिक मामलों का निपटारा बढ़ाने पर जोर

सत्य निकेतन हादसे के बाद अतिरिक्त मंजिलों को सील करने में सरकारी नियमों की अड़चन

हमारी नदियों की ज़िन्दगी के लिए एक नया दृष्टिकोण

नदियों की संकट स्थिति: जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण और जनसंख्या दबाव से बढ़ रही चुनौतियाँ

वाराणसी में पेंशनधारकों के लिए 15 दिसंबर को पेंशन अदालत का संचालन
ताज़ा ख़बरें
- जलवायु परिवर्तन और जनसंख्या दबाव से नदियों की बिगड़ती स्थिति—इन्हें इंसान मानना बदल सकता है?
- नदियों को मानवीय दृष्टिकोण से देखें: जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण और जनसंख्या का बढ़ता दबाव
- नदियाँ भी मनुष्य हैं: उनके संकट पर नया दृष्टिकोण
- कुशीनगर में 12 सितंबर को राष्ट्रीय लोक अदालत, बैंक‑ऋण व पारिवारिक विवाद सुलह‑समझौते से सुलझेंगे
- रक्तरंजित धारा: जलवायु‑परिवर्तन, प्रदूषण और जनसंख्या दबाव से नदियों की संकटग्रस्त स्थिति
- विद्यार्थियों ने राष्ट्रीय लोक अदालत के प्रचार हेतु जागरूकता रैली निकाली
- नदियों को मानवीकृत करें? क्या इससे जल संकट में बदलाव आ सकता है?
- नदियों की दुविधा: जलवायु, प्रदूषण और जनसंख्या के साथ संघर्ष

