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सुप्रीम कोर्ट ने मेरठ में 16,726 अवैध इमारतों को सील करने का कड़ा आदेश दिया

सुप्रीम कोर्ट ने मेरठ के सेंट्रल मार्केट ध्वस्तीकरण मामले में अवैध निर्माणों के खिलाफ तेज़ कार्रवाई का निर्देश दिया, जिसमें जोन‑1 की 16,726 इमारतों की तुरंत सीलिंग शामिल है। उल्देपुर की सैकड़ों अवैध कॉलोनियों पर भी समान आदेश दिया गया और अधिकारियों से विस्तृत रिपोर्ट व जिम्मेदारों की सूची माँगी गई, अगली सुनवाई 9 दिसंबर को तय हुई।

21 सितंबर 2026 को 04:04 pm बजे
सुप्रीम कोर्ट ने मेरठ में 16,726 अवैध इमारतों को सील करने का कड़ा आदेश दिया

सौजन्य से:- Navbharat Times

Meerut Central Market Demolition Case: मेरठ के सेंट्रल मार्केट ध्वस्तीकरण केस की सुनवाई के क्रम में सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया। कोर्ट ने अवैध निर्माणों पर कार्रवाई की बात कही है।

हाइलाइट्स

उल्देपुर में अवैध निर्माण के मामले में कोर्ट का आया सख्त आदेश

अधिकारियों से इस प्रकार से अवैध निर्माण के जिम्मेदारों की मांगी सूची

करीब 600 कॉलोनियों में 16,726 निर्माणों पर एक्शन का निर्देश

मेरठ: उत्तर प्रदेश के मेरठ के सेंट्रल मार्केट ध्वस्तीकरण मामले में सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख सामने आया है। सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान स्पष्ट शब्दों में कहा कि अवैध निर्माण अवैध ही होता है। उसके खिलाफ एक्शन होता है, चाहे वह एक्शन 5 साल बाद हो, या 50 साल बाद। दरअसल, सेंट्रल मार्केट ध्वस्तीकरण मामले में लोगों को राहत दिए जाने की मांग लगातार उठ रही है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अवैध निर्माणों को हर हाल में तोड़ा जाएगा। कोर्ट ने सेंट्रल मार्केट की सुनवाई के दौरान सेट बैक वाली प्रॉपर्टी के अवैध निर्माण के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया। उन सभी ढांचे को गिराने का आदेश दिया। उल्देपुर में अवैध निर्माण का मामला सामने आने के बाद कोर्ट ने इस पर सख्त रुख अपनाया। कोर्ट ने कहा कि तोड़ना तो पड़ेगा ही। 500 से 600 अवैध कॉलोनियों का निर्माण हो गया। प्राधिकरण से कोर्ट ने कहा कि इस प्रकार की स्थिति को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

जोन एक के निर्माण होंगे सील

सुप्रीम कोर्ट ने जोन-1 के 16,726 निर्माण को तत्काल सील करने के आदेश दिए हैं। उल्देपुर की अवैध कॉलोनियों पर भी सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट तौर पर कहा कि अवैध कॉलोनी में किए गए निर्माण को हर हाल में ढहाया जाएगा। सील के बावजूद बची इमारत पर भी कार्रवाई के आदेश जारी किए गए हैं। कोर्ट ने 44 संपत्तियों के आदेश में कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए। सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के क्रम में कहा कि अब तक आवास विकास में केवल कुछ संपत्तियों पर ही कार्रवाई की गई है।

इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट ने प्रमुख सचिव आवास से जवाब मांगा है। कोर्ट ने आवास विकास के प्रमुख सचिव से सवाल किया है कि अवैध निर्माण कैसे हुए? इसके बारे में पूरी जानकारी दी जाए। अगली सुनवाई के लिए 9 दिसंबर की तारीख तय की गई है।

अवैध कॉलोनियों पर आश्चर्य

सुप्रीम कोर्ट के वकील ईलिन सारस्वत ने कोर्ट की सुनवाई के संबंध में बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने अथॉरिटी के अधिकारियों को सुनाते हुए कहा कि अवैध निर्माण अवैध ही होता है और उसके खिलाफ कार्रवाई की ही जाती है, चाहे पांच वर्षों बाद हो या पचास वर्षों बाद हो। उल्देपुर में सैकड़ों अवैध कॉलोनियों की बात पर गहरा आश्चर्य जताते हुए कोर्ट ने सभी अवैध कॉलोनी को गिराने का आदेश दिया। साथ ही, अथॉरिटी पर कड़ा रुख भी अपनाया है।

कोर्ट ने पूछा कि जब पिछले पांच वर्षों से अवैध कॉलोनी निर्माण सड़कों का निर्माण हो रहा था। उस समय परिषद और अफसर क्या कर रहे थे? इस दौरान कोई सख्त कार्रवाई क्यों नहीं की गई? इन सबका मास्टरमाइंड कौन है? इनका उत्तर अथॉरिटी की ओर से नहीं दिया गया। मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अथॉरिटी के चेयरमैन गुरुप्रसाद को मेरठ शहर के चारों जोन ए, बी, सी और डी में स्थित सारे अवैध निर्माण और उन पर एक्शन को लेकर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।

सीलिंग को लेकर सख्त आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने अवैध निर्माण पर सख्ती दिखाते हुए सरकार को आदेश दिया कि मेरठ शहर के ए जोन स्थित लगभग 16,726 अवैध निर्माणों के खिलाफ तुरंत एक्शन लिया जाए। इसकी शुरुआत उक्त निर्माणों की सीलिंग से हो। कोर्ट ने हाल ही में हुए दिल्ली के हादसे का उदाहरण देते हुए कहा कि ऐसे निर्माणों का हटाया जाना अति आवश्यक है।

सुप्रीम कोर्ट ने सेंट्रल मार्किट इत्यादि में विस्थापित और प्रभावित हुए लोगों के पुनर्वास की कार्यवाही को सरकार पर छोड़ा है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सरकार इनको पुनर्वासित करने के लिए आजाद है। सरकार चाहे तो प्रभावित लोगों का पुनर्वास कर सकती है। कोर्ट ने पिटीशन को जान की धमकी मिलने के मामले में सरकार को सुरक्षा उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। (इनपुट: रामबाबू मित्तल)

लेखक के बारे मेंराहुल पराशरराहुल पराशर नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में सीनियर डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर (Senior Digital Content Producer) हैं। वे नवभारत टाइम्स की यूपी-उत्तराखंड टीम में काम करते हैं। प्रिंट, न्यूज एजेंसी और डिजिटल पत्रकारिता में उनका 22 साल लंबा का अनुभव है, जिसमें उन्होंने रिपोर्टर और डेस्क पर विभिन्न भूमिकाओं में काम किया है। राहुल पराशर ने अक्टूबर 2021 में नवभारत टाइम्स ऑनलाइन जॉइन किया था। उन्होंने पिछले 4 वर्षों में यूपी विधानसभा चुनाव, यूपी निकाय चुनाव, उत्तराखंड विधानसभा चुनाव, यूपी में एसआईआर प्रक्रिया जैसे बड़े घटनाक्रम का विस्तृत कवरेज किया है। राजनीति गतिविधियों से लेकर प्रशासनिक हलचल और क्राइम की घटनाओं पर उनका फोकस रहता है।

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पत्रकारिता अनुभव: अखबार और डिजिटल मीडिया में 22 साल से कार्यरत

राहुल पराशर ने साल 2004 में प्रभात खबर, पटना से अपने करियर की शुरुआत की थी। इसके बाद राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण और दैनिक भास्कर जैसे प्रतिष्ठित अखबारों में जूनियर रिपोर्टर से लेकर प्रधान संवाददाता के पद पर काम किया। इस दौरान उन्होंने भाजपा, राजद, जदयू और लोजपा जैसे दलों को कवर किया। उन्होंने शिक्षा विभाग की लंबे समय तक रिपोर्टिंग की। नवभारत टाइम्स वेबसाइट में काम करते हुए शानदार कवरेज के लिए कई बार संस्थान की ओर से सम्मानित किया गया है।

शिक्षा:

राहुल पराशर ने वर्ष 2004 में भारतीय विद्या भवन के पीके इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन से जर्नलिज्म का कोर्स किया है। मूल रूप से बिहार के मुजफ्फरपुर से आने वाले राहुल पराशर ने नेतरहाट, झारखंड से स्कूली शिक्षा ग्रहण की। बीआरए बिहार विश्वविद्यालय, मुजफ्फरपुर से वर्ष 2002 में स्नातक की डिग्री हासिल की है।... और पढ़ें

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