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बिना वकालत के अनुभव के भी बन सकेंगे सिविल जज! सुप्रीम कोर्ट ने दी 2027 तक बड़ी राहत, पढ़ें नया नियम

बिना वकालत के अनुभव के भी बन सकेंगे सिविल जज! सुप्रीम कोर्ट ने दी 2027 तक बड़ी राहत, पढ़ें नया नियम यह बड़ा फैसला भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत, जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह और जस्टिस के विनोद चंद्रन की पीठ ने सुनाया ह…

21 अगस्त 2026 को 08:55 am बजे
बिना वकालत के अनुभव के भी बन सकेंगे सिविल जज! सुप्रीम कोर्ट ने दी 2027 तक बड़ी राहत, पढ़ें नया नियम

सौजन्य से:- ETV Bharat

बिना वकालत के अनुभव के भी बन सकेंगे सिविल जज! सुप्रीम कोर्ट ने दी 2027 तक बड़ी राहत, पढ़ें नया नियम

यह बड़ा फैसला भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत, जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह और जस्टिस के विनोद चंद्रन की पीठ ने सुनाया है.

By Sumit Saxena

Published : August 21, 2026 at 1:48 PM IST

नई दिल्लीः न्यायिक सेवा (सिविल जजों की भर्ती) में शामिल होने के नियमों पर सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को एक बहुत ही महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है. सुप्रीम कोर्ट ने अपने मई 2025 के उस पुराने फैसले को बरकरार रखा है, जिसमें कहा गया था कि जज बनने के लिए पहले वकील के रूप में काम करने का अनुभव होना जरूरी है. हालांकि, कोर्ट ने इस अनुभव की समय-सीमा में बड़ी ढील दी है.

अब उम्मीदवारों के लिए कोर्ट में प्रैक्टिस करने की शर्त को 3 साल से घटाकर सिर्फ 1 साल कर दिया गया है. यह बड़ा फैसला भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत, जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह और जस्टिस के विनोद चंद्रन की पीठ ने सुनाया है.

सुप्रीम कोर्ट का यह नया आदेश उन कई पुनर्विचार याचिकाओं पर आया है, जिनमें मई 2025 के पुराने फैसले को चुनौती दी गई थी. उस पुराने फैसले में नियम बनाया गया था कि सिविल जज (जूनियर डिवीजन) की परीक्षा में बैठने के लिए उम्मीदवारों के पास वकील के तौर पर कम से कम 3 साल की वकालत का अनुभव होना ही चाहिए.

न्यायिक सेवा परीक्षा में पास होने वाले उम्मीदवारों को राज्य न्यायिक अकादमी (स्टेट ज्यूडिशियल एकेडमी) में एक साल की कड़ी ट्रेनिंग लेनी होगी. इसके बाद उन्हें छह महीने तक किसी जिला जज या उच्च न्यायिक सेवा अधिकारी के तहत और फिर अगले छह महीने किसी मौजूदा हाई कोर्ट जज के तहत क्लर्कशिप (काम सीखने के लिए इंटर्नशिप) करनी होगी.

2027 तक परीक्षा देने वालों के लिए विशेष राहत

सुप्रीम कोर्ट ने उन छात्रों को एक बहुत बड़ी राहत दी है जो फिलहाल बदलाव के इस दौर से गुजर रहे हैं. कोर्ट ने 20 मई 2025 पुराने फैसले की तारीख से लेकर 31 मार्च 2027 के बीच परीक्षा देने वाले उम्मीदवारों के लिए वकालत के अनुभव की इस शर्त को पूरी तरह से हटा दिया है.

जो उम्मीदवार बिना किसी वकालत के अनुभव के इस परीक्षा को पास करेंगे, उनके लिए कोर्ट ने एक अतिरिक्त नियम बनाया है. ऐसे चुने गए उम्मीदवारों को पहले 1 साल तक 'ट्रेनी ज्यूडिशियल ऑफिसर' (प्रशिक्षु न्यायिक अधिकारी) के रूप में सेवा देनी होगी. इसके बाद, उन्हें 1 साल की एक और व्यवस्थित क्लर्कशिप (काम सीखने की प्रक्रिया) पूरी करनी होगी.

इससे पहले, शीर्ष अदालत ने इन पुनर्विचार याचिकाओं पर नोटिस जारी किया था और खुली अदालत में सुनवाई की अनुमति दी थी. इन पुनर्विचार याचिकाओं में मई 2025 के उस फैसले को चुनौती दी गई थी, जिसमें कहा गया था कि सिविल जज (जूनियर डिवीजन) परीक्षा में बैठने के लिए उम्मीदवारों के पास वकील के रूप में कम से कम तीन साल की वकालत का अनुभव होना अनिवार्य है.

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