होम›मुकदमे›सुप्रीम कोर्ट ने स्टैंडर्ड चार्टर्ड को बड़ी राहत दी, 23 साल पुराने मामले को रद्द किया
मुकदमे

सुप्रीम कोर्ट ने स्टैंडर्ड चार्टर्ड को बड़ी राहत दी, 23 साल पुराने मामले को रद्द किया

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक को बड़ी राहत देते हुए 23 साल पुराने आपराधिक मामले को रद्द कर दिया। देश की टॉप अदालत ने कहा कि मामला पेंडिंग होने के कारण 3 दशक पुराने ट्रांजैक्शन से जुड़े होने के बावजूद सुनवाई नहीं हो सकी।

22 जुलाई 2026 को 02:14 am बजे
सुप्रीम कोर्ट ने स्टैंडर्ड चार्टर्ड को बड़ी राहत दी, 23 साल पुराने मामले को रद्द किया

सौजन्य से:- इंडिया टीवी हिंदी

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक को बड़ी राहत देते हुए 23 साल पुराने आपराधिक मामले और समन आदेश को रद्द कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने ब्रिटिश मल्टीनेशनल बैंक के खिलाफ मामले को रद्द करते हुए कहा कि शिकायत का समर्थन करने वाला कोई भी दस्तावेजी सबूत नहीं था। जस्टिस जे. बी. पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की बेंच ने अपने अंतर्निहित अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए कहा कि मामला 23 सालों से पेंडिंग है और 3 दशक पुराने ट्रांजैक्शन से जुड़ा होने के बावजूद सुनवाई समन जारी होने के चरण से आगे नहीं बढ़ सकी।

बॉम्बे हाई कोर्ट के आदेश को निरस्त करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इसे खत्म करना ही उचित

देश की टॉप अदालत ने बॉम्बे हाई कोर्ट के आदेश को निरस्त करते हुए कहा कि इस मामले को अब खत्म करना ही उचित है। जस्टिस जे. बी. पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की बेंच ने कहा कि शिकायत विदेशी मुद्रा विनियमन अधिनियम (एफ. ई. आर. ए.), 1973 के तहत कथित 'स्पष्टीकरण नोटिस' पर आधारित थी, लेकिन शिकायतकर्ता आज तक इसका कोई ठोस रिकॉर्ड या सटीक तारीख पेश नहीं कर सका।

मामले को जारी रखना बैंक और उसके अधिकारियों को अनिश्चितकाल तक अटकी हुई स्थिति में रखने जैसा

जस्टिस जे. बी. पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की बेंच ने कहा कि ऐसे हालात में मामले को जारी रखना बैंक और उसके अधिकारियों को अनिश्चितकाल तक अटकी हुई स्थिति में रखना होगा। सुप्रीम कोर्ट ने ये भी स्पष्ट किया कि दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 397 के तहत वैकल्पिक उपाय उपलब्ध होने से धारा 482 के तहत याचिका की सुनवाई पर रोक नहीं लगती। दोनों प्रावधान अलग-अलग दायरे में काम करते हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने जांच एजेंसियों के रवैये पर भी उठाए सवाल

इसके साथ ही कोर्ट ने कहा कि एफ. ई. आर. ए. कानून की धारा 61(2) के तहत 'स्पष्टीकरण नोटिस' देना अनिवार्य है। इसके बिना न तो वैध शिकायत दर्ज की जा सकती है और न ही मजिस्ट्रेट संज्ञान ले सकता है। देश के सर्वोच्च न्यायालय ने इस मामले में जांच एजेंसियों के रवैये पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि रिकॉर्ड से लंबे समय तक बिना किसी ठोस कार्रवाई के लापरवाही साफ दिखाई देती है।

ये भी पढ़ें

न्याय 247 न्यूज़ द्वारा प्रस्तुत

संबंधित ख़बरें

इसी विषय की और ख़बरें →
दिल्ली उच्च न्यायालय सहित पांच स्थानों को हिंसक हमले की धमकी
मुकदमे

दिल्ली उच्च न्यायालय सहित पांच स्थानों को हिंसक हमले की धमकी

चेहरे की पहचान को चुनौती देने वाले विरोध प्रदर्शन: भारत का सर्वोच्च न्यायालय सुनेगा मामला
मुकदमे

चेहरे की पहचान को चुनौती देने वाले विरोध प्रदर्शन: भारत का सर्वोच्च न्यायालय सुनेगा मामला

गवर्नर हाउस घेराव के एलान पर हाईकोर्ट का कड़वा जवाब, शांति बनाए रखने का निर्देश
मुकदमे

गवर्नर हाउस घेराव के एलान पर हाईकोर्ट का कड़वा जवाब, शांति बनाए रखने का निर्देश

वार्निंग लेबल लागू करने में देरी को लेकर अदालत ने एफएसएसएआई को फटकारा
मुकदमे

वार्निंग लेबल लागू करने में देरी को लेकर अदालत ने एफएसएसएआई को फटकारा

सुप्रीम कोर्ट ने कोरियन रैना जैसे 5 कॉमेडियन के खिलाफ दर्ज मामले रद्द कर दिए
मुकदमे

सुप्रीम कोर्ट ने कोरियन रैना जैसे 5 कॉमेडियन के खिलाफ दर्ज मामले रद्द कर दिए

कर विभाग को झटका: ट्रिब्यूनल ने कर विभाग की अपील खारिज कर दी
मुकदमे

कर विभाग को झटका: ट्रिब्यूनल ने कर विभाग की अपील खारिज कर दी

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायधीश का शीर्ष अदालत में हलफनामा: ट्रिब्यूनल की गतिविधियों पर हाईकोर्ट के आदेश को खारिज करना है
मुकदमे

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायधीश का शीर्ष अदालत में हलफनामा: ट्रिब्यूनल की गतिविधियों पर हाईकोर्ट के आदेश को खारिज करना है

सुप्रीम कोर्ट ने तृणमूल बैंक खातों से प्रतिबंध में नहीं किया हस्तक्षेप
मुकदमे

सुप्रीम कोर्ट ने तृणमूल बैंक खातों से प्रतिबंध में नहीं किया हस्तक्षेप

ताज़ा ख़बरें